यूपी विधानमंडल विशेष सत्र में महिला आरक्षण पर सपा-भाजपा आमने-सामने, 33%25 लागू करने की मांग पर हंगामा
सारांश
Key Takeaways
- 30 अप्रैल 2026 को यूपी विधानमंडल के विशेष सत्र में महिला आरक्षण पर सपा और भाजपा के बीच जोरदार हंगामा हुआ।
- सपा विधायकों ने तख्तियाँ लेकर 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू करने की माँग की।
- नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने आरोप लगाया कि विधेयक पारित होने के बावजूद सरकार इसे लागू नहीं करना चाहती।
- उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए भाजपा को महिला हितैषी बताया।
- मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि 2027 में नारी शक्ति विपक्ष को जवाब देगी।
उत्तर प्रदेश विधानमंडल के विशेष सत्र में 30 अप्रैल 2026 को महिला आरक्षण के मुद्दे पर जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिला, जब समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक एक-दूसरे के सामने आ खड़े हुए। सपा विधायकों ने 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर तख्तियाँ उठाईं, तो भाजपा की महिला विधायकों ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में नारे लगाए। लखनऊ स्थित विधानसभा में यह टकराव विशेष सत्र की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही तेज हो गया था।
मुख्य घटनाक्रम
सपा विधायक सदन की गैलरी में तख्तियाँ लेकर पहुँचे और नारेबाजी करते हुए सरकार पर महिला आरक्षण लागू करने में देरी का आरोप लगाया। इसी दौरान भाजपा की महिला विधायक भी विभिन्न भाषाओं में लिखी तख्तियाँ लेकर सदन परिसर में उतरीं और नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में नारे लगाए। दोनों पक्षों का यह प्रदर्शन एक साथ चलता रहा, जिससे सदन का माहौल अत्यंत गरमा गया।
विपक्ष का आरोप
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण लागू नहीं करना चाहती, जबकि विधेयक पहले ही पारित हो चुका है। सपा नेताओं का कहना है कि कानून बन जाने के बावजूद उसके क्रियान्वयन में जानबूझकर देरी की जा रही है। विपक्ष ने इसे महिला हितों के साथ धोखा करार दिया।
सरकार की प्रतिक्रिया
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा विधायक सदन में महिला आरक्षण के समर्थन में अपनी बात रखेंगे और विपक्ष की भूमिका को बेनकाब करेंगे। मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि पूरा दिन महिला सशक्तीकरण के मुद्दे पर चर्चा को समर्पित रहेगा। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण में बाधा डालने वालों को राजनीतिक रूप से जवाब मिलेगा।
अन्य मंत्रियों के बयान
मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि विपक्ष के पास सरकार को घेरने का कोई आधार नहीं है। मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि यह सत्र देश और प्रदेश की महिलाओं को यह बताने का अवसर है कि कौन उनके हित में है और कौन उनके खिलाफ। मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि नारी शक्ति 2027 में विपक्ष को जवाब देगी, जबकि मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने दावा किया कि सपा और कांग्रेस को जनता आने वाले समय में सबक सिखाएगी।
आगे की राजनीति
यह ऐसे समय में आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं और महिला मतदाताओं को साधने की होड़ दोनों प्रमुख दलों में तेज हो गई है। विशेष सत्र में दोनों पक्षों के बीच जारी इस टकराव ने स्पष्ट कर दिया कि महिला आरक्षण का मुद्दा प्रदेश की राजनीति के केंद्र में बना रहेगा। गौरतलब है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के क्रियान्वयन की समयसीमा और परिसीमन की शर्त अभी भी विवाद का केंद्र बनी हुई है।