गुजरात में चांदीपुरा वायरस: 184 संदिग्ध केस, 22 बच्चों की मौत; स्वास्थ्य मंत्री पानशेरिया ने दिया अलर्ट
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने 3 अगस्त 2026 को गांधीनगर में चांदीपुरा वायरस की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में अब तक दर्ज किए गए 184 संदिग्ध मामलों में से केवल 35 मामले चांदीपुरा वायरस के लिए पॉजिटिव पाए गए हैं, जबकि 11 नमूनों के परिणाम अभी प्रतीक्षित हैं। इस वायरस से अब तक 22 बच्चों की मृत्यु की पुष्टि हुई है।
वर्तमान स्थिति और उपचार
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, इस समय राज्य के विभिन्न सिविल अस्पतालों में 7 पॉजिटिव मरीज़ उपचाराधीन हैं। वहीं, 6 पॉजिटिव मरीज़ों की स्थिति में सुधार के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। गांधीनगर, साबरकांठा-हिम्मतनगर, पाटन, राजकोट और भावनगर के सिविल अस्पतालों में भर्ती बच्चों को सुपर-स्पेशलिस्ट चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। चिकित्सकों की टीम मरीज़ों की स्थिति पर निरंतर निगरानी रख रही है।
वायरस का प्रसार और रोकथाम के उपाय
पानशेरिया ने बताया कि यह वायरस किसी एक विशेष क्षेत्र या गाँव तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग इलाकों से मामले सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें जमीनी स्तर पर सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। विभाग ने कच्चे या मिट्टी के घरों की दरारें तत्काल भरने की सलाह दी है। इसके साथ ही, पशुपालन वाले क्षेत्रों में कीटनाशकों का गहन छिड़काव किया जा रहा है।
सभी सरकारी और निजी बाल चिकित्सा अस्पतालों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वायरस के लक्षण वाले मरीज़ों को तत्काल ऑक्सीजन और वेंटिलेटर युक्त आईसीयू बेड में भर्ती कर उपचार शुरू किया जाए, ताकि 'मल्टीपल ऑर्गन फेलियर' जैसी गंभीर जटिलताओं को रोका जा सके।
वैक्सीन और शोध की स्थिति
मंत्री ने स्वीकार किया कि फिलहाल चांदीपुरा वायरस के विरुद्ध कोई विशेष वैक्सीन या प्रभावी दवा उपलब्ध नहीं है। हालाँकि, चिकित्सकों और शोधकर्ताओं की एक विशेष टीम वैज्ञानिक पद्धति से वैक्सीन और कारगर दवा विकसित करने के लिए गहन अनुसंधान में जुटी है।
नागरिकों के लिए सावधानियाँ
स्वास्थ्य मंत्री पानशेरिया ने नागरिकों से सतर्क रहने और अफवाहों से दूरी बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों में बुखार, उल्टी, ऐंठन या कोई अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए निकटतम सरकारी जिला अस्पताल में संपर्क करें। उन्होंने नागरिकों से स्वास्थ्य विभाग की टीमों के साथ पूर्ण सहयोग करने का भी आग्रह किया। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के मौसम में वेक्टर-जनित बीमारियों का खतरा स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है।