जेएसएससी-सीजीएल रद्द: रांची में 1,975 चयनित अभ्यर्थियों की तिरंगा यात्रा, फैसला वापस लेने की मांग
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा के तहत की गई नियुक्तियाँ रद्द किए जाने के विरोध में रांची में आंदोलन तेज हो गया है। 20 अगस्त, गुरुवार की शाम करीब छह बजे सैकड़ों चयनित अभ्यर्थियों ने मोरहाबादी मैदान से अल्बर्ट एक्का चौक तक तिरंगा यात्रा निकाली और राज्य सरकार के इस निर्णय को वापस लेने की माँग की। इस परीक्षा रद्द होने से 1,975 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियाँ प्रभावित हुई हैं।
मुख्य घटनाक्रम
तिरंगा यात्रा में शामिल अभ्यर्थियों ने नारेबाजी करते हुए स्पष्ट किया कि वे किसी दोषी को संरक्षण देने की माँग नहीं कर रहे, बल्कि बिना व्यक्तिगत जाँच के सभी चयनित उम्मीदवारों की नियुक्तियाँ एकमुश्त रद्द किए जाने का विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने निर्धारित प्रतियोगी प्रक्रिया में भाग लेकर सफलता अर्जित की थी और उन्हें सामूहिक दंड देना न्यायसंगत नहीं है।
कई अभ्यर्थी नियुक्ति के बाद संबंधित सरकारी विभागों में सेवाएँ भी दे चुके थे। इनमें से कुछ ने अन्य नौकरियाँ छोड़कर इन पदों पर योगदान दिया था। परीक्षा रद्द होने से उनके सामने एक बार फिर बेरोज़गारी की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
सरकार का पक्ष और पृष्ठभूमि
झारखंड राज्य सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल सहित कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय कथित अनियमितताओं की जाँच में सामने आए तथ्यों के आधार पर लिया है। सरकार का रुख यह है कि परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता से समझौता हुआ और इसीलिए संपूर्ण चयन प्रक्रिया को निरस्त करना आवश्यक था। हालाँकि, अभ्यर्थियों की माँग है कि दोषियों की व्यक्तिगत पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए और निर्दोष उम्मीदवारों को राहत दी जाए।
झारखंड हाईकोर्ट में मामला
जेएसएससी-सीजीएल समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को रद्द किए जाने का मामला अब झारखंड हाईकोर्ट तक पहुँच चुका है। चयनित और नियुक्त अभ्यर्थियों की ओर से सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए याचिकाएँ दाखिल की गई हैं। अदालत ने जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई है। जेएसएससी-सीजीएल से जुड़े मामले में भी याचिका दायर करने की तैयारी जारी है।
आम जनता और अभ्यर्थियों पर असर
अभ्यर्थियों ने कहा कि परीक्षा रद्द होने से केवल नौकरी का नुकसान नहीं हुआ, बल्कि वर्षों की मेहनत, उम्र सीमा और भविष्य की योजनाएँ भी प्रभावित हुई हैं। कई उम्मीदवार अब दोबारा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की स्थिति में पहुँच गए हैं। आंदोलनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष किसी राजनीतिक दल के विरुद्ध नहीं, बल्कि अपने रोज़गार और भविष्य की सुरक्षा के लिए है।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। हाईकोर्ट की अंतरिम रोक और आगामी याचिकाओं के मद्देनज़र अब इस मामले का फैसला न्यायपालिका के हाथों में है। अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी रहने की संभावना है और अदालत का अगला रुख इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेगा।