जेएसएससी-सीजीएल रद्द: दिलीप घोष बोले — झारखंड सरकार को दो हफ्ते पहले मान लेनी चाहिए थी छात्रों की मांग
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने 18 अगस्त को झारखंड सरकार द्वारा जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा और टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द किए जाने के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय दो सप्ताह पहले ही ले लिया जाना चाहिए था, और छात्रों को इस तरह परेशान करना उचित नहीं था।
मुख्य घटनाक्रम
दिलीप घोष ने सवाल उठाया कि झारखंड सरकार को यह फैसला लेने में इतना समय क्यों लगा। उन्होंने कहा, 'दिल्ली में जैसे ही विरोध-प्रदर्शन शुरू हुआ, सरकार ने बातचीत शुरू कर दी। मंत्री प्रदर्शनकारियों से मिलने गए और कई बार बातचीत हुई। लेकिन यहाँ की सरकार छात्रों की माँगों पर विचार करने को तैयार नहीं थी। अगर सरकार ने पहले ही बातचीत कर ली होती, तो हालात इतने मुश्किल नहीं होते।'
घोष ने आगे कहा, 'जब इतना बड़ा विरोध-प्रदर्शन चलता है, तो सभी को परेशानी होती है। छात्र बीमार पड़ गए और उन्हें लाठीचार्ज का सामना करना पड़ा। ऐसा ड्रामा क्यों किया गया? क्या सरकार में आत्मविश्वास की कमी है? लेकिन अब सरकार ने जो वादा किया है उसे निभाए।'
राहुल गांधी के पत्र पर प्रतिक्रिया
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखे जाने पर घोष ने कहा कि पत्र लिखकर 'डायलॉगबाज़ी' करने का कोई मतलब नहीं है। उनके अनुसार, 'उन्हें खुद आगे आना चाहिए था और छात्रों से कहना चाहिए था कि हम आपके साथ हैं, चिंता न करें — या मुख्यमंत्री को दखल देकर कहना चाहिए था कि आइए उनकी माँगें मान लें और उनसे बात करें।'
कीर्ति आजाद पर निशाना
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कीर्ति आजाद द्वारा आत्मरक्षा के लिए पिस्तौल का लाइसेंस माँगे जाने पर भी घोष ने कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, 'वह रिवॉल्वर लेकर कहाँ जाएँगे? वह अंडों के डर से अपने निर्वाचन क्षेत्र बर्धमान भी नहीं आए, और अब बंदूक माँग रहे हैं। बंगाल के लोगों को बंदूक न दिखाएँ।'
भारतीय जनता पार्टी की नई केंद्रीय कमेटी पर बधाई
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई केंद्रीय कमेटी के गठन पर दिलीप घोष ने सभी पदाधिकारियों का स्वागत किया और कहा कि नई टीम के नेतृत्व में पार्टी और मजबूत होगी तथा बेहतर नतीजे हासिल करेगी।
आगे क्या
झारखंड सरकार द्वारा परीक्षाएँ रद्द किए जाने के बाद अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि सरकार छात्रों से किए वादों को कितनी जल्दी और किस रूप में पूरा करती है। दिलीप घोष ने स्पष्ट किया कि सरकार की असली परीक्षा अब वादों के क्रियान्वयन में है।