बुध प्रदोष: विजय मुहूर्त, अमृतकाल और भद्रा का समय, जानें सभी महत्वपूर्ण जानकारी
सारांश
Key Takeaways
- बुध प्रदोष व्रत का महत्वपूर्ण दिन है।
- भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष मुहूर्त मौजूद हैं।
- अमृत काल और विजय मुहूर्त का ध्यान रखें।
- स्नान के बाद ही व्रत का संकल्प लें।
- शिवलिंग पर अभिषेक करें और विशेष पूजन सामग्री का उपयोग करें।
नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महादेव और माता पार्वती की भक्ति को समर्पित प्रदोष व्रत 15 अप्रैल, बुधवार को मनाया जाएगा। यह दिन भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। चूंकि यह दिन बुधवार है, इसे बुध प्रदोष के नाम से जाना जाता है।
इस दिन वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी है। नक्षत्र पूर्व भाद्रपद दोपहर 3 बजकर 22 मिनट तक रहेगा, इसके बाद उत्तर भाद्रपद का आरंभ होगा। बुधवार का स्वामी बुध ग्रह है, इसलिए यह प्रदोष व्रत बुद्धि, वाणी और व्यवसाय में सफलता के लिए बहुत लाभकारी होता है। बुध प्रदोष का व्रत करने से मेधा शक्ति बढ़ती है, व्यवहार में कुशलता आती है और वाक् कौशल में सुधार होता है। भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए यह व्रत विशेष रूप से किया जाता है।
बुधवार को सूर्योदय 5 बजकर 56 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 47 मिनट पर होगा। त्रयोदशी तिथि 15 अप्रैल की रात 10 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। प्रदोष काल शाम 6 बजकर 47 मिनट से 9 बजे तक (लगभग 2 घंटे 13 मिनट) रहेगा। इस समय शिव पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
दृक पंचांग के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 27 मिनट से 5 बजकर 11 मिनट तक, अमृत काल सुबह 7 बजकर 37 मिनट से 9 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त नहीं है। हालांकि, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 46 मिनट से 7 बजकर 8 मिनट तक रहेगा।
अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12 बजकर 21 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक रहेगा (इस समय शुभ कार्य वर्जित हैं)।
यमगंड सुबह 7 बजकर 32 मिनट से 9 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। भद्रा रात 10 बजकर 31 मिनट से अगले दिन 5 बजकर 55 मिनट तक प्रभावी रहेगी। वहीं, पंचक पूरे दिन सक्रिय रहेगा।
बुध प्रदोष व्रत