नाबालिगों को शराब परोसने पर 'जीरो टॉलरेंस': प्रियंक खड़गे ने बेंगलुरु पुलिस को दिए सख्त निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खड़गे ने 8 जून 2026 को बेंगलुरु पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य के सभी पब, बार, ब्रुअरी, क्लब, लाउंज और रेस्तरां को नोटिस जारी किए जाएँ और नाबालिगों के प्रवेश तथा शराब सेवन पर तत्काल रोक सुनिश्चित की जाए। यह कदम बेंगलुरु के 4,093 छात्रों पर किए गए एक हालिया अध्ययन के बाद आया है, जिसमें सामने आया कि हर तीन में से एक किशोर शराब या तंबाकू के सेवन के कारण स्वास्थ्य जोखिमों का सामना कर रहा है।
मुख्य निर्देश और नियम
मंत्री खड़गे ने स्पष्ट किया कि सभी प्रतिष्ठानों में 'नो आईडी, नो एंट्री' नियम का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होगा। प्रवेश के समय और शराब परोसने से पहले सरकारी पहचान पत्र के ज़रिए आयु सत्यापन की व्यवस्था लागू करनी होगी। नाबालिगों को शराब परोसने पर प्रतिष्ठान के मालिक, प्रबंधक और लाइसेंस धारक सीधे जिम्मेदार ठहराए जाएँगे और उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा, प्रवेश द्वार पर लगे सीसीटीवी कैमरों का हर समय चालू रहना और फुटेज को सुरक्षित रखना भी अनिवार्य किया गया है। पुलिस को शैक्षणिक संस्थानों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA) और नागरिक समूहों के साथ समन्वय बढ़ाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
अध्ययन के चौंकाने वाले आँकड़े
बेंगलुरु के 4,093 छात्रों पर किए गए अध्ययन ने किशोरों में मादक पदार्थों के सेवन की गंभीर तस्वीर पेश की है। अध्ययन के अनुसार, लगभग 33 प्रतिशत छात्रों ने शराब सेवन की बात स्वीकार की, जबकि करीब 18 प्रतिशत ने तंबाकू की लत होने की जानकारी दी। सबसे चिंताजनक तथ्य यह सामने आया कि शराब पीना शुरू करने की औसत आयु 17 वर्ष है, और कुछ मामलों में यह उम्र केवल 8 वर्ष तक पाई गई।
सरकार का रुख: व्यावसायिक लाभ से ऊपर बच्चों की सुरक्षा
मंत्री खड़गे ने कहा कि यह केवल लाइसेंसिंग का विषय नहीं, बल्कि युवाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'व्यावसायिक लाभ बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य की कीमत पर नहीं हो सकता।' कर्नाटक सरकार ने नाबालिगों को शराब उपलब्ध कराने या ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाने की घोषणा की है।
आगे क्या होगा
पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे शहर के सभी शराब परोसने वाले प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी करें और अनुपालन की निगरानी करें। यह अभियान बेंगलुरु से शुरू होकर राज्यभर में विस्तारित होने की संभावना है। गौरतलब है कि यह कदम ऐसे समय में आया है जब देश के कई महानगरों में किशोरों में शराब और नशीले पदार्थों के सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई जा रही है।