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जेएसएससी-सीजीएल रद्द: झारखंड में 2,000 से अधिक नियुक्त कर्मियों की नौकरी खतरे में, प्रोजेक्ट भवन के बाहर उबाल

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जेएसएससी-सीजीएल रद्द: झारखंड में 2,000 से अधिक नियुक्त कर्मियों की नौकरी खतरे में, प्रोजेक्ट भवन के बाहर उबाल

सारांश

झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल रद्द होने से 2,000 से अधिक नियुक्त कर्मियों की नौकरी एक झटके में खतरे में पड़ गई। आंदोलनकारी छात्र जीत मना रहे हैं, तो नियुक्त अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन के बाहर सड़क पर हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने अब दोनों पक्षों को संतुष्ट करने की कठिन चुनौती है।

मुख्य बातें

झारखंड सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने का फैसला किया, जिससे 2,000 से अधिक नियुक्त कर्मियों की नौकरी खतरे में पड़ गई।
नियुक्त अभ्यर्थी करीब एक वर्ष से विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत थे।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि एसआईटी और सीआईडी जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर परीक्षा रद्द की गई।
वर्ष 2014 से अब तक की जेपीएससी और जेएसएससी सभी भर्ती परीक्षाओं की व्यापक जांच की घोषणा की गई।
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलनकारी छात्र इसे अपनी जीत मान रहे हैं, जबकि नियुक्त अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

झारखंड सरकार के जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद रांची में उथल-पुथल मच गई। 17 अगस्त 2026 को फैसले की जानकारी मिलते ही 2,000 से अधिक चयनित अभ्यर्थी — जो करीब एक वर्ष से विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत हैं — झारखंड मंत्रालय स्थित प्रोजेक्ट भवन के बाहर जमा हो गए और सरकार के निर्णय के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। इस एक फैसले ने राज्य में दो परस्पर विरोधी पक्षों को आमने-सामने खड़ा कर दिया है।

मुख्य घटनाक्रम

जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के माध्यम से 2,000 से अधिक अभ्यर्थियों को विभिन्न सरकारी पदों पर नियुक्त किया गया था। नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ये अभ्यर्थी लगभग एक वर्ष से अलग-अलग विभागों में सेवाएँ दे रहे हैं। परीक्षा रद्द होने की घोषणा के बाद इन सभी नियुक्तियों का भविष्य अधर में लटक गया है।

प्रोजेक्ट भवन के बाहर जुटे प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने कहा कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार परीक्षा दी, परिणाम के बाद नियुक्ति पत्र प्राप्त किया और अपने-अपने पदों पर योगदान भी दिया। उनका तर्क है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, परंतु निर्दोष नियुक्त कर्मियों को इसकी कीमत नहीं चुकानी चाहिए।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि परीक्षा रद्द करने का निर्णय एसआईटी और सीआईडी जांच के दौरान सामने आए महत्वपूर्ण तथ्यों के आधार पर लिया गया है। उन्होंने वर्ष 2014 से अब तक की जेपीएससी और जेएसएससी की समस्त भर्ती परीक्षाओं की व्यापक जांच कराने की भी घोषणा की है। सरकार के अनुसार यह कदम भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य था।

दो पक्ष, दो नज़रिए

इस फैसले ने राज्य में दो अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न की हैं। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्र इसे अपनी बड़ी जीत मान रहे हैं, क्योंकि वे लंबे समय से परीक्षा में कथित धांधली के विरुद्ध आवाज़ उठाते आए थे। वहीं, जेएसएससी-सीजीएल के माध्यम से नियुक्त अभ्यर्थी अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर गहरी चिंता में हैं और सरकार के फैसले का खुलकर विरोध कर रहे हैं।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद उठा हो। राज्य में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं पर सवाल पहले भी उठते रहे हैं, और यह मामला उस लंबी श्रृंखला की नई कड़ी बन गया है।

आम जनता और नियुक्त कर्मियों पर असर

अभ्यर्थियों ने सरकार से अपील की है कि वह फैसले पर पुनर्विचार करे और उनकी स्थिति को ध्यान में रखते हुए कोई वैकल्पिक समाधान निकाले। उनका कहना है कि एक वर्ष की सेवा के बाद अचानक नौकरी जाना न केवल उनके परिवारों के लिए बल्कि उन सरकारी विभागों के लिए भी समस्या खड़ी करेगा जहाँ वे कार्यरत थे।

क्या होगा आगे

अब सरकार के सामने दोहरी चुनौती है — एक ओर आंदोलनकारी छात्रों की माँगों को पूरा करना और दूसरी ओर जेएसएससी-सीजीएल के माध्यम से नियुक्त अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े सवालों का संतोषजनक जवाब देना। एसआईटी और सीआईडी जांच के निष्कर्ष और सरकार का अगला कदम इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु एक वर्ष तक सेवा दे चुके निर्दोष अभ्यर्थियों के पुनर्वास का कोई स्पष्ट रोडमैप अभी तक सामने नहीं आया — यही सबसे बड़ी चूक है। 2014 से अब तक की सभी भर्ती परीक्षाओं की जांच की घोषणा महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसका दायरा इतना विशाल है कि बिना ठोस समयसीमा और स्वतंत्र निगरानी के यह भी अधूरी कवायद बन सकती है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार दोषियों को दंडित करने और निर्दोष नियुक्तियों को सुरक्षित रखने — दोनों को एक साथ साध सकती है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा क्यों रद्द की गई?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अनुसार, एसआईटी और सीआईडी जांच के दौरान परीक्षा प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण अनियमितताएँ सामने आईं, जिसके आधार पर झारखंड सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया।
जेएसएससी-सीजीएल रद्द होने से कितने अभ्यर्थी प्रभावित होंगे?
इस परीक्षा के माध्यम से 2,000 से अधिक अभ्यर्थियों को विभिन्न सरकारी पदों पर नियुक्त किया गया था, जो करीब एक वर्ष से कार्यरत हैं। परीक्षा रद्द होने के बाद इन सभी नियुक्तियों का भविष्य अनिश्चित हो गया है।
नियुक्त अभ्यर्थियों की क्या माँग है?
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने और उनके लिए वैकल्पिक समाधान निकालने की माँग की है। उनका कहना है कि यदि परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन निर्दोष नियुक्त कर्मियों की नौकरी सुरक्षित रखी जाए।
झारखंड सरकार आगे क्या कदम उठाने वाली है?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वर्ष 2014 से अब तक की जेपीएससी और जेएसएससी की सभी भर्ती परीक्षाओं की व्यापक जांच कराने की घोषणा की है। एसआईटी और सीआईडी जांच के निष्कर्ष और सरकार का अगला कदम इस मामले की दिशा तय करेंगे।
आंदोलनकारी छात्रों की इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया है?
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्र इस फैसले को अपनी बड़ी जीत मान रहे हैं, क्योंकि वे लंबे समय से परीक्षा में कथित धांधली के विरुद्ध आंदोलन करते आए थे।
राष्ट्र प्रेस
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