7 जुलाई 2026
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महाराष्ट्र विधानसभा में किसानों की अनिवार्य सहकारी सदस्यता विधेयक पेश, 10 गुंठा भूमि मालिकों को मिलेगा ऋण अधिकार

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महाराष्ट्र विधानसभा में किसानों की अनिवार्य सहकारी सदस्यता विधेयक पेश, 10 गुंठा भूमि मालिकों को मिलेगा ऋण अधिकार

सारांश

महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने सहकारी समिति कानून में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है — 10 गुंठा या अधिक भूमि वाले किसानों को अनिवार्य सदस्यता और फसल ऋण का कानूनी अधिकार देकर दशकों पुरानी राजनीतिक भेदभाव की प्रथा खत्म करने की कोशिश है।

मुख्य बातें

महायुति सरकार ने 7 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र सहकारी समिति अधिनियम, 1960 में संशोधन विधेयक विधानसभा में पेश किया।
विधेयक सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल द्वारा पेश किया गया।
कम से कम 10 गुंठा भूमि के स्वामी किसान को सहकारी समिति की सदस्यता और फसल ऋण देना अनिवार्य होगा।
अधिनियम की धारा 23 और धारा 44 में संशोधन प्रस्तावित; गैर-कृषि समितियाँ केवल पंजीकृत सदस्यों को ही ऋण दे सकेंगी।
स्थानीय राजनीतिक गुटों द्वारा पात्र किसानों को जानबूझकर सदस्यता देने से इनकार करने की प्रथा पर अंकुश लगाना मुख्य उद्देश्य है।
विधेयक को अभी विधानसभा की मंजूरी मिलना बाकी है।

महाराष्ट्र सरकार ने 7 जुलाई 2026 को राज्य विधानसभा में महाराष्ट्र सहकारी समिति अधिनियम, 1960 में संशोधन का विधेयक पेश किया, जिसके तहत कम से कम 10 गुंठा भूमि के स्वामी किसी भी किसान को स्थानीय सहकारी समिति की सदस्यता और फसल ऋण देना अनिवार्य होगा। महायुति सरकार का यह कदम सहकारी ऋण ढाँचे को मजबूत करने और दशकों से चली आ रही राजनीतिक भेदभाव की प्रथा पर लगाम लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

विधेयक में क्या है

सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल द्वारा पेश किए गए इस विधेयक में अधिनियम की धारा 23 और धारा 44 में संशोधन प्रस्तावित हैं। धारा 23 के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि कोई भी सहकारी समिति अपने उपनियमों की शर्तें पूरी करने वाले पात्र किसान को सदस्यता देने से इनकार नहीं कर सकती। धारा 44 में प्रस्तावित बदलाव के अनुसार, गैर-कृषि सहकारी ऋण समितियाँ अब केवल अपने पंजीकृत सदस्यों को ही ऋण दे सकेंगी — बाहरी व्यक्तियों को ऋण देना कानूनन प्रतिबंधित होगा।

समस्या की जड़: राजनीतिक नियंत्रण और भेदभाव

ग्राम स्तर पर प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS) कृषि ऋण वितरण की रीढ़ हैं और उर्वरक, बीज तथा कीटनाशक जैसे आवश्यक कृषि इनपुट भी उपलब्ध कराती हैं। हालाँकि, स्थानीय राजनीतिक गुट अक्सर इन सहकारी निकायों पर अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए जानबूझकर पात्र किसानों को सदस्यता देने से मना कर देते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में किसानों का एक बड़ा वर्ग वित्तपोषण के लिए इन्हीं नेटवर्कों पर निर्भर है।

वर्तमान व्यवस्था में यदि कोई समिति आवेदन अस्वीकार करती है, तो पीड़ित किसान को रजिस्ट्रार के पास अपील करनी पड़ती है — एक प्रक्रिया जो अक्सर नौकरशाही विलंब और उत्पीड़न का कारण बनती है।

प्रस्तावित संशोधन का असर

प्रस्तावित अनिवार्य सदस्यता प्रावधान इस शिकायत-निवारण प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए पात्र किसानों को सीधे अधिकार देता है। 10 गुंठा या उससे अधिक भूमि के मालिक किसान को अब सदस्यता और फसल ऋण के लिए किसी की कृपा पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। गैर-कृषि समितियों पर लगाया गया ऋण-प्रतिबंध यह सुनिश्चित करेगा कि सहकारी संस्थाओं की वित्तीय ताकत केवल उनके वास्तविक सदस्यों के हित में लगे।

आगे क्या होगा

विधेयक अभी विधानसभा में पेश किया गया है और इसे पारित होने के लिए सदन की मंजूरी आवश्यक होगी। यदि यह विधेयक पास होता है, तो महाराष्ट्र के लाखों छोटे और सीमांत किसानों को संस्थागत ऋण तक पहुँच में सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। सहकारी क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि धारा 44 में बदलाव से समितियों की वित्तीय अनुशासन भी बेहतर होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी — क्योंकि धारा 23 पहले से अस्तित्व में थी और उसके बावजूद भेदभाव जारी रहा। सवाल यह है कि नया संशोधन उल्लंघन पर क्या दंड तंत्र स्थापित करता है, और क्या रजिस्ट्रार की अपील-प्रक्रिया को वास्तव में बदला जाएगा या केवल कानूनी भाषा बदली जाएगी। महाराष्ट्र में PACS पर राजनीतिक नियंत्रण एक संरचनागत समस्या है जो किसी एक संशोधन से नहीं सुलझती — इसके लिए स्वतंत्र निगरानी तंत्र और समयबद्ध सदस्यता प्रक्रिया अनिवार्य है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र सहकारी समिति संशोधन विधेयक 2026 क्या है?
यह महाराष्ट्र सहकारी समिति अधिनियम, 1960 में प्रस्तावित संशोधन है, जिसे 7 जुलाई 2026 को विधानसभा में पेश किया गया। इसके तहत कम से कम 10 गुंठा भूमि वाले किसानों को सहकारी समिति की सदस्यता और फसल ऋण देना अनिवार्य किया जाएगा।
10 गुंठा भूमि की शर्त का किसानों पर क्या असर होगा?
जिन किसानों के पास कम से कम 10 गुंठा ज़मीन है, उन्हें अब स्थानीय सहकारी समिति की सदस्यता और फसल ऋण से वंचित नहीं किया जा सकेगा। यह उन छोटे किसानों के लिए बड़ी राहत होगी जिन्हें राजनीतिक कारणों से अब तक सदस्यता नहीं मिल पाती थी।
धारा 44 में प्रस्तावित बदलाव क्या है?
धारा 44 के संशोधन के तहत गैर-कृषि सहकारी ऋण समितियाँ केवल अपने पंजीकृत सदस्यों को ही ऋण दे सकेंगी। बाहरी व्यक्तियों — जिनकी कोई सदस्यता हिस्सेदारी नहीं है — को ऋण देना कानूनन प्रतिबंधित हो जाएगा।
अभी तक पात्र किसानों को सदस्यता क्यों नहीं मिल पाती थी?
स्थानीय राजनीतिक गुट सहकारी निकायों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए जानबूझकर पात्र किसानों की सदस्यता रोक देते थे। मौजूदा कानून में अस्वीकृति पर केवल रजिस्ट्रार के पास अपील का विकल्प था, जो अक्सर लंबी और थकाऊ प्रक्रिया साबित होती थी।
यह विधेयक कब लागू होगा?
विधेयक अभी महाराष्ट्र विधानसभा में पेश किया गया है और इसे पारित होने के लिए सदन की मंजूरी आवश्यक है। मंजूरी मिलने के बाद ही यह कानून का रूप लेगा और लागू होगा।
राष्ट्र प्रेस
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