31 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महाराष्ट्र मानसून सत्र 22 जून से 10 जुलाई: किसान कर्जमाफी पर विपक्ष का तीखा हमला तय

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महाराष्ट्र मानसून सत्र 22 जून से 10 जुलाई: किसान कर्जमाफी पर विपक्ष का तीखा हमला तय

सारांश

महाराष्ट्र विधानसभा का मानसून सत्र 22 जून से 10 जुलाई तक चलेगा — और यह सत्र सिर्फ कार्यवाही नहीं, एक राजनीतिक टकराव का मंच बनने वाला है। ₹2 लाख की कर्जमाफी की 'कठोर शर्तों' पर विपक्ष पहले से तैयार है, रोहित पवार का अनशन इसी आग की पहली चिंगारी थी।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र का मानसून सत्र 22 जून से 10 जुलाई 2026 तक, कुल 14 कार्य दिवस ।
सरकार की ₹2 लाख कृषि कर्जमाफी योजना पर विपक्ष ने 'कठोर और भ्रामक शर्तों' का आरोप लगाया।
NCP (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने शर्तों के विरोध में तीन दिन का अनशन किया, सरकारी आश्वासन पर समाप्त किया।
सरकार का दावा — लगभग 40 लाख किसानों को बिना अतिरिक्त शर्त के लाभ मिलेगा।
कांग्रेस विधायक नाना पटोले ने सत्र को एक महीने का करने की माँग की, आरोप — सरकार केवल अनुपूरक वित्तीय माँगें पारित करना चाहती है।

महाराष्ट्र विधानसभा और विधान परिषद की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी ने सोमवार, 15 जून को घोषणा की कि राज्य का मानसून सत्र 22 जून से शुरू होकर 10 जुलाई तक चलेगा। 19 कार्य दिवसों के इस सत्र में किसान कर्जमाफी की शर्तों को लेकर विपक्ष सरकार पर जोरदार हमले की तैयारी में है।

मुख्य घटनाक्रम

सत्र की घोषणा के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ₹2 लाख की कृषि कर्जमाफी योजना की शर्तों को विधानसभा और विधान परिषद — दोनों सदनों में उठाएगा। सरकार ने इस योजना को किसानों के लिए बड़ी राहत बताया है, जिससे कथित तौर पर लगभग 40 लाख किसानों को लाभ मिलेगा।

कर्जमाफी योजना पर विवाद

विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार की ₹2 लाख की कृषि कर्जमाफी योजना में कई कठोर शर्तें हैं, जो बड़ी संख्या में किसानों को इसके दायरे से बाहर कर देती हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) (शरद पवार गुट) के नेता जयंत पाटिल सहित अन्य विपक्षी नेताओं का कहना है कि जिन किसानों पर ₹2 लाख से अधिक का कर्ज है, उन्हें पहले अपनी जेब से अतिरिक्त राशि चुकानी होगी — तभी वे माफी का लाभ उठा पाएंगे।

आलोचकों का यह भी कहना है कि जिन किसानों ने पिछली कर्जमाफी योजना का लाभ लिया था, उन्हें इस बार के दायरे से बाहर रखा जा सकता है, जिससे लाखों किसान प्रभावित होंगे।

रोहित पवार का अनशन और सरकार से बातचीत

NCP (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने इन्हीं शर्तों के विरोध में तीन दिन का अनशन किया था। उन्होंने योजना की शर्तों को 'कठोर और भ्रामक' बताते हुए इन्हें हटाने की माँग की थी। सरकार की ओर से बातचीत का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अनशन समाप्त किया, हालाँकि शर्तों में किसी बदलाव की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

सत्र की अवधि पर कांग्रेस की आपत्ति

कांग्रेस नेता और विधायक नाना पटोले ने सत्र की अवधि को लेकर सरकार की आलोचना की। उनका कहना है कि राज्य में जनता के बीच कई गंभीर मुद्दों को लेकर गहरी नाराजगी है, इसलिए सत्र कम से कम एक महीने का होना चाहिए था। लेकिन यह सत्र मात्र 14 कार्य दिवसों तक सीमित रहेगा। पटोले ने आरोप लगाया कि सरकार का असली उद्देश्य केवल अनुपूरक वित्तीय माँगों को पारित करना है, न कि जनता की समस्याओं पर सार्थक चर्चा करना।

सरकार का पक्ष

सरकार के कई मंत्रियों ने कर्जमाफी योजना का बचाव करते हुए कहा है कि बिना किसी अतिरिक्त शर्त के लगभग 40 लाख किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में किसान आंदोलन और ग्रामीण असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में कृषि कर्जमाफी का मुद्दा पिछले कई विधानसभा सत्रों में केंद्रीय विवाद का विषय रहा है।

22 जून से शुरू होने वाले इस सत्र में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखी नोकझोंक तय मानी जा रही है, और यह देखना होगा कि सरकार किसानों की माँगों पर कोई ठोस आश्वासन देती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार शर्तों का विवाद पहले से ही अनशन तक पहुँच चुका है — यह संकेत है कि ज़मीनी असंतोष गहरा है। सरकार का '40 लाख किसान' वाला आँकड़ा तब तक अधूरा है जब तक यह स्पष्ट न हो कि ₹2 लाख से अधिक कर्जदार किसानों की वास्तविक संख्या क्या है और वे योजना से बाहर क्यों हैं। 14 कार्य दिवसों का छोटा सत्र और अनुपूरक माँगों की प्राथमिकता यह सवाल खड़ा करती है कि क्या सरकार वाकई किसान संकट पर बहस चाहती है, या केवल बजटीय औपचारिकताएँ पूरी करना चाहती है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र मानसून सत्र 2026 कब से कब तक चलेगा?
महाराष्ट्र विधानसभा का मानसून सत्र 22 जून 2026 से शुरू होकर 10 जुलाई 2026 तक चलेगा। यह कुल 14 कार्य दिवसों का सत्र है।
महाराष्ट्र की ₹2 लाख कृषि कर्जमाफी योजना में क्या विवाद है?
विपक्ष का आरोप है कि जिन किसानों पर ₹2 लाख से अधिक कर्ज है, उन्हें पहले अतिरिक्त राशि खुद चुकानी होगी, तभी माफी का लाभ मिलेगा। इसके अलावा, पिछली कर्जमाफी योजना के लाभार्थियों को इस बार बाहर रखे जाने की आशंका भी है।
रोहित पवार ने अनशन क्यों किया और क्या नतीजा निकला?
NCP (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने कर्जमाफी योजना की 'कठोर और भ्रामक शर्तों' को हटाने की माँग को लेकर तीन दिन का अनशन किया। सरकार से बातचीत का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अनशन समाप्त किया, हालाँकि शर्तों में बदलाव की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कांग्रेस ने सत्र की अवधि पर आपत्ति क्यों जताई?
कांग्रेस विधायक नाना पटोले का कहना है कि राज्य में कई गंभीर जनसमस्याएँ हैं, इसलिए सत्र कम से कम एक महीने का होना चाहिए था। उनके अनुसार 14 कार्य दिवसों का सत्र केवल अनुपूरक वित्तीय माँगें पारित करने के लिए रखा गया है।
सरकार के अनुसार कर्जमाफी योजना से कितने किसानों को लाभ मिलेगा?
सरकार के मंत्रियों का दावा है कि लगभग 40 लाख किसानों को बिना किसी अतिरिक्त शर्त के ₹2 लाख की कर्जमाफी का सीधा लाभ मिलेगा। विपक्ष इस आँकड़े को चुनौती दे रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 9 महीने पहले