गुजरात यूसीसी को राष्ट्रपति मुर्मु की मंजूरी; कमेटी सदस्य गीता श्रॉफ बोलीं — महिलाओं को मिलेगा समान न्याय
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुजरात के यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) विधेयक को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है, जिससे उत्तराखंड के बाद गुजरात देश का दूसरा राज्य बन गया है जहाँ समान नागरिक संहिता कानूनी रूप से लागू होने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हुए राज्य की यूसीसी कमेटी की सदस्य गीता श्रॉफ ने 2 अक्टूबर 2026 को सूरत में कहा कि यह गुजरात के लिए एक अमूल्य पल है। उनके अनुसार, समान नागरिक संहिता के लागू होने से महिलाओं, बच्चों और परिवारों को एक समान अधिकार और न्याय मिलने की उम्मीद है।
यूसीसी क्या बदलेगा
गीता श्रॉफ ने बताया कि यूसीसी के तहत विवाह पंजीकरण, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मुद्दों में उल्लेखनीय बदलाव आएँगे। विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के अधिकारों तथा संपत्ति से जुड़े मामलों में सभी नागरिकों को एकसमान कानूनी व्यवस्था का लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण जिन मामलों में न्याय की प्रक्रिया लंबी खिंचती थी, उनमें अब कानूनी स्पष्टता आने की उम्मीद है।
35 वर्षों के सामाजिक अनुभव का संदर्भ
अपने करीब 35 वर्षों के सामाजिक कार्य का हवाला देते हुए श्रॉफ ने कहा कि अदालतों और पुलिस थानों में काम के दौरान उन्होंने प्रत्यक्ष देखा कि विभिन्न समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के चलते न्याय मिलने में बाधाएँ आती थीं। उनके अनुसार, कई मामलों में न्यायिक प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबी हो जाती थी। यूसीसी के बाद ऐसी स्थितियों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
आपत्तियों पर कमेटी का रुख
यूसीसी को लेकर कुछ समुदायों की आपत्तियों के सवाल पर गीता श्रॉफ ने कहा कि कई बार पर्याप्त जानकारी न होने के कारण लोगों को उकसाया जाता है और वे प्रतिक्रिया देते हैं। उन्होंने बताया कि यूसीसी कमेटी ने करीब एक वर्ष तक अलग-अलग स्थानों पर जाकर धार्मिक गुरुओं, विभिन्न समुदायों और वर्गों के लोगों से सीधी बातचीत की। श्रॉफ ने यह भी स्पष्ट किया कि यूसीसी में किसी भी धर्म की धार्मिक परंपराओं या उपासना-प्रक्रिया में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया गया है।
कमेटी की अगुवाई और प्रक्रिया
श्रॉफ ने कमेटी की अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस रंजना देसाई और अन्य सदस्यों के कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि कमेटी ने विभिन्न वर्गों के लोगों के विचार और सुझाव लेकर यह प्रक्रिया आगे बढ़ाई। आमने-सामने बातचीत के दौरान कई लोगों ने समान नागरिक संहिता की आवश्यकता पर सहमति जताई।
आगे क्या होगा
गीता श्रॉफ ने उम्मीद जताई कि देश के अन्य राज्य भी गुजरात के अनुभव से प्रेरणा लेंगे और भविष्य में पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू होने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। गौरतलब है कि यह कदम ऐसे समय में आया है जब यूसीसी पर राष्ट्रीय बहस तेज हो रही है और कई राज्य सरकारें इस विषय पर अपना रुख तय कर रही हैं। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब गुजरात सरकार यूसीसी को धरातल पर लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठा सकती है।