17 अगस्त 2026
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झारखंड छात्र आंदोलन का 24वाँ दिन: चार मंत्री आज JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच से करेंगे निर्णायक वार्ता

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झारखंड छात्र आंदोलन का 24वाँ दिन: चार मंत्री आज JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच से करेंगे निर्णायक वार्ता

सारांश

झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 24 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन में आज निर्णायक मोड़ आ सकता है — चार मंत्रियों का समूह रांची में रिफॉर्म मंच से बातचीत करेगा। CBI जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग पर गतिरोध बना है, और 20 अगस्त को CM आवास घेराव की चेतावनी दी जा चुकी है।

मुख्य बातें

17 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे रांची के मोरहाबादी स्टेट गेस्ट हाउस में सरकार के चार मंत्रियों और JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच के बीच वार्ता होगी।
छात्रों की दो प्रमुख मांगें — जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करना और CBI जांच — पर अब तक सहमति नहीं बनी।
सरकार ने CBI के विकल्प के रूप में सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच समिति का प्रस्ताव दिया, जिसे छात्रों ने अस्वीकार किया।
छात्रों ने रविवार शाम रांची में विरोध मार्च निकाला और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की माँग पहली बार उठाई।
वार्ता विफल रहने पर 20 अगस्त को CM आवास घेराव का ऐलान किया गया है।
सरकार पहले ही 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा और बैकलॉग सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने की घोषणा कर चुकी है।

झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन के 24वें दिन, 17 अगस्त 2026 को रांची के मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में दोपहर दो बजे राज्य सरकार के चार मंत्रियों का समूह और जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के प्रतिनिधिमंडल के बीच वार्ता निर्धारित है। यह बैठक आंदोलन के मौजूदा गतिरोध को तोड़ने की दिशा में निर्णायक कड़ी मानी जा रही है।

वार्ता का स्वरूप और प्रस्ताव

राज्य सरकार ने रविवार, 16 अगस्त को आंदोलनकारी छात्रों को बातचीत का प्रस्ताव दिया। अनुमंडल पदाधिकारी और एडीएम (लॉ एंड ऑर्डर) ने आंदोलनकारियों को आधिकारिक रूप से वार्ता की सूचना दी। सरकार ने छात्रों को उनके विधिक सलाहकारों के साथ बातचीत में शामिल होने की अनुमति देने की भी बात कही है, जो इस वार्ता को पहले के दौरों से अलग बनाती है।

गौरतलब है कि सरकार और छात्रों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन दो प्रमुख मांगों — जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करना और सीबीआई जांच — पर अब तक सहमति नहीं बन सकी है।

छात्रों की प्रमुख मांगें

आंदोलनकारी छात्र दो मुख्य मांगों पर अडिग हैं। पहली — वर्ष 2024 में आयोजित जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को रद्द किया जाए, जिसके ज़रिए दो हज़ार से अधिक पदों पर नियुक्तियाँ हो चुकी हैं। दूसरी — भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच कराई जाए। छात्रों का कहना है कि राज्य की सीआईडी द्वारा की जा रही मौजूदा जांच पर उन्हें भरोसा नहीं है, क्योंकि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े पिछले मामलों में जांच से उनका विश्वास बहाल नहीं हुआ।

सरकार का पक्ष और पूर्व की सहमतियाँ

राज्य सरकार का तर्क है कि जिस चरण में नियुक्तियाँ हो चुकी हैं, उस स्थिति में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करना व्यावहारिक रूप से कठिन है। सरकार यह भी कहती रही है कि परीक्षा से जुड़ी शिकायतों की जांच पहले हो चुकी है और मामला न्यायिक प्रक्रिया से भी गुजर चुका है। सीबीआई जांच के विकल्प के रूप में सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने का प्रस्ताव दिया है, जिसे आंदोलनकारी छात्र अस्वीकार कर चुके हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब सरकार पहले ही 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा और बैकलॉग सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने की घोषणा कर चुकी है — परीक्षा सुधार से जुड़ी कुछ मांगों पर पूर्व की वार्ताओं में सहमति भी बनी है।

विरोध मार्च और नए दबाव

वार्ता से एक दिन पहले रविवार शाम आंदोलनकारी छात्रों ने रांची में विरोध मार्च निकाला। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से निकला यह मार्च अल्बर्ट एक्का चौक पर पहुँचा, जहाँ छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और बिहार के राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव के पुतले फूंके। आंदोलनकारियों ने पहली बार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।

जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने चेतावनी दी है कि यदि प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो राज्य के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी रांची पहुँचेंगे। इसके साथ ही छात्रों ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव का ऐलान कर दिया है।

आगे क्या होगा

आज दोपहर दो बजे होने वाली वार्ता पर सबकी निगाहें टिकी हैं। यदि सरकार और छात्रों के बीच किसी साझा समाधान पर सहमति बनती है, तो करीब साढ़े तीन सप्ताह से चल रहे इस आंदोलन को विराम देने की राह खुल सकती है। बातचीत विफल रहने की स्थिति में 20 अगस्त के प्रस्तावित घेराव के साथ आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो एक और समिति उसे बहाल नहीं करती। दूसरी ओर, छात्रों द्वारा CM के इस्तीफे की नई माँग आंदोलन को परीक्षा-सुधार से राजनीतिक टकराव की ओर ले जाने का जोखिम उठाती है, जो उनकी मूल माँगों की धार कमज़ोर कर सकती है। आज की वार्ता में यदि कोई ठोस तंत्र — जैसे स्वतंत्र न्यायिक निगरानी या समयबद्ध जांच — सामने नहीं आया, तो 20 अगस्त का घेराव महज़ एक पड़ाव होगा, अंत नहीं।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में JPSC-JSSC छात्र आंदोलन क्यों हो रहा है?
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में यह आंदोलन चल रहा है। छात्र जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने और पूरे मामले की CBI जांच की माँग कर रहे हैं।
आज की वार्ता में क्या होने की उम्मीद है?
17 अगस्त को दोपहर 2 बजे रांची के मोरहाबादी स्टेट गेस्ट हाउस में सरकार के चार मंत्री और JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच के प्रतिनिधि बातचीत करेंगे। छात्रों के विधिक सलाहकार भी इस वार्ता में शामिल होंगे। मुख्य फोकस दो प्रमुख मांगों — परीक्षा रद्द करना और CBI जांच — पर रहेगा।
सरकार और छात्रों के बीच मुख्य मतभेद क्या हैं?
सरकार का कहना है कि जेएसएससी-सीजीएल के ज़रिए 2,000 से अधिक नियुक्तियाँ हो चुकी हैं, इसलिए परीक्षा रद्द करना व्यावहारिक नहीं है। CBI जांच के बजाय सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति का प्रस्ताव दिया है, जिसे छात्रों ने अस्वीकार कर दिया है।
20 अगस्त को क्या होने वाला है?
यदि आज की वार्ता में कोई ठोस समाधान नहीं निकला तो छात्रों ने 20 अगस्त को रांची में मुख्यमंत्री आवास घेराव का ऐलान किया है। JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच ने चेतावनी दी है कि राज्यभर से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी रांची पहुँचेंगे।
सरकार ने अब तक छात्रों की किन मांगों पर सहमति जताई है?
सरकार ने 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा और बैकलॉग सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने की घोषणा पहले ही कर दी है। परीक्षा सुधार से जुड़ी कुछ अन्य मांगों पर भी पूर्व की वार्ताओं में सहमति बनी है, लेकिन CBI जांच और जेएसएससी-सीजीएल रद्द करने पर गतिरोध बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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