नाबालिगों को शराब परोसी तो लाइसेंस रद्द: केरल आबकारी मंत्री एम. लिजू की बार मालिकों को सख्त चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
केरल के आबकारी मंत्री एम. लिजू ने 30 अक्टूबर 2026 को राज्य के सभी बार संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 23 वर्ष से कम आयु के किसी भी ग्राहक को शराब परोसने पर उनके प्रतिष्ठान का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। मंत्री ने कहा कि ग्राहक की उम्र सत्यापित करना बार लाइसेंस धारकों की कानूनी जिम्मेदारी है, न कि विवेकाधीन प्रक्रिया।
मंत्री का स्पष्ट निर्देश
लिजू ने कहा, 'शराब का सेवन करने का अधिकार केवल उन लोगों को है जिन्होंने कानूनी रूप से निर्धारित 23 वर्ष की आयु पूरी कर ली है। जो ग्राहक इस सीमा से कम उम्र के प्रतीत होते हैं, उनकी उम्र की जांच करना पूरी तरह बार संचालकों की जिम्मेदारी है।' उन्होंने निर्देश दिया कि उम्र को लेकर किसी भी संदेह की स्थिति में आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान पत्र के माध्यम से आयु का सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाए।
मंत्री ने यह भी बताया कि आबकारी विभाग की ओर से आकस्मिक निरीक्षण (सरप्राइज चेकिंग) लगातार जारी रहेगी। उन्होंने बार उद्योग को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि शराब परोसना भले ही व्यवसाय हो, लेकिन ग्राहक की उम्र की जांच ऐसी जिम्मेदारी है जिसे किसी और पर नहीं छोड़ा जा सकता।
नेदुम्बास्सेरी हादसे से मिला सबक
यह निर्देश हाल में नेदुम्बास्सेरी में हुई मिनी कूपर कार दुर्घटना की पृष्ठभूमि में आया है, जिसने उम्र संबंधी नियमों के उल्लंघन के गंभीर परिणामों को उजागर किया। लिजू ने बताया कि आबकारी विभाग उन प्रतिष्ठानों के खिलाफ पहले ही कार्रवाई कर चुका है, जहाँ से उस दुर्घटना मामले के नाबालिग आरोपियों को कथित तौर पर शराब परोसे जाने की बात सामने आई थी।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब केरल में नाबालिगों को शराब परोसने की घटनाएँ सामने आई हों, लेकिन मंत्री के अनुसार इस बार कानून लागू करने में किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
केरल की शराब अर्थव्यवस्था का आकार
यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब शराब बिक्री केरल सरकार के लिए राजस्व का एक प्रमुख स्रोत बनी हुई है। केरल राज्य बेवरेजेज कॉर्पोरेशन (बेवको) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में निगम के माध्यम से शराब और बीयर की बिक्री ₹21,130.78 करोड़ तक पहुँच गई, जो पिछले वित्त वर्ष के ₹19,732.82 करोड़ से अधिक है।
इसी अवधि में कर और अन्य शुल्कों के रूप में राज्य सरकार को निगम का योगदान बढ़कर ₹18,675.71 करोड़ हो गया, जबकि 2024-25 में यह ₹17,221.15 करोड़ था। मंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी शराब अर्थव्यवस्था के बीच सरकार चाहती है कि ग्राहकों की उम्र की जांच भी बिल बनाने जितनी नियमित प्रक्रिया बन जाए।
नई आबकारी नीति नवंबर से लागू होगी
लिजू ने यह भी बताया कि यूडीएफ सरकार की नई आबकारी नीति नवंबर 2026 से लागू होगी, जो पिछली एलडीएफ सरकार की नीति से अलग होगी। इस नई नीति के प्रावधानों का ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन इसे राज्य की शराब नियामक व्यवस्था में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
आने वाले हफ्तों में आबकारी विभाग के औचक निरीक्षण अभियान की तीव्रता और नई नीति के क्रियान्वयन से स्पष्ट होगा कि सरकार की इस सख्त चेतावनी का ज़मीनी असर कितना पड़ता है।