राम मंदिर चढ़ावा चोरी: चंपत राय ने SIT को सौंपा बयान, SBI की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) को 7 जुलाई 2026 को अपना लिखित बयान सौंप दिया। इस बयान में उन्होंने दान राशि की गिनती प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
दिशा-निर्देश पत्र पर हस्ताक्षर का विवाद
चंपत राय ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि 5 फरवरी 2025 को SBI की अयोध्या शाखा के मुख्य प्रबंधक गोविंद मिश्र द्वारा जारी किए गए दान राशि गिनती संबंधी दिशा-निर्देश पत्र पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। उनके अनुसार, अगस्त 2020 से जून 2026 के बीच तैयार किए गए अन्य संबंधित दस्तावेजों पर उनके और अन्य अधिकारियों के हस्ताक्षर मौजूद हैं, जबकि इस विशेष पत्र पर नहीं।
उन्होंने बताया कि इस दिशा-निर्देश की जानकारी उन्हें पहली बार 13 जून 2026 को तब मिली, जब अकाउंट कार्यालय से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। पत्र में महासचिव को प्रति भेजे जाने का उल्लेख था, लेकिन उन्हें इससे पहले कभी अवगत नहीं कराया गया।
MOU में तय सुरक्षा प्रावधानों की अनदेखी
चंपत राय के बयान के अनुसार, 9 फरवरी 2024 को बैंक के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MOU) में सुरक्षा के स्पष्ट प्रावधान निर्धारित किए गए थे। इनमें गिनती कक्ष में CCTV कैमरे लगाना, लोहे की सलाखों वाला सुरक्षा दरवाजा स्थापित करना और कर्मचारियों द्वारा मेज पर बैठकर नोटों की गिनती करने की व्यवस्था शामिल थी।
उनका कहना है कि यदि इन सुरक्षा उपायों का पूरी तरह पालन किया जाता, तो चोरी की संभावना काफी हद तक कम हो सकती थी।
तलाशी और पोशाक नियमों का उल्लंघन
SIT को दिए बयान में चंपत राय ने आरोप लगाया कि गिनती कक्ष में प्रवेश और बाहर निकलने के दौरान कर्मचारियों की सघन तलाशी नहीं ली गई। उन्होंने यह भी कहा कि बिना जेब वाले कपड़े पहनने जैसे सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया — बल्कि बैंक की ओर से उपलब्ध कराए गए कपड़ों में भी जेबें मौजूद थीं।
उनके अनुसार, बैंक अपने ही बनाए सुरक्षा प्रोटोकॉल को प्रभावी ढंग से लागू कराने में विफल रहा।
गिनती कर्मचारियों के चयन पर सवाल
चंपत राय ने दान राशि की गिनती के लिए नियुक्त कर्मचारियों की पृष्ठभूमि पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, जिन युवकों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वे मूल रूप से हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में नियुक्त थे — न कि वित्तीय लेनदेन से संबंधित प्रशिक्षित कर्मचारी।
जांच की मौजूदा स्थिति
गौरतलब है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच SIT और अयोध्या पुलिस संयुक्त रूप से कर रही हैं। अब तक मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच एजेंसियाँ दान राशि की गिनती प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की गहन पड़ताल कर रही हैं। चंपत राय का यह बयान जांच में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बन सकता है, जो बैंक और ट्रस्ट के बीच जिम्मेदारी के सवाल को और पेचीदा बनाता है।