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बैशाख पूर्णिमा 1 मई: अभिजीत और विजय मुहूर्त एक साथ, शुभ कार्यों के लिए विशेष संयोग

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बैशाख पूर्णिमा 1 मई: अभिजीत और विजय मुहूर्त एक साथ, शुभ कार्यों के लिए विशेष संयोग

सारांश

1 मई की बैशाख पूर्णिमा इस बार साधारण नहीं — अभिजीत और विजय मुहूर्त का एक साथ पड़ना इसे विशेष बनाता है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार यह संयोग शुभ कार्यों के लिए अत्यंत अनुकूल है, लेकिन भद्रा और राहुकाल जैसे अशुभ समय से सावधान रहना भी ज़रूरी है।

मुख्य बातें

बैशाख पूर्णिमा 1 मई 2025 को है; पूर्णिमा तिथि रात 10 बजकर 52 मिनट तक रहेगी।
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:52 से 12:45 और विजय मुहूर्त दोपहर 2:31 से 3:24 बजे तक — दोनों एक साथ।
नक्षत्र स्वाती रहेगा; योग सिद्धि शाम 9:13 बजे तक।
भद्रा सुबह 5:41 से 10:00 बजे और राहुकाल 10:39 से 12:18 बजे तक — इस दौरान शुभ कार्य वर्जित।
बैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है; स्नान, दान और चंद्र अर्घ्य का विशेष महत्व।

नई दिल्ली1 मई 2025 को पड़ने वाली बैशाख पूर्णिमा इस बार विशेष रूप से शुभ मानी जा रही है, क्योंकि इस दिन अभिजीत मुहूर्त और विजय मुहूर्त एक साथ पड़ रहे हैं। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, यह संयोग शुभ और धार्मिक कार्यों के लिए अत्यंत अनुकूल है। पूर्णिमा तिथि शुक्रवार को रात 10 बजकर 52 मिनट तक रहेगी।

मुख्य मुहूर्त और तिथि विवरण

सनातन धर्म में पंचांग के पाँचों अंगों — तिथि, वार, योग, करण और नक्षत्र — के आधार पर दिन के शुभ-अशुभ समय का निर्धारण किया जाता है। बैशाख पूर्णिमा पर सूर्योदय सुबह 5 बजकर 41 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 56 मिनट पर। चंद्रोदय शाम 6 बजकर 52 मिनट पर और चंद्रास्त 2 मई की सुबह 5 बजकर 32 मिनट पर होगा।

इस दिन नक्षत्र स्वाती रहेगा, जो 2 मई की भोर 4 बजकर 35 मिनट तक चलेगा, जिसके बाद विशाखा नक्षत्र आरंभ होगा। योग सिद्धि शाम 9 बजकर 13 मिनट तक रहेगा।

शुभ मुहूर्तों का विस्तृत समय

इस पावन दिन पर कई शुभ मुहूर्त पड़ रहे हैं, जो धार्मिक और मांगलिक कार्यों के लिए उत्तम माने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 15 मिनट से 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 52 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक, और विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 31 मिनट से 3 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।

गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 55 मिनट से 7 बजकर 17 मिनट तक और अमृत काल शाम 6 बजकर 56 मिनट से 8 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। गौरतलब है कि अभिजीत और विजय मुहूर्त का एक ही दिन पड़ना ज्योतिषीय दृष्टि से दुर्लभ संयोग माना जाता है।

अशुभ समय — किन घड़ियों में बचें

ज्योतिष विशेषज्ञों की सलाह है कि भद्रा सुबह 5 बजकर 41 मिनट से 10 बजे तक रहेगी, जिस दौरान कोई भी महत्वपूर्ण कार्य आरंभ न करें। राहुकाल सुबह 10 बजकर 39 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक रहेगा।

यमगंड दोपहर 3 बजकर 37 मिनट से 5 बजकर 17 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 7 बजकर 20 मिनट से 8 बजकर 59 मिनट तक तथा दोपहर 12 बजकर 45 मिनट से 1 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। दुर्मुहूर्त सुबह 8 बजकर 20 मिनट से 9 बजकर 13 मिनट तक रहेगा।

बैशाख पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

बैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है, क्योंकि इसी तिथि पर भगवान गौतम बुद्ध का जन्म, ज्ञान-प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु स्नान, दान-पुण्य, पूजा-पाठ और चंद्रमा को अर्घ्य देने जैसे धार्मिक कार्य करते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब ग्रीष्म ऋतु के बीच इस पर्व का आध्यात्मिक महत्व और भी गहरा हो जाता है। इस दिन गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान को विशेष पुण्यदायी माना गया है। शुभ मुहूर्तों का सदुपयोग कर श्रद्धालु इस दिन को और अधिक फलदायी बना सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका वास्तविक मूल्य तभी है जब श्रद्धालु अशुभ समय — विशेषकर भद्रा और राहुकाल — से सचेत रहें। पंचांग की यह जानकारी केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं, बल्कि यह लाखों हिंदू परिवारों की दैनिक दिनचर्या और निर्णय-प्रक्रिया को प्रभावित करती है। बुद्ध पूर्णिमा के साथ इस तिथि का संगम इसे बहु-धार्मिक महत्व भी देता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस पर्व के सामाजिक और सांस्कृतिक आयाम को नज़रअंदाज़ कर देती है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बैशाख पूर्णिमा 2025 कब है और पूर्णिमा तिथि कब तक रहेगी?
बैशाख पूर्णिमा 1 मई 2025 (शुक्रवार) को है। पूर्णिमा तिथि उसी रात 10 बजकर 52 मिनट तक रहेगी।
1 मई को अभिजीत मुहूर्त और विजय मुहूर्त का समय क्या है?
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 52 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 31 मिनट से 3 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार दोनों का एक साथ होना शुभ कार्यों के लिए विशेष अनुकूल माना जाता है।
बैशाख पूर्णिमा पर किन अशुभ समयों से बचना चाहिए?
भद्रा सुबह 5:41 से 10:00 बजे तक और राहुकाल सुबह 10:39 से दोपहर 12:18 बजे तक रहेगा। इसके अलावा यमगंड, गुलिक काल और दुर्मुहूर्त में भी महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए।
बैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा क्यों कहते हैं?
मान्यता है कि इसी तिथि पर भगवान गौतम बुद्ध का जन्म, ज्ञान-प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था, इसलिए बैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। यह पर्व हिंदू और बौद्ध दोनों समुदायों के लिए विशेष महत्व रखता है।
बैशाख पूर्णिमा पर कौन-से धार्मिक कार्य किए जाते हैं?
इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य, पूजा-पाठ और चंद्रमा को अर्घ्य देना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:15–4:58) में उठकर स्नान करना इस दिन अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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