₹31,000 करोड़ किसान राहत पैकेज पर शिवसेना का बचाव, रोहित पवार और नाना पटोले के आरोपों को बताया निराधार
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार द्वारा घोषित ₹31,000 करोड़ के किसान राहत पैकेज और ₹2 लाख तक की कर्जमाफी को लेकर राज्य की राजनीति में तीखी बहस छिड़ गई है। शिवसेना के प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने 7 जून को सरकार के इस फैसले का पुरज़ोर बचाव करते हुए इसे किसानों के हित में उठाया गया ऐतिहासिक कदम करार दिया और विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया।
पैकेज में क्या है
हेगड़े के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार के इस राहत पैकेज से राज्य के लगभग 60 लाख किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अंतर्गत ₹2 लाख तक के कृषि ऋण की माफी का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि यह कदम किसानों को आर्थिक संकट से उबारने और कृषि क्षेत्र को मज़बूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
हेगड़े ने दावा किया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने कभी इतने बड़े पैमाने पर किसान राहत उपलब्ध नहीं कराई। उनके अनुसार, वर्तमान सरकार किसानों की समस्याओं को गंभीरता से समझते हुए लगातार उनके हित में निर्णय ले रही है। उन्होंने इस पैकेज को केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि किसानों के आत्मविश्वास को बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा देने का प्रयास भी बताया।
रोहित पवार की आलोचना पर प्रतिक्रिया
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता रोहित पवार ने सरकार की आलोचना करते हुए विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। इस पर हेगड़े ने कहा कि पवार को सरकार की आलोचना करने के बजाय किसानों के लिए उठाए गए इस बड़े कदम की प्रशंसा करनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष के विरोध को राजनीति से प्रेरित बताया।
विधान परिषद चुनाव विवाद
शिवसेना प्रवक्ता ने राज्य की राजनीति में उठ रहे चुनावी हेरफेर के आरोपों को भी सिरे से खारिज किया। कांग्रेस नेता नाना पटोले ने विधान परिषद चुनावों में छह स्थानों पर शिवसेना और महायुति समर्थित उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाया था।
हेगड़े ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि महाविकास अघाड़ी के अंतर्गत आने वाले कांग्रेस और अन्य दलों के उम्मीदवारों ने स्वयं अपने नामांकन वापस लिए थे। उनके अनुसार, यह विपक्ष की आंतरिक कमज़ोरी का परिणाम है, न कि किसी बाहरी दबाव या गड़बड़ी का।
विपक्ष पर आत्मचिंतन की नसीहत
हेगड़े ने नाना पटोले पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि यदि वे अपनी पार्टी और सहयोगी दलों के उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में बनाए नहीं रख सकते, तो उन्हें दूसरे दलों पर आरोप लगाने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने विपक्ष को दूसरों पर दोषारोपण करने के बजाय आत्मचिंतन करने की नसीहत दी।
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में कृषि संकट और किसान आत्महत्याओं का मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस के केंद्र में बना हुआ है। राहत पैकेज की वास्तविक पहुँच और क्रियान्वयन पर आने वाले हफ्तों में और स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।