राम मंदिर चढ़ावा चोरी: VHP अध्यक्ष आलोक कुमार बोले — आरोपियों को जल्द सजा मिले, हिंदुओं की आस्था को गहरी ठेस
सारांश
मुख्य बातें
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने 1 जुलाई को कहा कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के सभी आरोपियों को कानून के तहत शीघ्र दंड मिलने पर ही इस विवाद का वास्तविक समाधान संभव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना ने देशभर के हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुँचाई है और उनके दिलों में बेचैनी है।
एसआईटी जांच पर VHP का रुख
आलोक कुमार ने कहा कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को जांच पूरी करने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय देना उचित है। उनके अनुसार, यदि जांच एजेंसी ने किसी ठोस निष्कर्ष तक पहुँचने के लिए अधिक समय माँगा है, तो इसे नकारात्मक दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'जांच आगे बढ़ रही है और इसे बिना किसी अनावश्यक हस्तक्षेप के जारी रहने देना चाहिए।'
कुछ विपक्षी दलों की उस माँग को उन्होंने खारिज किया जिसमें मामले को सीबीआई को सौंपने की बात कही गई थी। उनका तर्क था कि जो दल उत्तर प्रदेश पुलिस पर सवाल उठाते हैं, वही दल केंद्रीय जांच एजेंसियों पर भी सवाल उठाते हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया और पूरा हिंदू समाज इस जांच पर नज़र रखे हुए है, इसलिए किसी भी गड़बड़ी को छुपाया नहीं जा सकता।
वकीलों के बहिष्कार और संवैधानिक अधिकार पर टिप्पणी
अयोध्या बार एसोसिएशन के उस प्रस्ताव पर — जिसमें कहा गया कि कोई वकील आरोपियों का पक्ष नहीं रखेगा — आलोक कुमार ने कहा कि यह बात उन्हें 'थोड़ी अजीब' लगी। उन्होंने स्वीकार किया कि आरोपियों के प्रति उनके मन में कोई सहानुभूति नहीं है, परंतु साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्देश का भी उल्लेख किया जिसमें कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत कानूनी सहायता प्रत्येक आरोपी का मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक, कानूनी और नैतिक रूप से कोई भी बार एसोसिएशन ऐसा प्रस्ताव पारित नहीं कर सकती।
चंपत राय के इस्तीफे और प्रशासनिक जवाबदेही
मंदिर प्रशासन से जुड़े सवालों पर आलोक कुमार ने कहा कि गोपाल राव की औपचारिक नियुक्ति के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। जहाँ तक चंपत राय के महासचिव पद से इस्तीफे का सवाल है, उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के मात्र दो दिन के भीतर इस्तीफा देना सराहनीय कदम है क्योंकि इससे जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित होती है। उन्होंने सर्वदलीय समिति बनाने के सुझाव को भी यह कहते हुए अस्वीकार किया कि इसका अर्थ जांच को राजनेताओं के हाथों में सौंपना होगा।
मीडिया ट्रायल और अफवाहों पर चेतावनी
आलोक कुमार ने कुछ नेताओं द्वारा ₹2,000 करोड़ की चोरी के दावों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पुलिस को ऐसे नेताओं को बुलाकर उनके पास उपलब्ध साक्ष्य के बारे में पूछताछ करनी चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि बिना सबूत के ऐसे बयान देना और अफवाहें फैलाना, जिनसे सनसनी, असंतोष या हिंसा भड़क सकती है, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353 के तहत दंडनीय अपराध है। जांच से जुड़ी जानकारी मीडिया में लीक होने पर उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कितनी खबरें तथ्यात्मक हैं और कितनी राजनीति से प्रेरित।
अंतिम फैसला न्यायालय का
आलोक कुमार ने जोर देकर कहा कि किसी भी मामले में अंतिम निर्णय केवल न्यायालय का होता है। उन्होंने माना कि कुछ लोगों को सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध गतिविधियाँ करते देखा गया है और कुछ ने स्वीकारोक्ति भी की है, लेकिन भारत की न्यायिक व्यवस्था में दोष सिद्ध होने तक कोई भी आरोपी नहीं माना जाता। उन्होंने कहा कि इस मामले में शीघ्र और निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया ही आहत हिंदू समाज को वास्तविक संतोष दे सकती है।