24 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नाबालिगों को शराब परोसने पर 'जीरो टॉलरेंस': प्रियंक खड़गे ने बेंगलुरु पुलिस को दिए सख्त निर्देश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नाबालिगों को शराब परोसने पर 'जीरो टॉलरेंस': प्रियंक खड़गे ने बेंगलुरु पुलिस को दिए सख्त निर्देश

सारांश

बेंगलुरु के 4,093 छात्रों के अध्ययन में 33% ने शराब सेवन स्वीकारा और शुरुआत की औसत उम्र महज 17 साल — इस चौंकाने वाले डेटा के बाद कर्नाटक मंत्री प्रियंक खड़गे ने पुलिस को सख्त निर्देश दिए: सभी बार-पब में 'नो आईडी, नो एंट्री' और नाबालिगों पर 'जीरो टॉलरेंस'।

मुख्य बातें

कर्नाटक मंत्री प्रियंक खड़गे ने 8 जून 2026 को बेंगलुरु पुलिस को सभी शराब प्रतिष्ठानों में नाबालिगों पर रोक के सख्त निर्देश दिए।
4,093 छात्रों के अध्ययन में 33% ने शराब और 18% ने तंबाकू सेवन स्वीकार किया।
शराब पीना शुरू करने की औसत आयु 17 वर्ष ; कुछ मामलों में यह उम्र 8 वर्ष तक पाई गई।
सभी प्रतिष्ठानों में 'नो आईडी, नो एंट्री' और प्रवेश द्वार पर सीसीटीवी अनिवार्य किया गया।
उल्लंघन पर मालिक, प्रबंधक और लाइसेंस धारक सीधे जिम्मेदार होंगे; 'जीरो टॉलरेंस' नीति लागू।

कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खड़गे ने 8 जून 2026 को बेंगलुरु पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य के सभी पब, बार, ब्रुअरी, क्लब, लाउंज और रेस्तरां को नोटिस जारी किए जाएँ और नाबालिगों के प्रवेश तथा शराब सेवन पर तत्काल रोक सुनिश्चित की जाए। यह कदम बेंगलुरु के 4,093 छात्रों पर किए गए एक हालिया अध्ययन के बाद आया है, जिसमें सामने आया कि हर तीन में से एक किशोर शराब या तंबाकू के सेवन के कारण स्वास्थ्य जोखिमों का सामना कर रहा है।

मुख्य निर्देश और नियम

मंत्री खड़गे ने स्पष्ट किया कि सभी प्रतिष्ठानों में 'नो आईडी, नो एंट्री' नियम का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होगा। प्रवेश के समय और शराब परोसने से पहले सरकारी पहचान पत्र के ज़रिए आयु सत्यापन की व्यवस्था लागू करनी होगी। नाबालिगों को शराब परोसने पर प्रतिष्ठान के मालिक, प्रबंधक और लाइसेंस धारक सीधे जिम्मेदार ठहराए जाएँगे और उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा, प्रवेश द्वार पर लगे सीसीटीवी कैमरों का हर समय चालू रहना और फुटेज को सुरक्षित रखना भी अनिवार्य किया गया है। पुलिस को शैक्षणिक संस्थानों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA) और नागरिक समूहों के साथ समन्वय बढ़ाने के भी निर्देश दिए गए हैं।

अध्ययन के चौंकाने वाले आँकड़े

बेंगलुरु के 4,093 छात्रों पर किए गए अध्ययन ने किशोरों में मादक पदार्थों के सेवन की गंभीर तस्वीर पेश की है। अध्ययन के अनुसार, लगभग 33 प्रतिशत छात्रों ने शराब सेवन की बात स्वीकार की, जबकि करीब 18 प्रतिशत ने तंबाकू की लत होने की जानकारी दी। सबसे चिंताजनक तथ्य यह सामने आया कि शराब पीना शुरू करने की औसत आयु 17 वर्ष है, और कुछ मामलों में यह उम्र केवल 8 वर्ष तक पाई गई।

सरकार का रुख: व्यावसायिक लाभ से ऊपर बच्चों की सुरक्षा

मंत्री खड़गे ने कहा कि यह केवल लाइसेंसिंग का विषय नहीं, बल्कि युवाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'व्यावसायिक लाभ बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य की कीमत पर नहीं हो सकता।' कर्नाटक सरकार ने नाबालिगों को शराब उपलब्ध कराने या ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाने की घोषणा की है।

आगे क्या होगा

पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे शहर के सभी शराब परोसने वाले प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी करें और अनुपालन की निगरानी करें। यह अभियान बेंगलुरु से शुरू होकर राज्यभर में विस्तारित होने की संभावना है। गौरतलब है कि यह कदम ऐसे समय में आया है जब देश के कई महानगरों में किशोरों में शराब और नशीले पदार्थों के सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि क्या नोटिस और सीसीटीवी जैसे उपाय पर्याप्त हैं। बेंगलुरु के नाइटलाइफ उद्योग में आयु सत्यापन की खामियाँ वर्षों से ज्ञात हैं, और पिछली घोषणाओं का क्रियान्वयन अक्सर कमज़ोर रहा है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या पुलिस अनुपालन की नियमित जाँच करेगी और उल्लंघन पर लाइसेंस रद्द होंगे — या यह अभियान कुछ हफ्तों में ठंडा पड़ जाएगा। बच्चों की सुरक्षा के लिए घोषणा ज़रूरी है, पर जवाबदेही का ढाँचा उससे भी ज़रूरी है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियंक खड़गे ने बेंगलुरु में नाबालिगों और शराब को लेकर क्या निर्देश दिए हैं?
मंत्री प्रियंक खड़गे ने बेंगलुरु पुलिस को निर्देश दिया है कि सभी पब, बार, क्लब और रेस्तरां को नोटिस जारी किए जाएँ और 'नो आईडी, नो एंट्री' नियम सख्ती से लागू किया जाए। नाबालिगों को शराब परोसने पर प्रतिष्ठान मालिक, प्रबंधक और लाइसेंस धारक सीधे जिम्मेदार होंगे।
बेंगलुरु के छात्रों पर हुए अध्ययन में क्या सामने आया?
4,093 छात्रों पर किए गए अध्ययन में लगभग 33 प्रतिशत ने शराब सेवन और 18 प्रतिशत ने तंबाकू की लत स्वीकार की। शराब पीना शुरू करने की औसत आयु 17 वर्ष पाई गई, जबकि कुछ मामलों में यह उम्र केवल 8 वर्ष थी।
'नो आईडी, नो एंट्री' नियम का पालन न करने पर क्या होगा?
नियम का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के मालिकों, प्रबंधकों और लाइसेंस धारकों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कर्नाटक सरकार ने इस मामले में 'जीरो टॉलरेंस' नीति की घोषणा की है।
शराब प्रतिष्ठानों के लिए सीसीटीवी संबंधी क्या नियम बनाए गए हैं?
सभी शराब परोसने वाले प्रतिष्ठानों में प्रवेश द्वार पर सीसीटीवी कैमरों का हर समय चालू रहना और फुटेज को सुरक्षित रखना अनिवार्य किया गया है। यह व्यवस्था नाबालिगों के प्रवेश की निगरानी और साक्ष्य संग्रह के लिए ज़रूरी मानी गई है।
कर्नाटक सरकार ने यह कदम क्यों उठाया?
बेंगलुरु के छात्रों पर हुए अध्ययन में किशोरों में शराब और तंबाकू सेवन की चिंताजनक दर सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया। मंत्री खड़गे ने इसे लाइसेंसिंग नहीं, बल्कि युवाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य का गंभीर मुद्दा बताया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 घंटे पहले
  2. 6 दिन पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले