महाराष्ट्र में अवैध साहूकारों पर सख्ती: सजा 5 से बढ़कर 7 साल, जुर्माना दोगुना
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने 7 जुलाई 2026 को विधानसभा में एक महत्वपूर्ण विधेयक प्रस्तुत किया, जिसमें अवैध साहूकारी पर कारावास की सजा 5 साल से बढ़ाकर 7 साल और जुर्माना ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1,00,000 करने का प्रस्ताव है। राज्य के किसानों और कमज़ोर कर्जदारों को शोषण से बचाने के उद्देश्य से यह विधेयक महाराष्ट्र साहूकारी (विनियमन) अधिनियम, 2014 में संशोधन करता है।
विधेयक में क्या है
राज्य सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल द्वारा विधानसभा में पेश इस विधेयक में धारा 39 में संशोधन का प्रस्ताव है। वैध लाइसेंस के बिना साहूकारी व्यवसाय चलाने, फर्जी नाम से लाइसेंस प्राप्त करने, या अनधिकृत स्थान से कारोबार संचालित करने वालों के लिए सजा के प्रावधान कड़े किए जा रहे हैं। ऋण वसूली के नाम पर देनदारों को परेशान करने पर भी संशोधित दंड लागू होगा।
विधेयक क्यों लाया गया
विधानसभा में हुई चर्चा के दौरान यह तथ्य उभरकर सामने आया कि अत्यधिक ब्याज दरें और ऋण वसूली के लिए लगातार उत्पीड़न महाराष्ट्र में कई किसानों को आत्महत्या जैसे कदम उठाने पर मजबूर कर रहा है। आरोप लगाए गए कि मौजूदा कानून में पर्याप्त निवारक शक्ति नहीं होने के कारण ऐसी घटनाओं में वृद्धि हुई है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह विधानसभा में विपक्ष और सत्ताधारी दल दोनों के सदस्यों ने अनधिकृत निजी साहूकारी पर कड़ी कार्रवाई की माँग की थी।
मौजूदा कानून की सीमाएँ
महाराष्ट्र साहूकारी (विनियमन) अधिनियम, 2014 के तहत तीन विशिष्ट धाराओं में पहले से दंड के प्रावधान हैं, लेकिन राज्य भर में अवैध साहूकारी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। यह इस बात का प्रमाण माना जा रहा है कि वर्तमान दंड व्यवस्था अपराधियों को रोकने में पर्याप्त नहीं रही। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में किसान संकट एक गंभीर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बना हुआ है।
राजनीतिक सहमति
उल्लेखनीय है कि इस विधेयक को सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का समर्थन मिलता दिखा। विधानसभा में हुई बहस में सभी दलों के सदस्यों ने अवैध साहूकारों पर शिकंजा कसने की आवश्यकता पर एकमत राय व्यक्त की, जो इस मुद्दे की गंभीरता को रेखांकित करती है।
आगे क्या होगा
विधेयक को विधानसभा में पारित होने के बाद विधान परिषद की मंजूरी और राज्यपाल की स्वीकृति की आवश्यकता होगी। संशोधित कानून लागू होने पर राज्य के लाखों किसानों और कमज़ोर कर्जदारों को अवैध साहूकारों के उत्पीड़न से कानूनी सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।