30 अक्टूबर 2026
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नाबालिगों को शराब परोसी तो लाइसेंस रद्द: केरल आबकारी मंत्री एम. लिजू की बार मालिकों को सख्त चेतावनी

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नाबालिगों को शराब परोसी तो लाइसेंस रद्द: केरल आबकारी मंत्री एम. लिजू की बार मालिकों को सख्त चेतावनी

सारांश

केरल में नाबालिगों को शराब परोसना अब बार मालिकों के लिए लाइसेंस खोने का सबब बनेगा। आबकारी मंत्री एम. लिजू ने नेदुम्बास्सेरी हादसे को चेतावनी बताते हुए 23 वर्ष से कम उम्र के ग्राहकों की पहचान अनिवार्य की। ₹21,130 करोड़ की शराब अर्थव्यवस्था के बीच जवाबदेही की यह माँग नवंबर में आने वाली नई आबकारी नीति से पहले आई है।

मुख्य बातें

लिजू ने 30 अक्टूबर 2026 को बार मालिकों को निर्देश दिया कि 23 वर्ष से कम उम्र के ग्राहकों को शराब न परोसें।
उम्र सत्यापन के लिए आधार कार्ड या वैध पहचान पत्र अनिवार्य; नियम तोड़ने पर लाइसेंस रद्द हो सकता है।
नेदुम्बास्सेरी मिनी कूपर दुर्घटना के मद्देनज़र संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ आबकारी विभाग पहले ही कार्रवाई कर चुका है।
बेवको के आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में शराब बिक्री ₹21,130.78 करोड़ ; राज्य को कर योगदान ₹18,675.71 करोड़ ।
यूडीएफ सरकार की नई आबकारी नीति नवंबर 2026 से लागू होगी।

केरल के आबकारी मंत्री एम. लिजू ने 30 अक्टूबर 2026 को राज्य के सभी बार संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 23 वर्ष से कम आयु के किसी भी ग्राहक को शराब परोसने पर उनके प्रतिष्ठान का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। मंत्री ने कहा कि ग्राहक की उम्र सत्यापित करना बार लाइसेंस धारकों की कानूनी जिम्मेदारी है, न कि विवेकाधीन प्रक्रिया।

मंत्री का स्पष्ट निर्देश

लिजू ने कहा, 'शराब का सेवन करने का अधिकार केवल उन लोगों को है जिन्होंने कानूनी रूप से निर्धारित 23 वर्ष की आयु पूरी कर ली है। जो ग्राहक इस सीमा से कम उम्र के प्रतीत होते हैं, उनकी उम्र की जांच करना पूरी तरह बार संचालकों की जिम्मेदारी है।' उन्होंने निर्देश दिया कि उम्र को लेकर किसी भी संदेह की स्थिति में आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान पत्र के माध्यम से आयु का सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाए।

मंत्री ने यह भी बताया कि आबकारी विभाग की ओर से आकस्मिक निरीक्षण (सरप्राइज चेकिंग) लगातार जारी रहेगी। उन्होंने बार उद्योग को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि शराब परोसना भले ही व्यवसाय हो, लेकिन ग्राहक की उम्र की जांच ऐसी जिम्मेदारी है जिसे किसी और पर नहीं छोड़ा जा सकता।

नेदुम्बास्सेरी हादसे से मिला सबक

यह निर्देश हाल में नेदुम्बास्सेरी में हुई मिनी कूपर कार दुर्घटना की पृष्ठभूमि में आया है, जिसने उम्र संबंधी नियमों के उल्लंघन के गंभीर परिणामों को उजागर किया। लिजू ने बताया कि आबकारी विभाग उन प्रतिष्ठानों के खिलाफ पहले ही कार्रवाई कर चुका है, जहाँ से उस दुर्घटना मामले के नाबालिग आरोपियों को कथित तौर पर शराब परोसे जाने की बात सामने आई थी।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब केरल में नाबालिगों को शराब परोसने की घटनाएँ सामने आई हों, लेकिन मंत्री के अनुसार इस बार कानून लागू करने में किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

केरल की शराब अर्थव्यवस्था का आकार

यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब शराब बिक्री केरल सरकार के लिए राजस्व का एक प्रमुख स्रोत बनी हुई है। केरल राज्य बेवरेजेज कॉर्पोरेशन (बेवको) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में निगम के माध्यम से शराब और बीयर की बिक्री ₹21,130.78 करोड़ तक पहुँच गई, जो पिछले वित्त वर्ष के ₹19,732.82 करोड़ से अधिक है।

इसी अवधि में कर और अन्य शुल्कों के रूप में राज्य सरकार को निगम का योगदान बढ़कर ₹18,675.71 करोड़ हो गया, जबकि 2024-25 में यह ₹17,221.15 करोड़ था। मंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी शराब अर्थव्यवस्था के बीच सरकार चाहती है कि ग्राहकों की उम्र की जांच भी बिल बनाने जितनी नियमित प्रक्रिया बन जाए।

नई आबकारी नीति नवंबर से लागू होगी

लिजू ने यह भी बताया कि यूडीएफ सरकार की नई आबकारी नीति नवंबर 2026 से लागू होगी, जो पिछली एलडीएफ सरकार की नीति से अलग होगी। इस नई नीति के प्रावधानों का ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन इसे राज्य की शराब नियामक व्यवस्था में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

आने वाले हफ्तों में आबकारी विभाग के औचक निरीक्षण अभियान की तीव्रता और नई नीति के क्रियान्वयन से स्पष्ट होगा कि सरकार की इस सख्त चेतावनी का ज़मीनी असर कितना पड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ से अधिक आते हैं — यह राजस्व निर्भरता और नाबालिगों की सुरक्षा के बीच का तनाव ही असली मुद्दा है, जिसे मंत्री लिजू की घोषणा पूरी तरह संबोधित नहीं करती। उम्र सत्यापन की जिम्मेदारी बार मालिकों पर डालना तार्किक है, लेकिन बिना नियमित और पारदर्शी निरीक्षण तंत्र के यह निर्देश महज़ कागज़ी रहेगा। नेदुम्बास्सेरी जैसी घटनाएँ बार-बार सामने आती हैं, फिर भी प्रणालीगत सुधार की बजाय प्रतिक्रियावादी कार्रवाई का चक्र जारी है। नई आबकारी नीति में यदि स्वतंत्र सत्यापन और दंड का स्पष्ट ढाँचा नहीं बना, तो यह घोषणा भी उसी सूची में जुड़ जाएगी जो हादसों के बाद होती है और अगले हादसे से पहले भुला दी जाती है।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में शराब पीने की कानूनी उम्र क्या है?
केरल में शराब पीने की कानूनी न्यूनतम आयु 23 वर्ष है। यह देश के अधिकांश राज्यों से अधिक है और आबकारी मंत्री एम. लिजू ने स्पष्ट किया है कि इस सीमा का कड़ाई से पालन करना बार संचालकों की अनिवार्य जिम्मेदारी है।
बार मालिकों को नाबालिगों को शराब परोसने पर क्या सजा मिलेगी?
आबकारी मंत्री के अनुसार 23 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को शराब परोसने पर बार का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। इसके अलावा आबकारी विभाग अन्य कानूनी कार्रवाई भी कर सकता है; समझौते की कोई गुंजाइश नहीं होगी।
नेदुम्बास्सेरी कार दुर्घटना का इस निर्देश से क्या संबंध है?
हाल में नेदुम्बास्सेरी में हुई मिनी कूपर कार दुर्घटना के नाबालिग आरोपियों को कुछ बार प्रतिष्ठानों से शराब परोसे जाने की बात सामने आई थी। इस हादसे के बाद आबकारी विभाग ने संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की और मंत्री ने इसे राज्यव्यापी निर्देश का आधार बनाया।
केरल की नई आबकारी नीति कब से लागू होगी?
यूडीएफ सरकार की नई आबकारी नीति नवंबर 2026 से लागू होने की घोषणा की गई है। मंत्री लिजू के अनुसार यह पिछली एलडीएफ सरकार की नीति से अलग होगी, हालाँकि अभी तक इसके विस्तृत प्रावधान सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
केरल में शराब बिक्री से सरकार को कितना राजस्व मिलता है?
बेवको के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में केरल में शराब और बीयर की बिक्री ₹21,130.78 करोड़ रही, जबकि राज्य सरकार को कर और शुल्क के रूप में निगम का योगदान ₹18,675.71 करोड़ रहा — जो पिछले वित्त वर्ष से उल्लेखनीय रूप से अधिक है।
राष्ट्र प्रेस
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