आंध्र प्रदेश में हस्तशिल्प पर्यटन को मिलेगा नया आयाम, पवन कल्याण ने विजयवाड़ा में किया 'हस्तशिल्प महोत्सव 2026' का उद्घाटन
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने 7 जुलाई 2026 को विजयवाड़ा में घोषणा की कि राज्य में इको-टूरिज्म और मंदिर पर्यटन की तर्ज पर हस्तशिल्प पर्यटन को एक नई पहचान दिलाई जाएगी। आंध्र प्रदेश हस्तशिल्प विकास निगम (लेपाक्षी) द्वारा आयोजित 'आंध्र प्रदेश हस्तशिल्प महोत्सव 2026' का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कारीगरों के संरक्षण और उनकी कला को वैश्विक मंच पर ले जाने का संकल्प दोहराया।
मुख्य घोषणाएँ और निर्देश
पवन कल्याण ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कारीगरों के संघर्ष और उनकी अनूठी कला को दुनिया के सामने लाने के लिए विशेष डॉक्यूमेंट्री तैयार की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कलात्मक वस्तुएँ बनाने वाले कारीगरों को उचित पहचान दिलाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। साथ ही, 'विकसित भारत-जी राम जी' योजना के अंतर्गत विभिन्न क्लस्टरों में साझा सुविधा केंद्र (कॉमन फैसिलिटी सेंटर) स्थापित करने का आश्वासन भी दिया गया।
उपमुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि हस्तशिल्प कारीगरों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए क्लस्टर स्तर पर नियमित चिकित्सा शिविर आयोजित किए जाएँ। यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि सरकार केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि कारीगरों की समग्र भलाई सुनिश्चित करना चाहती है।
महोत्सव में कारीगरों से सीधा संवाद
पवन कल्याण ने महोत्सव में प्रदर्शित प्रत्येक स्टॉल का व्यक्तिगत रूप से दौरा किया और हस्तशिल्प उत्पाद खरीदकर कारीगरों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने सबसे पहले काकीनाडा के चमड़े की कठपुतली कला (लेदर पपेट्री) से जुड़े कारीगरों के स्टॉल पर रुककर रामायण, महाभारत और भागवत पर आधारित कलाकृतियाँ देखीं। इस दौरान कलाकारों द्वारा प्रस्तुत रावण वध का जीवंत प्रदर्शन सभी उपस्थित लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा।
कारीगरों ने बताया कि उनकी पीढ़ियाँ लंबे समय से इसी कला के माध्यम से जीविका चलाती आई हैं और अब वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस पर उपमुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि आगामी गोदावरी पुष्करालु के दौरान इस कला के विशेष प्रदर्शन आयोजित किए जाएँगे।
उप्पाडा साड़ियाँ और पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद
पवन कल्याण ने उप्पाडा साड़ियों के स्टॉल पर विशेष रुचि दिखाई और अपनी पत्नी अन्ना कोनिडेला के लिए तीन उप्पाडा जामदानी साड़ियाँ तथा अपने लिए कुछ परिधान खरीदे। इसके अलावा उन्होंने केले के रेशे (बनाना फाइबर) से निर्मित हैंडबैग, फाइल और अन्य पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों में गहरी रुचि दिखाई और इन उत्पादों के निर्माण की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने एक हैंडबैग भी खरीदा।
सरकार की प्रतिबद्धता
पवन कल्याण ने स्पष्ट किया कि राज्य की गठबंधन सरकार हस्तशिल्प क्षेत्र के समग्र विकास के लिए हर आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी। गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश में हस्तशिल्प परंपरा सदियों पुरानी है और राज्य के कई जिलों की पहचान उनकी विशिष्ट शिल्पकला से जुड़ी है। यह महोत्सव उन कारीगरों को एक साझा मंच देने का प्रयास है जो अब तक बाज़ार और पहचान दोनों के मामले में हाशिये पर रहे हैं। आने वाले समय में हस्तशिल्प पर्यटन को नीतिगत समर्थन मिलने से इस क्षेत्र में रोज़गार और राजस्व दोनों में वृद्धि की संभावना है।