झारखंड JPSC-JSSC आंदोलन: 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव का ऐलान, हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रहे अभ्यर्थियों के आंदोलन ने 15 अगस्त 2026 को एक निर्णायक मोड़ ले लिया, जब जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने 20 अगस्त को रांची स्थित मुख्यमंत्री आवास के घेराव की घोषणा की। आंदोलन के 22वें दिन शनिवार शाम आयोजित प्रेस वार्ता में मंच ने पहली बार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग भी सार्वजनिक रूप से उठाई।
मुख्य मांगें और घेराव की घोषणा
मंच के प्रवक्ता रवींद्र पासवान और पीयूष कुमार ने स्पष्ट किया कि जब तक जेएसएससी-सीजीएल और 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सर्विस परीक्षाएँ रद्द नहीं की जातीं और पूरे मामले की सीबीआई जाँच शुरू नहीं होती, आंदोलन थमने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि 20 अगस्त को राज्यभर से हज़ारों अभ्यर्थी रांची पहुँचेंगे और मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे।
प्रवक्ताओं ने आंदोलन की दिशा बदलने का भी संकेत दिया। उन्होंने कहा, 'अब तक आंदोलन गांधीवादी तरीके से चलाया गया, लेकिन सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। अब हम भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस का रास्ता अपनाएंगे।'
16 अगस्त को 24 जिलों में पुतला दहन
छात्र नेताओं ने घोषणा की कि 16 अगस्त को झारखंड के सभी 24 जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया जाएगा। रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जुटकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह आयोजन आंदोलन को और व्यापक बनाने की रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
राहुल गांधी को भी चेतावनी
मंच ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का पुतला दहन करने का भी ऐलान किया। प्रवक्ता रवींद्र पासवान ने कहा कि राहुल गांधी ने पहले छात्रों की मांगों का समर्थन किया था, लेकिन अब उन्हें राज्य सरकार के प्रति अपना रुख स्पष्ट करना होगा। उन्होंने कहा, 'अगर आप हमारे मुद्दे के साथ हैं तो राज्य सरकार से कांग्रेस का समर्थन वापस लें। छात्रों के साथ खड़े रहने की बात कहकर उन्हें भ्रमित न करें।'
आंदोलन की पृष्ठभूमि
यह आंदोलन जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले 22 दिनों से जारी है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि इन परीक्षाओं में गड़बड़ी हुई है और सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर पहले से असंतोष व्याप्त है।
आगे क्या होगा
मंच ने स्पष्ट किया है कि 20 अगस्त का मुख्यमंत्री आवास घेराव आंदोलन का सबसे बड़ा चरण होगा। यदि सरकार ने इससे पहले ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।