महाराष्ट्र मानसून सत्र 22 जून से 10 जुलाई: किसान कर्जमाफी पर विपक्ष का तीखा हमला तय
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र विधानसभा और विधान परिषद की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी ने सोमवार, 15 जून को घोषणा की कि राज्य का मानसून सत्र 22 जून से शुरू होकर 10 जुलाई तक चलेगा। 19 कार्य दिवसों के इस सत्र में किसान कर्जमाफी की शर्तों को लेकर विपक्ष सरकार पर जोरदार हमले की तैयारी में है।
मुख्य घटनाक्रम
सत्र की घोषणा के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ₹2 लाख की कृषि कर्जमाफी योजना की शर्तों को विधानसभा और विधान परिषद — दोनों सदनों में उठाएगा। सरकार ने इस योजना को किसानों के लिए बड़ी राहत बताया है, जिससे कथित तौर पर लगभग 40 लाख किसानों को लाभ मिलेगा।
कर्जमाफी योजना पर विवाद
विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार की ₹2 लाख की कृषि कर्जमाफी योजना में कई कठोर शर्तें हैं, जो बड़ी संख्या में किसानों को इसके दायरे से बाहर कर देती हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) (शरद पवार गुट) के नेता जयंत पाटिल सहित अन्य विपक्षी नेताओं का कहना है कि जिन किसानों पर ₹2 लाख से अधिक का कर्ज है, उन्हें पहले अपनी जेब से अतिरिक्त राशि चुकानी होगी — तभी वे माफी का लाभ उठा पाएंगे।
आलोचकों का यह भी कहना है कि जिन किसानों ने पिछली कर्जमाफी योजना का लाभ लिया था, उन्हें इस बार के दायरे से बाहर रखा जा सकता है, जिससे लाखों किसान प्रभावित होंगे।
रोहित पवार का अनशन और सरकार से बातचीत
NCP (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने इन्हीं शर्तों के विरोध में तीन दिन का अनशन किया था। उन्होंने योजना की शर्तों को 'कठोर और भ्रामक' बताते हुए इन्हें हटाने की माँग की थी। सरकार की ओर से बातचीत का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अनशन समाप्त किया, हालाँकि शर्तों में किसी बदलाव की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
सत्र की अवधि पर कांग्रेस की आपत्ति
कांग्रेस नेता और विधायक नाना पटोले ने सत्र की अवधि को लेकर सरकार की आलोचना की। उनका कहना है कि राज्य में जनता के बीच कई गंभीर मुद्दों को लेकर गहरी नाराजगी है, इसलिए सत्र कम से कम एक महीने का होना चाहिए था। लेकिन यह सत्र मात्र 14 कार्य दिवसों तक सीमित रहेगा। पटोले ने आरोप लगाया कि सरकार का असली उद्देश्य केवल अनुपूरक वित्तीय माँगों को पारित करना है, न कि जनता की समस्याओं पर सार्थक चर्चा करना।
सरकार का पक्ष
सरकार के कई मंत्रियों ने कर्जमाफी योजना का बचाव करते हुए कहा है कि बिना किसी अतिरिक्त शर्त के लगभग 40 लाख किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में किसान आंदोलन और ग्रामीण असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में कृषि कर्जमाफी का मुद्दा पिछले कई विधानसभा सत्रों में केंद्रीय विवाद का विषय रहा है।
22 जून से शुरू होने वाले इस सत्र में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखी नोकझोंक तय मानी जा रही है, और यह देखना होगा कि सरकार किसानों की माँगों पर कोई ठोस आश्वासन देती है या नहीं।