झारखंड परीक्षा विवाद: तीसरे दौर की वार्ता भी विफल, छात्र सोमवार को विधानसभा मार्च पर अड़े
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलनरत छात्रों और हेमंत सोरेन सरकार के बीच रविवार, 9 अगस्त को रांची में हुई तीसरे दौर की वार्ता एक बार फिर बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई। सरकार ने दावा किया कि उसने प्रदर्शनकारियों की अधिकांश माँगें मान ली हैं, लेकिन छात्र जेएसएससी सीजीएल 2024 परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जाँच की अपनी मूल माँगों पर अडिग रहे।
वार्ता का घटनाक्रम
बातचीत में सरकार की ओर से चार मंत्रियों का समूह शामिल था। चर्चा बेनतीजा रहने के बाद इस समूह ने सार्वजनिक रूप से निराशा व्यक्त की। सूचना भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्या कुमार सोनू ने कहा कि सरकार ने छात्रों की अधिकांश माँगें स्वीकार कर ली हैं, फिर भी आंदोलन जारी रखने के फैसले को उन्होंने 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से हठधर्मिता छोड़कर संवाद का रास्ता अपनाने और छात्रों के अभिभावकों से भी उन्हें समझाने की अपील की।
सरकार ने क्या माँगें मानीं
मंत्री सुदिव्या कुमार के अनुसार, सरकार 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा और 2023-2025 की सिविल सेवा परीक्षा के लंबित मामलों को रद्द करने पर सहमत हो गई है। इसके अलावा, परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के वित्तीय पहलुओं की जाँच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को आपराधिक जाँच विभाग (सीआईडी) के साथ शामिल करने की सिफारिश पर भी सहमति जताई गई। विवादित एजेंसी टीडीपीएल द्वारा आयोजित अन्य सभी परीक्षाओं की व्यापक जाँच और गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया।
जेएसएससी सीजीएल रद्द करने पर सरकार का रुख
छात्रों की प्रमुख माँग — जेएसएससी सीजीएल 2024 परीक्षा रद्द करना — पर सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि यह उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। मंत्री ने कहा कि यह परीक्षा सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के अनुसार आयोजित की गई थी और इसके आधार पर नियुक्तियाँ भी हो चुकी हैं। सरकार ने एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में मामले की जाँच कराने का प्रस्ताव रखा, लेकिन छात्रों ने इसे अस्वीकार कर दिया।
प्रदर्शनकारियों की अगली रणनीति
वार्ता विफल होने के बाद प्रदर्शनकारियों ने सोमवार, 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा तक मार्च करने के अपने पूर्व घोषित कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। गौरतलब है कि यह आंदोलन राज्य भर में भर्ती परीक्षाओं में कथित धाँधली को लेकर उपजे व्यापक जन-असंतोष की अभिव्यक्ति है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड सरकार पर रोज़गार और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को लेकर पहले से ही दबाव बना हुआ है। आने वाले दिनों में सरकार और छात्रों के बीच टकराव और बढ़ने की आशंका है।