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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: चंपत राय ने SIT को सौंपा बयान, SBI की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: चंपत राय ने SIT को सौंपा बयान, SBI की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

सारांश

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय का SIT बयान सिर्फ औपचारिकता नहीं — इसमें SBI के उस दिशा-निर्देश पत्र पर सवाल है जिस पर उनके हस्ताक्षर ही नहीं, और उन सुरक्षा नियमों की अनदेखी का आरोप है जो MOU में खुद बैंक ने तय किए थे।

मुख्य बातें

चंपत राय ने 7 जुलाई 2026 को SIT को लिखित बयान सौंपा, जिसमें SBI अयोध्या शाखा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
5 फरवरी 2025 के दिशा-निर्देश पत्र पर चंपत राय के हस्ताक्षर नहीं; उन्हें इसकी जानकारी 13 जून 2026 को मिली।
9 फरवरी 2024 के MOU में CCTV, सुरक्षा दरवाजा और बिना जेब वाले कपड़े जैसे प्रावधान थे, जिनका पालन नहीं हुआ।
गिनती कक्ष में प्रवेश व निकासी पर कर्मचारियों की सघन तलाशी नहीं ली गई।
दान राशि गिनती के लिए हाउसकीपिंग स्टाफ को लगाया गया था, जो वित्तीय कार्य के लिए प्रशिक्षित नहीं थे।
मामले में SIT और अयोध्या पुलिस की संयुक्त जांच जारी; कई आरोपी अब तक गिरफ्तार।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) को 7 जुलाई 2026 को अपना लिखित बयान सौंप दिया। इस बयान में उन्होंने दान राशि की गिनती प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

दिशा-निर्देश पत्र पर हस्ताक्षर का विवाद

चंपत राय ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि 5 फरवरी 2025 को SBI की अयोध्या शाखा के मुख्य प्रबंधक गोविंद मिश्र द्वारा जारी किए गए दान राशि गिनती संबंधी दिशा-निर्देश पत्र पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। उनके अनुसार, अगस्त 2020 से जून 2026 के बीच तैयार किए गए अन्य संबंधित दस्तावेजों पर उनके और अन्य अधिकारियों के हस्ताक्षर मौजूद हैं, जबकि इस विशेष पत्र पर नहीं।

उन्होंने बताया कि इस दिशा-निर्देश की जानकारी उन्हें पहली बार 13 जून 2026 को तब मिली, जब अकाउंट कार्यालय से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। पत्र में महासचिव को प्रति भेजे जाने का उल्लेख था, लेकिन उन्हें इससे पहले कभी अवगत नहीं कराया गया।

MOU में तय सुरक्षा प्रावधानों की अनदेखी

चंपत राय के बयान के अनुसार, 9 फरवरी 2024 को बैंक के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MOU) में सुरक्षा के स्पष्ट प्रावधान निर्धारित किए गए थे। इनमें गिनती कक्ष में CCTV कैमरे लगाना, लोहे की सलाखों वाला सुरक्षा दरवाजा स्थापित करना और कर्मचारियों द्वारा मेज पर बैठकर नोटों की गिनती करने की व्यवस्था शामिल थी।

उनका कहना है कि यदि इन सुरक्षा उपायों का पूरी तरह पालन किया जाता, तो चोरी की संभावना काफी हद तक कम हो सकती थी।

तलाशी और पोशाक नियमों का उल्लंघन

SIT को दिए बयान में चंपत राय ने आरोप लगाया कि गिनती कक्ष में प्रवेश और बाहर निकलने के दौरान कर्मचारियों की सघन तलाशी नहीं ली गई। उन्होंने यह भी कहा कि बिना जेब वाले कपड़े पहनने जैसे सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया — बल्कि बैंक की ओर से उपलब्ध कराए गए कपड़ों में भी जेबें मौजूद थीं।

उनके अनुसार, बैंक अपने ही बनाए सुरक्षा प्रोटोकॉल को प्रभावी ढंग से लागू कराने में विफल रहा।

गिनती कर्मचारियों के चयन पर सवाल

चंपत राय ने दान राशि की गिनती के लिए नियुक्त कर्मचारियों की पृष्ठभूमि पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, जिन युवकों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वे मूल रूप से हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में नियुक्त थे — न कि वित्तीय लेनदेन से संबंधित प्रशिक्षित कर्मचारी।

जांच की मौजूदा स्थिति

गौरतलब है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच SIT और अयोध्या पुलिस संयुक्त रूप से कर रही हैं। अब तक मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच एजेंसियाँ दान राशि की गिनती प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की गहन पड़ताल कर रही हैं। चंपत राय का यह बयान जांच में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बन सकता है, जो बैंक और ट्रस्ट के बीच जिम्मेदारी के सवाल को और पेचीदा बनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस व्यवस्था का है जिसने चोरी को संभव बनाया। MOU में लिखित सुरक्षा प्रावधानों का पालन न होना और एक ऐसे दिशा-निर्देश पत्र का अस्तित्व जिस पर महासचिव के हस्ताक्षर नहीं — ये सवाल बैंक और ट्रस्ट दोनों की जवाबदेही तय करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब धार्मिक संस्थाओं में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर पहले से ही बहस तेज है। SIT की असली परीक्षा यह होगी कि वह व्यक्तिगत आरोपियों तक सीमित रहती है या संस्थागत विफलताओं की जड़ तक पहुँचती है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला क्या है?
अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान राशि की गिनती के दौरान चोरी का यह मामला SIT और अयोध्या पुलिस द्वारा जांचा जा रहा है। अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच एजेंसियाँ गिनती प्रक्रिया व सुरक्षा व्यवस्था की भी पड़ताल कर रही हैं।
चंपत राय ने SIT को क्या बताया?
चंपत राय ने SIT को दिए लिखित बयान में SBI के 5 फरवरी 2025 के दिशा-निर्देश पत्र पर अपने हस्ताक्षर न होने की बात कही। उन्होंने यह भी बताया कि MOU में तय सुरक्षा नियमों — जैसे CCTV, सुरक्षा दरवाजा और बिना जेब वाले कपड़े — का पालन नहीं कराया गया।
SBI और राम मंदिर ट्रस्ट के बीच MOU में क्या तय था?
9 फरवरी 2024 को हुए MOU के तहत गिनती कक्ष में CCTV कैमरे, लोहे की सलाखों वाला सुरक्षा दरवाजा और कर्मचारियों द्वारा बिना जेब वाले कपड़े पहनने की अनिवार्यता तय की गई थी। चंपत राय का आरोप है कि बैंक इन प्रावधानों को लागू कराने में विफल रहा।
गिनती कर्मचारियों के चयन पर क्या सवाल उठे हैं?
चंपत राय ने बताया कि दान राशि की गिनती के लिए जिन युवकों को नियुक्त किया गया था, वे मूल रूप से हाउसकीपिंग स्टाफ थे, न कि वित्तीय कार्य के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी। यह सवाल कर्मचारी चयन प्रक्रिया की उचितता पर केंद्रित है।
इस मामले में जांच कहाँ तक पहुँची है?
SIT और अयोध्या पुलिस संयुक्त रूप से जांच कर रही हैं और अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। चंपत राय का लिखित बयान जांच में एक नया आयाम जोड़ता है, क्योंकि इसमें संस्थागत सुरक्षा खामियों की ओर ध्यान दिलाया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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