महाराष्ट्र सरकार का नया सहकारिता नीति का ऐलान: मंत्री पाटिल की महत्वपूर्ण जानकारी

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महाराष्ट्र सरकार का नया सहकारिता नीति का ऐलान: मंत्री पाटिल की महत्वपूर्ण जानकारी

सारांश

महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने नई सहकारिता नीति की घोषणा की। यह नीति सहकारिता क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए है और इसमें विभिन्न विकासात्मक पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा। जानिए इस नीति की खास बातें।

मुख्य बातें

नई सहकारिता नीति का ऐलान सहकारी क्षेत्र की मजबूती के लिए विभिन्न उपाय १५ सदस्यीय समिति का गठन पारदर्शिता और सतत विकास पर ध्यान किसानों के लिए आधुनिक तकनीक का समर्थन

मुंबई, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने मंगलवार को राज्य परिषद में बताया कि सरकार सहकारिता क्षेत्र को और विकसित करने के लिए जल्द ही एक नई और व्यापक सहकारिता नीति की घोषणा करेगी।

उन्होंने कहा कि सहकारी क्षेत्र सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

बाबासाहेब पाटिल ने सदस्य प्रवीण दारेकर द्वारा नियम 97 के तहत की गई अल्पकालिक चर्चा का उत्तर देते हुए कहा कि नई नीति के मसौदे को तैयार करने के लिए १५ सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।

इस नीति में पारदर्शिता, दक्षता और सतत विकास को प्राथमिकता दी जाएगी, और इसके लिए मुंबई तथा नागपुर समेत विभिन्न विभागों में विशेषज्ञों और युवा पीढ़ी के सुझाव लिए जाएंगे।

मंत्री पाटिल ने कहा कि सहकारी आंदोलन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नींव है, और वर्तमान में राज्य में लगभग २.३३ लाख सहकारी समितियां सक्रिय हैं। इस बड़े नेटवर्क में जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (डीसीसीबी), प्राथमिक कृषि ऋण समितियां, शहरी बैंक, चीनी कारखाने, और आवास समितियां शामिल हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के लिए ब्याज सब्सिडी, प्राथमिक संस्थानों के लिए अनुदान, फसल ऋण का नियमित भुगतान करने वाले किसानों के लिए ब्याज छूट, सहकारी समितियों का डिजिटलीकरण, और चीनी कारखानों के लिए वित्तीय सहायता के माध्यम से इस क्षेत्र को मजबूती प्रदान कर रही है।

वर्तमान में, १२८ सहकारी और १३४ निजी चीनी कारखाने कार्यरत हैं। उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) नियम किसानों के हितों की सुरक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट के माध्यम से किसानों को आधुनिक मशीनरी और प्रत्यक्ष मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा ताकि उत्पादकता में वृद्धि हो सके।

उन्होंने यह भी बताया कि संकटग्रस्त डीसीसीबी को वित्तीय सहायता दी जा रही है। इसके अलावा, आवास समितियों के पुनर्विकास में तेजी लाई जा रही है।

मंत्री पाटिल ने अपने भाषण का समापन करते हुए कहा कि सहकारी आंदोलन भविष्य में रोजगार सृजन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने सहकारी समितियों के माध्यम से दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को सशक्त बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह आंदोलन राज्य के विकास का मजबूत स्तंभ बना रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी। यह नीति निश्चित रूप से सकारात्मक प्रभाव डालेगी।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नई सहकारिता नीति में क्या विशेषताएँ होंगी?
नई नीति में पारदर्शिता, दक्षता और सतत विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।
सहकारी समितियों की संख्या कितनी है?
राज्य में लगभग 2.33 लाख सहकारी समितियां सक्रिय हैं।
राज्य सरकार सहकारी क्षेत्र को कैसे समर्थन दे रही है?
राज्य सरकार ब्याज सब्सिडी, अनुदान और डिजिटलीकरण के माध्यम से सहकारी क्षेत्र को मजबूत कर रही है।
किसानों को किस प्रकार की सहायता दी जाएगी?
किसानों को आधुनिक मशीनरी और प्रत्यक्ष मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।
सहकारी आंदोलन का भविष्य क्या है?
मंत्री पाटिल के अनुसार सहकारी आंदोलन भविष्य में रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
राष्ट्र प्रेस