किसान ऋण माफी चुनावी नहीं, कल्याणकारी फैसला: मुख्यमंत्री फडणवीस का विपक्ष पर पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 15 जुलाई 2026 को मुंबई में स्पष्ट किया कि 'पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर किसान फसल ऋण माफी योजना' का निर्णय किसी चुनावी गणित से नहीं, बल्कि किसानों के वास्तविक कल्याण की भावना से लिया गया है। वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) किसान मोर्चा द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में विपक्ष के आरोपों का सीधा जवाब दे रहे थे।
विपक्ष पर तीखा पलटवार
मुख्यमंत्री फडणवीस ने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि यदि सरकार की नीयत केवल राजनीतिक होती, तो यह ऋण माफी जनवरी 2029 तक आसानी से टाली जा सकती थी, क्योंकि अगले बड़े चुनाव अभी दूर हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को उम्मीद थी कि सरकार वादे पूरे करने में विफल रहेगी, ताकि उन्हें विरोध प्रदर्शन और 'प्रचार के अड्डे' चलाने का अवसर मिले। उन्होंने जोड़ा, "वे भूल गए कि यह महायुति सरकार है — 'देवभाऊ' की सरकार, जो किसानों के प्रति पूरी तरह समर्पित है।"
योजना का ढाँचा और पात्रता
फडणवीस ने बताया कि राज्य सरकार ने ₹2 लाख तक के फसल ऋण की माफी को मंजूरी दी है। इसके अतिरिक्त, नियमित रूप से ऋण चुकाने वाले किसानों को ₹50,000 का प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। प्रारंभ में एक शर्त रखी गई थी कि 2019 की ऋण माफी के लाभार्थी इस बार की योजना के लिए पात्र नहीं होंगे।
12 लाख बाहर किए गए किसानों के लिए विशेष प्रावधान
मुख्यमंत्री ने बताया कि जब उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि यदि सरकार ₹50,000 तक की सहायता दे और किसान शेष राशि स्वयं चुकाएँ तो क्या होगा, तो पता चला कि बाहर किए गए 12 लाख किसानों में से लगभग 6 लाख किसान मात्र ₹10,000 से ₹12,000 अपनी जेब से चुकाकर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। फडणवीस ने कहा कि समिति की आधिकारिक रिपोर्ट से आगे जाकर सरकार ने यह निर्णय लिया कि इन किसानों को भी ₹50,000 तक की सहायता दी जाएगी।
चुनावी वादे और महायुति की जीत
फडणवीस ने याद दिलाया कि किसान ऋण माफी उनके पिछले चुनाव घोषणापत्र का एक प्रमुख वादा था। उन्होंने कहा कि इस वादे को निभाने के परिणामस्वरूप BJP और महायुति गठबंधन ने जिला परिषदों, नगर निगमों और नगर परिषदों में व्यापक जीत दर्ज की। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार सरकार पर किसान-विरोधी होने का आरोप लगाता रहा है।
आगे की राह
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में किसान ऋण माफी का मुद्दा वर्षों से राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है। इस योजना के क्रियान्वयन की निगरानी अब सरकारी तंत्र पर निर्भर करेगी, और विपक्ष ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह हर कदम पर जवाबदेही माँगेगा। फडणवीस सरकार के लिए असली परीक्षा यह होगी कि लाभार्थी किसानों तक राशि समय पर और पारदर्शी तरीके से पहुँचे।