गुरु प्रदोष 14 मई: अभिजीत मुहूर्त और सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग, जानें पंचक-राहुकाल का सटीक समय

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गुरु प्रदोष 14 मई: अभिजीत मुहूर्त और सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग, जानें पंचक-राहुकाल का सटीक समय

सारांश

14 मई को गुरु प्रदोष पर अभिजीत मुहूर्त और पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो शिव पूजा और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत अनुकूल है। साथ ही राहुकाल और पंचक के समय का ध्यान रखना भी ज़रूरी है।

मुख्य बातें

गुरु प्रदोष व्रत इस वर्ष 14 मई 2025 (गुरुवार) को मनाया जाएगा।
पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग प्रभावी रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए अत्यंत अनुकूल है।
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा।
प्रदोष काल शाम 7:04 बजे से रात 9:09 बजे तक — शिव पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय।
राहुकाल दोपहर 1:59 से 3:41 बजे और पंचक सुबह 5:31 से रात 10:34 बजे तक रहेगा।
त्रयोदशी तिथि 14 मई सुबह 11:20 बजे से 15 मई सुबह 8:31 बजे तक।

गुरु प्रदोष व्रत इस बार 14 मई 2025 (गुरुवार) को पड़ रहा है। देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती की आराधना को समर्पित यह व्रत इस वर्ष विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन अभिजीत मुहूर्त के साथ-साथ पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग प्रभावी रहेगा। हालाँकि, भक्तों को पंचक और राहुकाल जैसे अशुभ कालों का भी विशेष ध्यान रखना होगा।

गुरु प्रदोष व्रत का महत्व

प्रदोष व्रत प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। जब यह तिथि प्रदोष काल के दौरान व्याप्त होती है, तो वह समय भगवान शिव की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। गुरुवार को पड़ने वाले प्रदोष को गुरु प्रदोष या बृहस्पति प्रदोष कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत-उपवास करने से आध्यात्मिक उन्नति, धर्म ज्ञान, शिक्षा, धन-समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है। यह दिन भगवान शिव के साथ देवगुरु बृहस्पति और भगवान नारायण की विशेष कृपा प्राप्त करने का अवसर भी माना जाता है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और त्रयोदशी तिथि

गुरुवार 14 मई को सूर्योदय सुबह 5 बजकर 31 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 4 मिनट पर होगा। प्रदोष काल शाम 7:04 बजे से रात 9:09 बजे तक रहेगा, जो शिव पूजा के लिए सर्वाधिक उत्तम समय है। त्रयोदशी तिथि 14 मई की सुबह 11 बजकर 20 मिनट से प्रारंभ होकर 15 मई की सुबह 8 बजकर 31 मिनट तक रहेगी।

शुभ मुहूर्त का विवरण

इस दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:07 बजे से 4:49 बजे तक — नए कार्य और साधना के लिए उत्तम।

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक — महादेव की पूजा, रुद्राभिषेक और व्रत-संकल्प के लिए विशेष रूप से शुभ।

विजय मुहूर्त: दोपहर 2:33 बजे से 3:27 बजे तक।

अमृत काल: रात 8:20 बजे से 9:49 बजे तक — यह समय प्रदोष काल के साथ आंशिक रूप से संयुक्त होने से पूजा के लिए और अधिक फलदायी माना जाता है।

उल्लेखनीय है कि पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग प्रभावी रहने से पूजा-पाठ, मंत्र जाप और शुभ कार्यों के लिए यह दिन अत्यंत अनुकूल रहेगा।

अशुभ काल — इन समयों में सावधानी बरतें

शुभ संयोगों के बावजूद कुछ अशुभ कालों में नए कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए:

यमगंड: सुबह 5:31 बजे से 7:13 बजे तक।

गुलिक काल: सुबह 8:54 बजे से 10:36 बजे तक।

दुर्मुहूर्त: सुबह 10:02 बजे से 10:56 बजे तक।

राहुकाल: दोपहर 1:59 बजे से 3:41 बजे तक — इस दौरान कोई भी नया शुभ कार्य प्रारंभ न करें।

पंचक: सुबह 5:31 बजे से रात 10:34 बजे तक — पंचक काल में विशेष रूप से यात्रा, निर्माण और अंत्येष्टि संबंधी कार्यों में सावधानी बरतने की परंपरा है।

भक्त कैसे करें पूजा

भक्त अभिजीत मुहूर्त में महादेव की पूजा, रुद्राभिषेक या व्रत-संकल्प कर सकते हैं। प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है। सर्वार्थ सिद्धि योग के प्रभाव में मंत्र जाप और ध्यान का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस विशेष संयोग का लाभ उठाते हुए भक्त अपनी मनोकामनाएँ भगवान शिव के चरणों में अर्पित कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पंचक का लगभग पूरे दिन बने रहना एक महत्वपूर्ण पहलू है जिसे अक्सर उत्साह में नज़रअंदाज़ किया जाता है। धार्मिक परंपराओं में पंचक काल को विशेष कार्यों के लिए प्रतिबंधित माना जाता है, इसलिए भक्तों को शुभ मुहूर्त के साथ-साथ इन सीमाओं का भी समान रूप से ध्यान रखना चाहिए। पूजा-अर्चना के लिए प्रदोष काल सर्वोत्तम विकल्प है जो पंचक की समाप्ति के बाद आता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरु प्रदोष व्रत 2025 कब है?
गुरु प्रदोष व्रत 14 मई 2025 (गुरुवार) को है। त्रयोदशी तिथि 14 मई की सुबह 11:20 बजे से प्रारंभ होकर 15 मई की सुबह 8:31 बजे तक रहेगी।
14 मई को अभिजीत मुहूर्त का समय क्या है?
14 मई को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। यह समय महादेव की पूजा, रुद्राभिषेक और व्रत-संकल्प के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
14 मई को राहुकाल और पंचक का समय क्या है?
राहुकाल दोपहर 1:59 बजे से 3:41 बजे तक रहेगा, जबकि पंचक सुबह 5:31 बजे से रात 10:34 बजे तक प्रभावी रहेगा। इन दोनों कालों में नए शुभ कार्य आरंभ करने से बचने की परंपरा है।
गुरु प्रदोष व्रत का क्या महत्व है?
गुरु प्रदोष व्रत भगवान शिव, देवगुरु बृहस्पति और भगवान नारायण की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत-उपवास से आध्यात्मिक उन्नति, धन-समृद्धि, शिक्षा और सुख की प्राप्ति होती है।
14 मई को प्रदोष काल का समय क्या है?
प्रदोष काल शाम 7 बजकर 4 मिनट से रात 9 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। यह भगवान शिव की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ समय है और इस दौरान रुद्राभिषेक, शिवलिंग पूजन तथा मंत्र जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस