जेएसएससी-सीजीएल रद्द के विरोध में रांची में मार्च, चयनित अभ्यर्थियों ने कहा — 'न्याय दो या फांसी दो'
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा रद्द किए जाने के राज्य सरकार के फैसले के विरोध में मंगलवार, 18 अगस्त को रांची में चयनित और नवनियुक्त अभ्यर्थी सड़कों पर उतर आए। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने प्रोजेक्ट भवन से बिरसा चौक तक विरोध मार्च निकाला और सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की माँग की। यह प्रदर्शन उस घोषणा के ठीक एक दिन बाद हुआ, जब 17 अगस्त को कैबिनेट की विशेष बैठक में परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया था।
मुख्य घटनाक्रम
मार्च के दौरान अभ्यर्थियों ने 'न्याय दो या फांसी दो' जैसे तीखे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्होंने वर्षों की कड़ी मेहनत और अपनी योग्यता के बल पर परीक्षा उत्तीर्ण की है। पूरी परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्तियों को एकमुश्त रद्द करने का निर्णय उन अभ्यर्थियों के साथ सरासर अन्याय है, जिन्होंने निष्पक्ष तरीके से सफलता हासिल की।
अभ्यर्थियों की मुख्य माँगें
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि परीक्षा में किसी स्तर पर अनियमितता हुई है, तो उसकी जाँच होनी चाहिए और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन कथित गड़बड़ी की आड़ में पूरी परीक्षा को रद्द करना उचित नहीं है। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन के दबाव में आकर सरकार ने यह फैसला लिया, जिसकी कीमत निर्दोष चयनित उम्मीदवारों को चुकानी पड़ रही है।
सरकारी सेवा में योगदान दे चुके अभ्यर्थी भी प्रभावित
अभ्यर्थियों ने बताया कि परीक्षा रद्द होने से उन लोगों का भविष्य भी अधर में लटक गया है, जिन्होंने चयन के बाद सरकारी सेवा में योगदान देना भी शुरू कर दिया था। उनका कहना है कि आंदोलन का खामियाजा उन उम्मीदवारों को नहीं भुगतना चाहिए, जिन्होंने पूरी ईमानदारी से परीक्षा पास की है।
सरकार का फैसला और दोहरी प्रतिक्रिया
झारखंड राज्य सरकार ने 17 अगस्त को कैबिनेट की विशेष बैठक के बाद जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा सहित टीडीपीएल एजेंसी के माध्यम से आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी। इस फैसले पर प्रतिक्रियाएँ दो धड़ों में बँट गई हैं — एक ओर आंदोलनकारी छात्रों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया, वहीं दूसरी ओर चयनित अभ्यर्थियों ने इसे अन्यायपूर्ण करार देते हुए विरोध का बिगुल फूँक दिया है।
आगे क्या होगा
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस नहीं लिया, तो उनका आंदोलन और तेज होगा। अभ्यर्थियों ने कहा कि वे अपने भविष्य और नौकरी की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार की अगली प्रतिक्रिया और संभावित कानूनी कदमों पर टिकी हैं।