महाराष्ट्र विधानसभा: किसान आत्महत्या बहस खारिज होने पर विपक्ष का वॉकआउट, बिश्नोई गिरोह की धमकियों पर भी हंगामा
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र विधानसभा में 2 जुलाई 2026 को उस समय तीखा टकराव हुआ जब विधानसभा अध्यक्ष राजेश नरवेकर ने राज्य में किसानों की आत्महत्याओं के बढ़ते संकट पर चर्चा के लिए लाए गए स्थगन प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके विरोध में विपक्षी सदस्य सदन से बाहर चले गए। मानसून सत्र के दौरान लातूर में दो किसानों की आत्महत्या की खबर ने इस विवाद को और तीखा बना दिया।
स्थगन प्रस्ताव और विपक्ष की माँग
कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने सदन में स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए कृषि संकट पर तत्काल और व्यापक बहस की माँग की। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र के दौरान ही लातूर में दो किसानों ने आत्महत्या की, जो इस संकट की भयावहता को दर्शाता है। वडेट्टीवार ने महाराष्ट्र सरकार से इस मामले पर तत्काल अपना रुख स्पष्ट करने और राहत उपाय लागू करने की माँग की।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार बढ़ते वित्तीय संकट, कृषि संकट और किसानों की आत्महत्याओं जैसे गंभीर मुद्दों को जानबूझकर नज़रअंदाज़ कर रही है। आलोचकों का कहना है कि सदन में इन विषयों पर विस्तृत बहस न होने देना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन है।
बिश्नोई गिरोह की धमकियों पर हंगामा
सत्र में उस समय और तनाव बढ़ गया जब वडेट्टीवार ने कांग्रेस विधायक साजिद पठान को बिश्नोई गिरोह से मिल रही जबरन वसूली और जान से मारने की धमकियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने माँग की कि इन धमकियों की गहन जाँच हो और पठान की सुरक्षा व्यवस्था तत्काल बढ़ाई जाए।
सुरक्षा आवंटन की प्राथमिकताओं पर कटाक्ष करते हुए वडेट्टीवार ने कहा कि फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी को 25 सुरक्षा गार्ड दिए गए हैं, जबकि सक्रिय गिरोह-धमकियों का सामना कर रहे निर्वाचित विधायकों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल रही।
अध्यक्ष का आश्वासन, विपक्ष असंतुष्ट
सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर अध्यक्ष नरवेकर ने स्पष्ट किया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की सुरक्षा राज्य सरकार की परम ज़िम्मेदारी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि खतरे के आकलन के आधार पर आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। हालाँकि, यह आश्वासन विपक्ष को संतुष्ट करने में विफल रहा।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्याएँ वर्षों से एक गंभीर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में मानसून सत्र के दौरान ही कृषि संकट की नई घटनाएँ सामने आ रही हैं।
वॉकआउट और आगे की राह
महाराष्ट्र के संघर्षरत किसानों की दुर्दशा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए विपक्षी सदस्यों ने अध्यक्ष के कृषि संकट पर व्यवस्थित बहस से इनकार के विरोध में सदन से वॉकआउट किया। यह घटना राज्य में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गहरे होते राजनीतिक मतभेदों को उजागर करती है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह गर्म बना रहने की संभावना है।