राहुल गांधी ने झारखंड छात्र-सरकार सहमति को सराहा, हेमंत सोरेन के संवाद के तरीके को बताया सही
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 18 अगस्त 2026 को झारखंड में भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों और राज्य सरकार के बीच बनी सहमति का स्वागत किया और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बातचीत के रवैये की तारीफ की। छात्रों ने जेएसएससी सीजीएल परीक्षा और टीडीपीएल एजेंसी द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद अपना अनशन समाप्त किया।
राहुल गांधी का एक्स पर संदेश
राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'झारखंड के छात्रों और राज्य सरकार के बीच सहमति बनी, और छात्रों ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त की — यह खबर सुनकर बहुत खुशी हुई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड सरकार ने बातचीत का रास्ता चुना, और समाधान निकाला। छात्रों ने संयम रखा, और अपनी बात मनवाई। यही सही तरीका है। छात्र सवाल पूछें, तो जवाब मिलना चाहिए।'
उन्होंने आगे लिखा, 'हम देश के हर छात्र के साथ खड़े हैं। और हम इस वसूली तंत्र को जड़ से बदलकर रहेंगे, ताकि हर छात्र को उसकी मेहनत का पूरा फल और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का हक मिले। पूरे देश में ये सिस्टम बदलेगा। अब ऐसी व्यवस्था बनेगी जो छात्रों को आगे बढ़ाए, उन्हें पीछे न खींचे।'
देर रात टूटी भूख हड़ताल
परीक्षा रद्द होने की घोषणा के बाद रांची सदर अस्पताल में अनशन पर बैठे छात्र नेताओं से मिलने देर रात राज्य सरकार के मंत्री दीपिका पांडे सिंह और इरफान अंसारी पहुँचे। दोनों मंत्रियों ने छात्र नेता देवेंद्र महतो को जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया। इसके बाद हबीबा और राहुल का भी अनशन खत्म कराया गया।
छात्र नेता की प्रतिक्रिया
भूख हड़ताल तोड़ने के बाद देवेंद्र महतो ने मीडिया से कहा, 'हमने सम्मानजनक तरीके से अपना अनशन खत्म किया। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी, मंत्री दीपिका पांडे और हमारे विधायक जयराम महतो की संयुक्त पहल से हमने अपनी भूख हड़ताल खत्म करने का फैसला किया। जिन मांगों के लिए हम संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे थे, वे सभी पूरी हो गई हैं।'
प्रदर्शनकारी हबीबा ने सरकार की सराहना करते हुए कहा, 'हमारी सरकार ने साबित कर दिया है कि यह आदिवासियों, मूलवासियों और सबकी सरकार है और यह उनके हितों के बारे में सोचती है। उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर हेमंत हैं, तो हिम्मत है।'
विवाद की पृष्ठभूमि
यह आंदोलन जेएसएससी सीजीएल परीक्षा की पारदर्शिता और टीडीपीएल एजेंसी की भूमिका पर उठे सवालों के बीच शुरू हुआ था। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में देश के कई राज्यों में प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर छात्र आंदोलन तेज़ हुए हैं — झारखंड इस बार संवाद के ज़रिए समाधान की राह चुनने वाला उदाहरण बना।
आगे की राह
सहमति के बाद अब नज़रें इस पर टिकी हैं कि झारखंड सरकार परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है। राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्तर पर 'वसूली तंत्र' बदलने का संकल्प दोहराते हुए इस मुद्दे को देशव्यापी छात्र हितों से जोड़ा है।