17 अगस्त 2026
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जेएसएससी-सीजीएल रद्द: 24 दिन के आंदोलन की जीत, जयपाल सिंह स्टेडियम में छात्रों का जश्न

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जेएसएससी-सीजीएल रद्द: 24 दिन के आंदोलन की जीत, जयपाल सिंह स्टेडियम में छात्रों का जश्न

सारांश

24 दिन की बारिश, गर्मी और अनशन के बाद झारखंड के छात्रों ने वह हासिल किया जो कई बार असंभव लगा — जेएसएससी-सीजीएल रद्द। लेकिन असली लड़ाई अब शुरू होती है: 2014 से अब तक की भर्ती परीक्षाओं की जाँच और एक ऐसी व्यवस्था जिसमें योग्य अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 17 अगस्त 2026 को कैबिनेट की विशेष बैठक के बाद जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने की घोषणा की।
24 दिनों से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे छात्र आंदोलन को बड़ी सफलता मिली।
एसआईटी और सीआईडी जाँच में कथित तौर पर चौंकाने वाले तथ्य और एजेंसियों के बीच घालमेल के संकेत मिले।
सरकार ने वर्ष 2014 से अब तक जेपीएससी और जेएसएससी की सभी भर्ती परीक्षाओं की व्यापक जाँच का आदेश दिया।
परीक्षा सुधार के लिए आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में समिति गठित; आम नागरिकों से भी सुझाव आमंत्रित।

झारखंड सरकार ने सोमवार, 17 अगस्त 2026 को जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया, जिससे रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 24 दिनों से धरना दे रहे हज़ारों अभ्यर्थियों में उत्साह की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कैबिनेट की विशेष बैठक के बाद यह घोषणा की, जिसे छात्र नेताओं ने अपने लंबे संघर्ष की निर्णायक जीत करार दिया।

आंदोलन स्थल पर जीत का माहौल

सरकार के फैसले की खबर मिलते ही जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम का माहौल पूरी तरह बदल गया। जो स्थान पिछले कई दिनों से विरोध-प्रदर्शन और नारेबाज़ी का केंद्र बना हुआ था, वह सोमवार की शाम जश्न का गवाह बन गया। छात्रों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई, गले मिले और देर रात तक उत्सव का माहौल बना रहा। बारिश और प्रतिकूल मौसम की परवाह किए बिना आंदोलन जारी रखने वाले अभ्यर्थियों के चेहरे पर राहत और खुशी साफ दिखाई दी।

सरकार ने क्यों लिया यह फैसला

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घोषणा करते हुए बताया कि एसआईटी और सीआईडी की जाँच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न एजेंसियों के बीच घालमेल के संकेत भी मिले हैं, जिसके चलते परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठे। यह ऐसे समय में आया है जब राज्यभर में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आक्रोश चरम पर था।

व्यापक जाँच और सुधार का रोडमैप

सरकार ने वर्ष 2014 से अब तक जेपीएससी और जेएसएससी की सभी भर्ती परीक्षाओं की व्यापक जाँच कराने की घोषणा की है। इसके साथ ही परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय भी लिया गया है। यह समिति परीक्षा व्यवस्था में ज़रूरी बदलावों के सुझाव देगी। सरकार ने आम नागरिकों से भी परीक्षा सुधार को लेकर सुझाव आमंत्रित किए हैं।

छात्र नेताओं की बाकी मांगें

आंदोलनकारी छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष केवल एक परीक्षा रद्द कराने तक सीमित नहीं था। उनका कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जाँच निष्पक्ष तरीके से पूरी होनी चाहिए और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से अपेक्षा जताई कि शेष मांगों पर भी शीघ्र निर्णय लिया जाए।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि अमिताभ कौशल समिति के गठन और 2014 से अब तक की परीक्षाओं की व्यापक जाँच की समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं की गई है। आंदोलन की आगे की दिशा — चाहे छात्र धरना समाप्त करें या शेष मांगों को लेकर दबाव जारी रखें — अगले कुछ दिनों में तय होगी। झारखंड में भर्ती परीक्षा सुधार की यह प्रक्रिया अब एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या 2014 से अब तक की भर्ती परीक्षाओं की व्यापक जाँच महज़ एक राजनीतिक इशारा बनकर रह जाएगी, या इसके ठोस परिणाम सामने आएंगे। अमिताभ कौशल समिति के लिए कोई स्पष्ट समयसीमा न होना और दोषियों पर कार्रवाई की कोई ठोस घोषणा न होना — दोनों ही चिंताजनक हैं। झारखंड में यह पहली बार नहीं है जब परीक्षा विवाद के बाद जाँच का वादा हुआ हो; पारदर्शी और समयबद्ध कार्रवाई के बिना, छात्रों का यह जश्न जल्द ही अगले आंदोलन की भूमिका बन सकता है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा क्यों रद्द की गई?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अनुसार, एसआईटी और सीआईडी जाँच के दौरान परीक्षा प्रक्रिया में कथित तौर पर चौंकाने वाले तथ्य और विभिन्न एजेंसियों के बीच घालमेल के संकेत मिले, जिसके चलते परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया।
झारखंड छात्र आंदोलन कितने दिनों तक चला और इसकी मुख्य मांग क्या थी?
यह आंदोलन 24 दिनों तक रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चला। छात्रों की प्रमुख मांग जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करना और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जाँच कराना थी।
परीक्षा सुधार के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जो परीक्षा प्रणाली में ज़रूरी सुधारों के सुझाव देगी। इसके साथ ही 2014 से अब तक जेपीएससी और जेएसएससी की सभी भर्ती परीक्षाओं की व्यापक जाँच का आदेश भी दिया गया है।
क्या छात्रों की सभी मांगें पूरी हो गई हैं?
नहीं। छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया है कि जेएसएससी-सीजीएल रद्द होना उनकी लड़ाई का एक हिस्सा है। उनकी शेष मांगों में कथित दोषियों पर कठोर कार्रवाई और भर्ती परीक्षाओं में स्थायी सुधार शामिल हैं, जिन पर वे जल्द निर्णय की अपेक्षा रखते हैं।
जेएसएससी-सीजीएल क्या है और यह किसके लिए है?
जेएसएससी-सीजीएल यानी झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा है, जो झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों में ग्रुप-सी पदों पर भर्ती के लिए आयोजित होती है। यह परीक्षा राज्य के हज़ारों स्नातक अभ्यर्थियों के लिए सरकारी नौकरी का एक प्रमुख माध्यम है।
राष्ट्र प्रेस
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