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राम मंदिर चंदा चोरी मामला: VHP अध्यक्ष आलोक कुमार बोले — ट्रस्ट की जांच पर सभी ट्रस्टी संतुष्ट, दोषियों को मिले कड़ी सजा

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राम मंदिर चंदा चोरी मामला: VHP अध्यक्ष आलोक कुमार बोले — ट्रस्ट की जांच पर सभी ट्रस्टी संतुष्ट, दोषियों को मिले कड़ी सजा

सारांश

राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद में VHP अध्यक्ष आलोक कुमार ने ट्रस्ट का बचाव किया — SIT जांच पर भरोसा जताया, चंपत राय के नैतिक इस्तीफे को सराहा और विपक्ष पर राजनीतिकरण का आरोप लगाया। ट्रस्ट ने स्वयं SIT गठन की मांग की थी और अब कार्यवाहक महासचिव की नियुक्ति कर ली गई है।

मुख्य बातें

VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की जांच प्रक्रिया पर सभी ट्रस्टी संतुष्ट हैं।
ट्रस्ट ने स्वयं सरकार से SIT गठित करने का अनुरोध किया था; प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद FIR दर्ज हो चुकी है।
अनिल मिश्रा ने नैतिक आधार पर स्वेच्छा से इस्तीफा दिया; ट्रस्ट ने उसे स्वीकार किया।
कृष्ण मोहन को अंतरिम व्यवस्था के तहत कार्यवाहक महासचिव नियुक्त किया गया; CEO के लिए सर्च कमेटी गठित।
सोना-चांदी दान करने वाले श्रद्धालुओं को अयोध्या आकर वस्तुओं का सत्यापन करने का आमंत्रण दिया गया है।
आलोक कुमार ने विपक्षी दलों पर 1990 के राम जन्मभूमि आंदोलन के विरोध का हवाला देते हुए राजनीतिकरण का आरोप लगाया।

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने 6 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की पूरी समीक्षा की है और जांच प्रक्रिया को लेकर सभी ट्रस्टी संतुष्ट हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके विरुद्ध बिना किसी पक्षपात के कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

ट्रस्ट की बैठक और समीक्षा

आलोक कुमार ने बताया कि हालिया ट्रस्ट बैठक में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा को छोड़कर लगभग सभी ट्रस्टी उपस्थित थे। बैठक में पिछले छह वर्षों में ट्रस्ट द्वारा किए गए कार्यों की विस्तृत समीक्षा हुई। भव्य राम मंदिर के निर्माण, उससे जुड़ी सुविधाओं के विकास और अब तक संपन्न कार्यों पर ट्रस्ट ने संतोष व्यक्त किया। हालांकि, चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी की घटना पर सभी ट्रस्टियों ने गहरा दुख भी जताया।

एसआईटी जांच और एफआईआर

आलोक कुमार के अनुसार, जैसे ही कथित अनियमितताओं की जानकारी सामने आई, ट्रस्ट ने स्वयं सरकार से एसआईटी (SIT) गठित करने का अनुरोध किया। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद एफआईआर दर्ज की गई और अब जांच सक्रिय रूप से जारी है। ट्रस्ट की स्पष्ट इच्छा है कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी सिद्ध होता है, तो उसे कड़ी सजा मिले और किसी भी स्तर पर कोई रियायत न बरती जाए।

चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे

चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जाने पर आलोक कुमार ने स्पष्ट किया कि दोनों को उनके पदों से हटाया नहीं गया, बल्कि उन्होंने नैतिक आधार पर स्वयं इस्तीफा दिया। उनका तर्क था कि यदि वे पद पर बने रहते तो जांच को प्रभावित करने या गवाहों व सबूतों पर असर डालने की आशंका उठती। ऐसी किसी भी संभावना को समाप्त करने के लिए दोनों ने स्वेच्छा से पद छोड़ा और ट्रस्ट ने उनकी भावना का सम्मान करते हुए इस्तीफा स्वीकार कर लिया।

नियमित नियुक्ति होने तक कृष्ण मोहन को अंतरिम व्यवस्था के तहत कार्यवाहक महासचिव बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति के लिए एक सर्च कमेटी का भी गठन किया गया है।

दान में मिले सोने-चांदी के रिकॉर्ड पर स्थिति

सोने-चांदी के दान के रिकॉर्ड के सत्यापन पर आलोक कुमार ने कहा कि सामान्य नकद चढ़ावे की व्यक्तिगत जांच संभव नहीं है, क्योंकि यह पता लगाना कठिन है कि किस श्रद्धालु ने कितनी राशि दी। जिन श्रद्धालुओं ने सोना, चांदी या अन्य कीमती वस्तुएं दान की हैं, उन्हें ट्रस्ट ने आमंत्रित किया है कि वे समय लेकर अयोध्या आएं और अपनी दान की गई वस्तुओं का सत्यापन करें। चांदी की वस्तुओं को सरकारी कंपनी के माध्यम से नियमानुसार गलाया गया है और उसका पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है।

विपक्ष पर राजनीतिकरण का आरोप

आलोक कुमार ने आरोप लगाया कि जो राजनीतिक दल आज राम मंदिर के नाम पर सवाल उठा रहे हैं, वही दल अतीत में राम जन्मभूमि आंदोलन का विरोध करते रहे हैं। 1990 के राम जन्मभूमि आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय कारसेवकों पर गोलियां चलाई गई थीं और कई लोगों की जान गई थी। उनके अनुसार, जनता इतिहास को भूली नहीं है और वह राजनीतिक स्वार्थ तथा वास्तविक मुद्दों के बीच अंतर भली-भांति समझती है। चंपत राय के VHP में भविष्य के बारे में पूछे जाने पर आलोक कुमार ने कहा कि केवल आरोप लग जाने से किसी को दोषी नहीं माना जा सकता और जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि SIT जांच कितनी स्वतंत्र और पारदर्शी होगी — खासकर जब ट्रस्ट ने खुद ही उसके गठन की मांग की हो। चंपत राय का 'नैतिक इस्तीफा' एक सकारात्मक संकेत है, पर यह तब तक अधूरा है जब तक जांच के नतीजे सार्वजनिक न हों। विपक्ष पर राजनीतिकरण का आरोप लगाना सुविधाजनक है, लेकिन इससे यह तथ्य नहीं बदलता कि लाखों श्रद्धालुओं के दान की जवाबदेही सुनिश्चित करना ट्रस्ट की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चंदा चोरी मामला क्या है?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे — नकद, सोना और चांदी — में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। ट्रस्ट ने स्वयं सरकार से SIT गठित करने का अनुरोध किया, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद FIR दर्ज की गई और जांच जारी है।
चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने इस्तीफा क्यों दिया?
VHP अध्यक्ष आलोक कुमार के अनुसार, दोनों को पद से हटाया नहीं गया, बल्कि उन्होंने नैतिक आधार पर स्वेच्छा से इस्तीफा दिया। यह आशंका थी कि पद पर बने रहने से जांच प्रभावित हो सकती है या गवाहों व सबूतों पर असर पड़ सकता है।
ट्रस्ट में अंतरिम व्यवस्था क्या है?
नियमित नियुक्ति होने तक कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया है। CEO की नियुक्ति के लिए एक अलग सर्च कमेटी का गठन किया गया है।
सोना-चांदी दान का सत्यापन कैसे होगा?
ट्रस्ट ने उन श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया है जिन्होंने सोना, चांदी या अन्य कीमती वस्तुएं दान की हैं कि वे अयोध्या आकर अपनी वस्तुओं का सत्यापन करें। चांदी की वस्तुओं को सरकारी कंपनी के माध्यम से नियमानुसार गलाया गया है और उसका पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है।
VHP ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाए?
आलोक कुमार ने कहा कि जो राजनीतिक दल आज राम मंदिर के नाम पर सवाल उठा रहे हैं, वही 1990 के राम जन्मभूमि आंदोलन का विरोध करते रहे और उस दौरान कारसेवकों पर गोलियां चलाई गई थीं। उनके अनुसार यह मामले का राजनीतिकरण है।
राष्ट्र प्रेस
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