7 जुलाई 2026
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चांडीपुरा वायरस से गोधरा में 2 बच्चों की मौत, गुजरात स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया हाई अलर्ट

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चांडीपुरा वायरस से गोधरा में 2 बच्चों की मौत, गुजरात स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया हाई अलर्ट

सारांश

गोधरा तालुका में चांडीपुरा वायरस से दो बच्चों की मौत के बाद गुजरात सरकार हरकत में आई। भारी बारिश के बीच स्वास्थ्य मंत्री पानशेरिया ने बताया कि PHC से लेकर मेडिकल कॉलेज तक दवाएं पहुंचाई गई हैं और प्रभावित गांवों में घर-घर सर्वे जारी है।

मुख्य बातें

गोधरा तालुका के दो गांवों में चांडीपुरा वायरस से संक्रमित दो बच्चों की मौत हो गई है।
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने 7 जुलाई को स्वास्थ्य विभाग की पूर्ण तैयारी की जानकारी दी।
प्रभावित क्षेत्रों में विशेष चिकित्सा टीमें तैनात; घर-घर सर्वे और कीटनाशक छिड़काव जारी।
सभी PHC, CHC , अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में दवाएं, एंटी-वेनम सुनिश्चित।
2024 में भी गुजरात में चांडीपुरा वायरस के मामले आए थे; उन क्षेत्रों पर भी निगरानी जारी।
कई जिलों में रेड अलर्ट ; मेडिकल टीमें स्टैंडबाय पर तैनात।

गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने 7 जुलाई को गांधीनगर में पत्रकारों को बताया कि गोधरा तालुका के दो अलग-अलग गांवों में चांडीपुरा वायरस से संक्रमित दो बच्चों की मौत हो गई है। राज्य में जारी भारी बारिश और उससे उत्पन्न स्वास्थ्य चुनौतियों के मद्देनज़र स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है।

मुख्य घटनाक्रम

मंत्री पानशेरिया ने बताया कि गोधरा तालुका के प्रभावित गांवों में विशेष चिकित्सा टीमें तत्काल भेजी गई हैं। ये टीमें मृत बच्चों के परिवारों सहित आसपास के सभी घरों का सर्वे कर रही हैं। घर-घर जाकर स्वास्थ्य जांच की जा रही है और संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रभावित क्षेत्रों में कीटनाशकों का छिड़काव भी शुरू कर दिया गया है।

उन्होंने कहा, 'गुजरात के कई जिलों में भारी वर्षा के कारण रेड अलर्ट जारी है और कई स्थानों पर पिछले 12 घंटों से लगातार बारिश हो रही है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की है और सभी जिलों के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।'

स्वास्थ्य विभाग की तैयारी

मंत्री ने बताया कि राज्य के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है। बारिश के मौसम में बढ़ने वाले सांप और बिच्छू के काटने के मामलों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त मात्रा में एंटी-वेनम और अन्य ज़रूरी दवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

पानशेरिया ने कहा, 'जलजनित और संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए व्यापक तैयारी की गई है। दस्त, उल्टी, बुखार और अन्य मौसमी बीमारियों के इलाज की दवाएं सभी स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचा दी गई हैं। मेडिकल टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें तत्काल प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जाएगा।'

चांडीपुरा वायरस पर विशेष निगरानी

गौरतलब है कि वर्ष 2024 में भी गुजरात के कुछ क्षेत्रों में चांडीपुरा वायरस के मामले सामने आए थे। उन क्षेत्रों की भी लगातार निगरानी जारी है ताकि संक्रमण दोबारा न फैले। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यदि कोई नया मामला सामने आता है तो उसकी समय रहते पहचान कर तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।

चांडीपुरा वायरस एक दुर्लभ लेकिन गंभीर वायरल बीमारी है जो मुख्यतः बच्चों को प्रभावित करती है और मानसून के मौसम में इसके मामले बढ़ने की आशंका रहती है।

आम जनता पर असर

राज्य में जारी रेड अलर्ट और चांडीपुरा वायरस की दोहरी चुनौती के बीच ग्रामीण इलाकों में रहने वाले परिवार, विशेषकर छोटे बच्चों के माता-पिता, सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी बुखार या असामान्य लक्षण पर तत्काल नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।

क्या होगा आगे

स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में सर्वे और कीटनाशक छिड़काव जारी रखेंगी। विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान वेक्टर-जनित बीमारियों पर निगरानी बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। प्रफुल्ल पानशेरिया ने आश्वासन दिया कि स्वास्थ्य विभाग हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी मानसून-पूर्व निगरानी तंत्र पर्याप्त नहीं दिखा। स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया मौतों के बाद आई, न कि पहले — यही वह प्रश्न है जो जवाबदेही की माँग करता है। दवाओं की उपलब्धता और टीमों की तैनाती ज़रूरी है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में शुरुआती चेतावनी प्रणाली और वेक्टर नियंत्रण की कमज़ोरी उजागर होती है। बिना दीर्घकालिक निगरानी ढाँचे के, यह हर मानसून में दोहराई जाने वाली त्रासदी बन सकती है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चांडीपुरा वायरस क्या है और यह कितना खतरनाक है?
चांडीपुरा वायरस एक दुर्लभ लेकिन गंभीर वायरल बीमारी है जो मुख्यतः बच्चों को प्रभावित करती है और तेज़ बुखार व मस्तिष्क संबंधी लक्षण पैदा कर सकती है। मानसून के मौसम में इसके मामले बढ़ने की आशंका रहती है और यह वायरस सैंडफ्लाई (बालू मक्खी) के काटने से फैलता है।
गोधरा में चांडीपुरा वायरस से कितने बच्चों की मौत हुई?
गोधरा तालुका के दो अलग-अलग गांवों में दो बच्चों की चांडीपुरा वायरस से संक्रमित पाए जाने के बाद मौत हो गई है। स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने 7 जुलाई को यह जानकारी दी।
गुजरात स्वास्थ्य विभाग ने चांडीपुरा वायरस से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में विशेष चिकित्सा टीमें भेजी हैं जो घर-घर सर्वे कर रही हैं और कीटनाशकों का छिड़काव कराया जा रहा है। सभी PHC, CHC और अस्पतालों में आवश्यक दवाएं पहुंचाई गई हैं और मेडिकल टीमें स्टैंडबाय पर हैं।
क्या गुजरात में पहले भी चांडीपुरा वायरस के मामले आए हैं?
हाँ, वर्ष 2024 में भी गुजरात के कुछ क्षेत्रों में चांडीपुरा वायरस के मामले सामने आए थे। उन क्षेत्रों की भी लगातार निगरानी जारी है ताकि संक्रमण दोबारा न फैले।
भारी बारिश के दौरान गुजरात में किन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है?
मानसून के दौरान जलजनित बीमारियाँ जैसे दस्त, उल्टी, बुखार के साथ-साथ सांप और बिच्छू के काटने के मामले बढ़ जाते हैं। चांडीपुरा जैसे वेक्टर-जनित वायरस का खतरा भी इस मौसम में बढ़ जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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