महाराष्ट्र सरकार ने शुगर उद्योग को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए समिति का गठन किया
सारांश
Key Takeaways
- राज्य-स्तरीय समिति का गठन किया गया है।
- समिति में कई प्रमुख अधिकारी शामिल होंगे।
- उद्योग की समस्याओं का गहन अध्ययन किया जाएगा।
- राज्य सरकार ने वित्तीय सहायता के लिए कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया है।
- उद्योग प्रतिनिधियों ने सरकार से वित्तीय सहायता की मांग की।
मुंबई, 24 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे शुगर इंडस्ट्री (चीनी उद्योग) को वित्तीय सहायता से संबंधित मुद्दों को हल करने के लिए एक राज्य-स्तरीय समिति का गठन करें, और उनसे शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।
इस समिति में सहकारिता, कृषि और वित्त विभागों के सचिव, चीनी आयुक्त, उद्योग सचिव और राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने विधान भवन में शुगर इंडस्ट्री के समक्ष मौजूद चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए आयोजित बैठक के दौरान ये निर्देश जारी किए।
उन्होंने कहा कि समिति चीनी मिलों को आ रही समस्याओं, उनकी प्रकृति, सुधार के उपायों और वैकल्पिक व्यवस्थाओं का गहन अध्ययन करेगी, ताकि तुरंत एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सके। इससे राज्य सरकार को उद्योग के लिए वित्तीय पैकेज तैयार करने में सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी पेराई सत्र से पूर्व संभावित वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए एक कार्य योजना तैयार की जानी चाहिए।
उन्होंने गुड़ और खांडसारी की बड़ी परियोजनाओं के लिए राज्य सरकार द्वारा एक नियामक प्रणाली की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि इन नियमों का मसौदा अगले 15 दिनों के भीतर प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, "राज्य सरकार चीनी उद्योग को सशक्त बनाने और उसकी बाधाओं को दूर करने के लिए रणनीतिक निर्णय लेने के प्रति सकारात्मक रुख अपनाती है।"
उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार आवश्यक सहयोग और रियायतें प्राप्त करने के लिए चीनी कारखाना संघ के प्रतिनिधिमंडल के साथ केंद्र सरकार के साथ बैठक करने का प्रयास करेगी। राज्य सरकार चीनी कारखानों को आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए राज्य और केंद्र दोनों स्तरों से सहायता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।
इससे पहले, हर्षवर्धन पाटिल, दिलीप वलसे पाटिल, जयंत पाटिल, राजेश टोपे और अभिमन्यु पवार जैसे चीनी उद्योग के प्रतिनिधियों ने मांग की थी कि राज्य सरकार पंजाब और कर्नाटक की तरह उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) को कवर करने के लिए प्रति टन 500 रुपए की प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान करे।
उन्होंने सरकार से लंबित बकाया चुकाने के लिए ब्याज सब्सिडी के साथ खुले बाजार से ऋण उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने 31 मार्च तक के सभी कारखाना ऋणों के दीर्घकालिक पुनर्गठन की भी मांग की, जिसमें 2 साल की मोहलत और 10-12 साल की अवधि शामिल हो।
उद्योग प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से यह भी अनुरोध किया कि वे प्रधानमंत्री मोदी और गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के समक्ष एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करें और उनसे चीनी के एमएसपी को बढ़ाकर 4,100 रुपए प्रति क्विंटल करने, इथेनॉल की कीमतों में वृद्धि करने, 21 इथेनॉल परियोजनाओं के लिए लंबित ब्याज सब्सिडी के रूप में 69 करोड़ रुपए जारी करने और बैंकों को कम मार्जिन के बावजूद ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश देने की मांग करें।