30 अक्टूबर 2026
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यूसीसी: उत्तर प्रदेश में लागू करने की पहल सराहनीय — उत्तराखंड ड्राफ्ट कमेटी सदस्य मनु गौड़

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यूसीसी: उत्तर प्रदेश में लागू करने की पहल सराहनीय — उत्तराखंड ड्राफ्ट कमेटी सदस्य मनु गौड़

सारांश

उत्तराखंड यूसीसी ड्राफ्ट कमेटी के सदस्य मनु गौड़ ने उत्तर प्रदेश में यूसीसी लागू करने की कवायद को 'अच्छी बात' बताया है। गुजरात पहले ही राष्ट्रपति की मंजूरी पा चुका है। दोनों राज्यों में एकसमान कानून से बहुविवाह जैसी खामियाँ बंद होंगी, यह ऐसे वक़्त में आया है जब पूरे देश में यूसीसी की बहस नई रफ़्तार पकड़ रही है।

मुख्य बातें

उत्तराखंड यूसीसी ड्राफ्ट कमेटी के सदस्य मनु गौड़ ने उत्तर प्रदेश में यूसीसी लागू करने की पहल को सकारात्मक बताया।
उत्तराखंड में यूसीसी लागू हुए करीब पौने दो साल हो चुके हैं; गुजरात को भी राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है।
दोनों राज्यों में यूसीसी लागू होने से बहुविवाह और दोहरे कानूनी लाभ उठाने की स्थितियों पर अंकुश लगेगा।
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के ज़रिए दोनों राज्यों की मतदाता सूचियों में दोहरी प्रविष्टियाँ हटाई जा रही हैं।
मनु गौड़ ने उत्तर प्रदेश को मदरसा शिक्षा सुधार में भी उत्तराखंड के मॉडल को अपनाने की सलाह दी।

उत्तराखंड यूसीसी ड्राफ्ट कमेटी के सदस्य मनु गौड़ ने 30 अक्टूबर 2026 को कहा कि उत्तर प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में उठाया जा रहा कदम एक सकारात्मक पहल है। उनकी यह प्रतिक्रिया केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान के संदर्भ में आई, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश में यूसीसी लागू करने की संभावना का संकेत दिया था।

उत्तराखंड का अनुभव और अन्य राज्यों पर असर

मनु गौड़ ने कहा कि उत्तराखंड में यूसीसी लागू हुए करीब पौने दो साल हो चुके हैं और अब देश के अन्य राज्य भी इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि गुजरात में भी यूसीसी को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है और नियम तैयार होने के बाद वहाँ भी इसे लागू किया जाएगा।

गौरतलब है कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य था जिसने यूसीसी को विधायी रूप से लागू किया। उसके बाद से यह नीतिगत चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर तेज़ हुई है।

दोनों राज्यों के सामाजिक संबंध और कानूनी एकरूपता

मनु गौड़ ने बताया कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच पुराने सामाजिक और पारिवारिक संबंध हैं। राज्य गठन के बाद भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई लोग उत्तराखंड में निवास करते हैं, और ऐसे अनेक परिवारों के दोनों राज्यों में आवास हैं।

उन्होंने बताया कि कुछ लोग दोनों राज्यों की मतदाता सूचियों में दर्ज रहे हैं, जिन्हें विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के माध्यम से हटाया जा रहा है। उनके अनुसार, यदि दोनों राज्यों में यूसीसी एक साथ लागू होता है, तो नागरिकों को समान कानूनी व्यवस्था का लाभ मिलेगा।

बहुविवाह पर रोक और कानूनी खामियों को बंद करने की ज़रूरत

उत्तराखंड में यूसीसी के तहत बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाया गया है। मनु गौड़ ने कहा कि पहले कुछ लोग दोनों राज्यों से जुड़े होने के कारण अलग-अलग कानूनों का लाभ उठाने की कोशिश कर सकते थे। दोनों राज्यों में एक समान नियम लागू होने से ऐसी स्थितियों को रोकने में सहायता मिलेगी।

मदरसा शिक्षा सुधार: उत्तराखंड मॉडल अपनाने की सलाह

मनु गौड़ ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में भी उत्तराखंड की व्यवस्था से सबक लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा बोर्ड को समाप्त कर नई शिक्षा नीति के अनुरूप व्यवस्था लागू की गई है, जिसका उद्देश्य मुस्लिम समाज के बच्चों को आधुनिक शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना है।

उन्होंने कहा कि देश में पंजीकृत मदरसों की बड़ी संख्या उत्तर प्रदेश में है। जिस तरह उत्तर प्रदेश यूसीसी के मामले में उत्तराखंड की तर्ज पर विचार कर रहा है, उसी तरह मदरसा शिक्षा व्यवस्था में भी उत्तराखंड के मॉडल पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर धर्मनिरपेक्ष शिक्षा प्रणाली को लेकर बहस तेज़ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह एक खंडित कानूनी परिदृश्य बनाएगा जब तक केंद्रीय स्तर पर समान कानून न आए? उत्तराखंड का अनुभव सकारात्मक बताया जा रहा है, लेकिन इसके क्रियान्वयन के स्वतंत्र मूल्यांकन सार्वजनिक डोमेन में बेहद सीमित हैं। मदरसा शिक्षा बोर्ड को समाप्त करने के फैसले को 'आधुनिक शिक्षा' के नाम पर एकतरफा तरीके से पेश किया जाना, उन समुदायों की आपत्तियों को नज़रअंदाज करता है जिनकी राय इस बहस में शामिल होनी चाहिए। असली परीक्षा यह होगी कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और विविधताभरे राज्य में यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया कितनी परामर्शकारी और पारदर्शी रहती है।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में यूसीसी लागू करने को लेकर मनु गौड़ ने क्या कहा?
उत्तराखंड यूसीसी ड्राफ्ट कमेटी के सदस्य मनु गौड़ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में यूसीसी लागू करने की दिशा में पहल होना एक सकारात्मक और सराहनीय कदम है। उन्होंने इसे उत्तराखंड के अनुभव का स्वाभाविक विस्तार बताया।
अभी तक भारत के किन राज्यों में यूसीसी लागू है या मंजूरी मिल चुकी है?
उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहाँ यूसीसी लागू हुए करीब पौने दो साल हो चुके हैं। गुजरात में भी यूसीसी को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है और नियम तैयार होने के बाद इसे लागू किया जाएगा। उत्तर प्रदेश में इसे लेकर विचार-विमर्श शुरू होने की बात कही जा रही है।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों में यूसीसी लागू होने से क्या फायदा होगा?
मनु गौड़ के अनुसार, दोनों राज्यों में समान कानून लागू होने से बहुविवाह जैसी प्रतिबंधित प्रथाओं पर अंकुश लगेगा। पहले कुछ लोग दोनों राज्यों से जुड़े होने के कारण अलग-अलग कानूनों का लाभ उठाने की कोशिश कर सकते थे, जो एकसमान व्यवस्था से बंद होगा।
उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा बोर्ड के बारे में क्या बदलाव हुआ?
उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा बोर्ड को समाप्त कर नई शिक्षा नीति के अनुरूप व्यवस्था लागू की गई है। इसका उद्देश्य मुस्लिम समाज के बच्चों को आधुनिक शिक्षा के अवसर देना बताया गया है, ताकि वे डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस और आईपीएस जैसे क्षेत्रों में करियर बना सकें।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यूपी में यूसीसी को लेकर क्या कहा था?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश में यूसीसी लागू करने की संभावना का संकेत दिया था, जिसके बाद उत्तराखंड यूसीसी ड्राफ्ट कमेटी के सदस्य मनु गौड़ समेत कई लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएँ दी हैं। शाह के बयान का विस्तृत ब्यौरा अभी सामने आना बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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