20 अगस्त 2026
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जेएसएससी-जेपीएससी पर सरकार का फैसला साहसिक: मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, चुने गए उम्मीदवार जा सकते हैं कोर्ट

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जेएसएससी-जेपीएससी पर सरकार का फैसला साहसिक: मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, चुने गए उम्मीदवार जा सकते हैं कोर्ट

सारांश

रांची में 20-25 दिनों से चले छात्र आंदोलन के बाद झारखंड सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द की। मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने इसे 'साहसिक फैसला' करार दिया और कहा कि प्रभावित उम्मीदवारों के लिए अदालत का रास्ता खुला है।

मुख्य बातें

मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने जेएसएससी और जेपीएससी पर सरकार के फैसले को 'बहुत साहसिक' बताया।
रांची में 20-25 दिनों से चला छात्र आंदोलन समाप्त हुआ, जिसके बाद सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द की।
मंत्री ने कहा — इस निर्णय में न छात्रों की गलती है, न सरकार की, न कोर्ट की; नियुक्तियाँ न्यायालय के आदेशानुसार हुई थीं।
चुने गए उम्मीदवार परीक्षा रद्द होने के खिलाफ न्यायालय में जा सकते हैं; सरकार अदालत के मार्गदर्शन पर आगे निर्णय लेने को तैयार।
मंत्री के अनुसार भर्ती में हो रहे खुलासे और जुड़ती कड़ियाँ व्यवस्था को 'स्वच्छ और स्वस्थ' करने के लिए इस कदम को ज़रूरी बनाती थीं।

झारखंड सरकार में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने 20 अगस्त को रांची में चल रहे छात्र आंदोलन के समाप्त होने और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द किए जाने के सरकारी निर्णय पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जेएसएससी और जेपीएससी को लेकर सरकार के कदम को 'बहुत साहसिक फैसला' बताया और स्पष्ट किया कि भर्ती परीक्षा रद्द होने से प्रभावित चुने गए उम्मीदवार न्याय के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं।

मंत्री तिर्की ने क्यों बताया फैसला साहसिक

मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा, 'झारखंड में छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगभग 20-25 दिनों से लगातार चल रहा था। हमारा मानना है कि जेएसएससी और जेपीएससी को लेकर सरकार का लिया गया फैसला बहुत साहसिक फैसला है। यह देशभर में संदेश पहुंचाता है कि जहाँ संस्थाओं और सरकार से लोगों का विश्वास उठ रहा है, वैसी स्थिति में विश्वास को कायम रखने के लिए कठोर निर्णय लिया गया है।'

यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खुलासे एक के बाद एक सामने आ रहे थे। मंत्री ने कहा कि जिस तरह खुलासे हो रहे हैं और कड़ियाँ जुड़ रही हैं, उसी परिप्रेक्ष्य में सरकार का यह निर्णय व्यवस्था को 'स्वच्छ और स्वस्थ' करने के लिए अनिवार्य था।

चुने गए उम्मीदवारों पर असर और उनके विकल्प

मंत्री तिर्की ने स्वीकार किया कि जेएसएससी-सीजीएल भर्ती परीक्षा रद्द होने से अनेक अभ्यर्थियों की नियुक्तियाँ खतरे में पड़ गई हैं। उन्होंने कहा, 'इसमें न छात्रों की गलती है, न सरकार की गलती है और न कोर्ट की गलती है। जब जेएसएससी-सीजीएल में नियुक्तियाँ हुई थीं, उस समय कोर्ट के आदेशानुसार यह नियुक्तियाँ हुई थीं।'

चुने गए उम्मीदवारों के भविष्य के बारे में उन्होंने कहा, 'बिल्कुल, वे न्याय की माँग करेंगे। वे नौकरी में थे। हमारा मानना है कि वे कोर्ट का दरवाज़ा भी खटखटाएंगे। हमें जो जानकारी मिल रही है, उसके अनुसार कई लोग हमें फोन कर रहे हैं। हमें भरोसा है कि कोर्ट सभी मामलों की न्यायिक नज़रिए से जाँच करेगा।'

सरकार का रुख और आगे की राह

मंत्री तिर्की ने यह भी संकेत दिया कि न्यायालय के मार्गदर्शन और सलाह के आधार पर सरकार आगे के निर्णय लेने के लिए तैयार है। गौरतलब है कि रांची में 20-25 दिनों से जारी छात्र आंदोलन के बाद सरकार ने यह निर्णायक कदम उठाया, जिसे प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपनी आंशिक जीत के रूप में देखा।

व्यापक संदर्भ: झारखंड में भर्ती पारदर्शिता का सवाल

झारखंड में सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की माँग नई नहीं है। आलोचकों का कहना है कि जेएसएससी और जेपीएससी दोनों संस्थाओं की विश्वसनीयता पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। इस निर्णय के बाद अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं को किस तरह अधिक पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाया जाए, ताकि अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

उनके भविष्य की ज़िम्मेदारी कौन लेगा। परीक्षा रद्द करना पारदर्शिता की दिशा में एक कदम हो सकता है, पर यह तब तक अधूरा है जब तक नई भर्ती प्रक्रिया की समयसीमा और जवाबदेही तय नहीं होती। झारखंड में यह पहली बार नहीं है जब भर्ती विवाद ने सड़कों पर आंदोलन को जन्म दिया — बिना संरचनात्मक सुधार के, यह चक्र दोहराने का जोखिम बना रहेगा।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा क्यों रद्द की गई?
भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और लगातार हो रहे खुलासों के बाद झारखंड सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया। मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के अनुसार, व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए यह कठोर कदम उठाना ज़रूरी था।
रांची में छात्र आंदोलन कितने दिन चला और क्या माँगें थीं?
रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगभग 20-25 दिनों तक लगातार चला। प्रदर्शनकारी जेएसएससी-सीजीएल भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और अनियमितताओं की जाँच की माँग कर रहे थे।
जेएसएससी-सीजीएल में चुने गए उम्मीदवारों के पास अब क्या विकल्प हैं?
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने स्पष्ट किया कि चुने गए उम्मीदवार परीक्षा रद्द होने के खिलाफ न्यायालय का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं। सरकार का कहना है कि वह अदालत के मार्गदर्शन के आधार पर आगे का निर्णय लेने को तैयार है।
क्या इस फैसले में चुने गए उम्मीदवारों की कोई गलती मानी गई है?
नहीं। मंत्री तिर्की ने स्पष्ट रूप से कहा कि इसमें न छात्रों की गलती है, न सरकार की और न कोर्ट की। उन्होंने बताया कि नियुक्तियाँ उस समय न्यायालय के आदेशानुसार ही हुई थीं।
जेपीएससी को लेकर सरकार ने क्या रुख अपनाया है?
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के अनुसार, जेएसएससी के साथ-साथ जेपीएससी को लेकर भी सरकार का फैसला 'साहसिक' है और यह देशभर में यह संदेश देता है कि संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए कठोर निर्णय लेने से सरकार नहीं हिचकेगी।
राष्ट्र प्रेस
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