चांदीपुरा वायरस प्रकोप: केंद्र ने गुजरात-राजस्थान में NJORT तैनात किया, 'वन हेल्थ' रणनीति से जांच
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 5 अगस्त 2026 को चांदीपुरा वायरस रोग (CHPV) के बढ़ते प्रकोप से निपटने के लिए राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल (NJORT) को गुजरात और राजस्थान में तैनात कर दिया है। यह तैनाती एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) के अंतर्गत राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) की राज्य निगरानी इकाइयों के समन्वय से की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
NCDC, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और पशुपालन व दुधारू पालन विभाग (DAHD) के विशेषज्ञों से मिलकर बनी यह बहुविषयक टीम प्रकोप की महामारी विज्ञान संबंधी जांच, नैदानिक प्रबंधन, प्रयोगशाला समन्वय, वेक्टर निगरानी और जन स्वास्थ्य उपायों के क्रियान्वयन में दोनों राज्य सरकारों की सहायता करेगी। NCDC का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकालीन संचालन केंद्र (PHEOC) भी NJORT के समर्थन के लिए सक्रिय कर दिया गया है।
टीम जमीनी स्तर पर की गई प्रतिक्रिया की समीक्षा करेगी और क्षेत्र मूल्यांकन पूरा होने के बाद मंत्रालय को सिफारिशें प्रस्तुत करेगी।
वैज्ञानिक जांच का दायरा
यह तैनाती हाल के वर्षों में चांदीपुरा वायरस पर हुई सबसे व्यापक वैज्ञानिक जांचों में से एक के बीच हुई है। चेन्नई स्थित ICMR-राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (ICMR-NIE), पुद्दुचेरी स्थित ICMR-राष्ट्रीय वेक्टर नियंत्रण अनुसंधान संस्थान (ICMR-NIVCR), पुणे स्थित ICMR-राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (ICMR-NIV), हैदराबाद स्थित ICMR-राष्ट्रीय पूर्व-नैदानिक अनुसंधान संस्थान (ICMR-NIPCR) और बेंगलुरु स्थित ICAR-राष्ट्रीय पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान और रोग सूचना विज्ञान संस्थान (ICAR-NIVEDI) के विशेषज्ञ गुजरात राज्य स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर इस वायरस की जांच कर रहे हैं।
इस सहयोगात्मक अभ्यास में महामारी विज्ञान, विषाणु विज्ञान, कीट विज्ञान, पशु चिकित्सा विज्ञान और प्रयोगशाला निदान के विशेषज्ञ एक साथ आए हैं ताकि हल्के बुखार से लेकर तीव्र एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) तक वायरस के संपूर्ण नैदानिक स्पेक्ट्रम को समझा जा सके।
वाहक और पशु निगरानी
जांच का केंद्रीय उद्देश्य वायरस के संचरण चक्र को समझना है। हालांकि सैंडफ्लाई को चांदीपुरा वायरस का प्रमुख वाहक माना जाता है, वैज्ञानिक यह भी जांच कर रहे हैं कि मच्छर, किलनी और सूक्ष्म कीट जैसे अन्य आर्थ्रोपोड भी इसके संचरण में भूमिका निभा सकते हैं या नहीं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वैज्ञानिक जांच पूरी होने तक किसी विशिष्ट वाहक को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी।
पशु निगरानी के अंतर्गत गायों, भैंसों और बकरियों के रक्त और दूध के नमूने परीक्षण के लिए एकत्र किए गए हैं। अब तक लगभग 70 पशुओं के रक्त के नमूने एकत्र किए गए हैं और उनका विश्लेषण किया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा है कि प्रयोगशाला जांच पूरी होने तक कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
जीनोमिक अनुसंधान और 2024 के सबक
गांधीनगर स्थित गुजरात जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान केंद्र (GBRC) में वर्तमान रोग से प्राप्त वायरस नमूनों का संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण किया जा रहा है। प्रारंभिक विश्लेषण में मामूली आनुवंशिक भिन्नताएं पाई गई हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह निर्धारित करने के लिए विस्तृत तुलनात्मक जीनोमिक अध्ययन आवश्यक हैं कि वर्तमान में फैल रहा वायरस पिछले प्रकोपों से जुड़े उपभेदों से विकसित हुआ है या नहीं।
गौरतलब है कि ICMR-NIV, पुणे के शोधकर्ताओं ने ICMR-राजेंद्र मेमोरियल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ रिसर्च (ICMR-RMNIHР), पटना, BJ मेडिकल कॉलेज, अहमदाबाद और गुजरात सरकार के सहयोग से हाल ही में 'चांदीपुरा वायरस एन्सेफलाइटिस के प्रकोप की जांच, गुजरात, भारत, 2024' शीर्षक से एक शोध पत्र प्रकाशित किया है। वर्तमान जांच में 2024 के प्रकोप से मिले सबक का भी उपयोग किया जा रहा है, जिसमें कोई विशिष्ट वाहक निर्णायक रूप से चिह्नित नहीं हो पाया था।
आगे की राह
वर्तमान जांच को 15 तृतीयक देखभाल अस्पतालों में फैले भारत के अस्पताल-आधारित AES निगरानी नेटवर्क का भी समर्थन प्राप्त है। मानकीकृत नैदानिक प्रोटोकॉल, सीरोलॉजिकल और आणविक निदान तथा चयनात्मक अगली पीढ़ी के अनुक्रमण का उपयोग कर यह नेटवर्क महत्वपूर्ण महामारी विज्ञान और प्रयोगशाला साक्ष्य उत्पन्न कर रहा है। NJORT की तैनाती और समानांतर संस्थागत जांच मिलकर एक समन्वित 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण को दर्शाती है, जो मानव, पशु और वेक्टर निगरानी को एकीकृत कर चांदीपुरा वायरस के प्रकोप को बेहतर ढंग से समझने और नियंत्रित करने का प्रयास है।