बेंगलुरु नाबालिग अपहरण-दुष्कर्म: NCW ने कर्नाटक DGP से 7 दिन में माँगी रिपोर्ट, पीड़िता को न्याय का आश्वासन
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने बेंगलुरु में 14 वर्षीय नाबालिग लड़की के अपहरण, जबरन नशीला पदार्थ पिलाने और दुष्कर्म के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक (DGP) से 7 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) तलब की है। आयोग ने इस घटना को नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती करार देते हुए तत्काल और निष्पक्ष जाँच की माँग की है।
आयोग की अध्यक्ष का हस्तक्षेप
NCW की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कर्नाटक के DGP को पत्र लिखकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जाँच तेज़, पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से होनी चाहिए। साथ ही, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत शीघ्र विस्तृत आरोपपत्र दाखिल करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
साक्ष्य संग्रह पर विशेष जोर
आयोग ने जाँच एजेंसियों को निर्देश दिया है कि फोरेंसिक, मेडिकल और डिजिटल साक्ष्यों को पूरी सावधानी और वैज्ञानिक पद्धति से एकत्र किया जाए, ताकि किसी भी महत्वपूर्ण सबूत की अनदेखी न हो। यह निर्देश इसलिए भी अहम है क्योंकि ऐसे मामलों में साक्ष्य-संरक्षण की कमी अक्सर न्याय प्रक्रिया को बाधित करती है।
पीड़िता और परिवार के लिए सहायता
NCW ने कर्नाटक पुलिस को पीड़ित बच्ची और उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं। आयोग ने माँग की है कि पीड़िता को मुआवज़ा, कानूनी सहायता और मनोवैज्ञानिक परामर्श तत्काल उपलब्ध कराया जाए। यह ऐसे समय में आया है जब बाल यौन शोषण के मामलों में पीड़ित पुनर्वास को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है।
भविष्य की रोकथाम पर ध्यान
आयोग ने संवेदनशील और कमज़ोर क्षेत्रों में पुलिस की निगरानी बढ़ाने पर भी ज़ोर दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। NCW ने स्पष्ट किया है कि वह इस पूरे मामले की सतत निगरानी करेगा और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने तक सक्रिय रहेगा।
हेल्पलाइन और आगे की कार्रवाई
आयोग ने महिलाओं और बच्चों से जुड़ी शिकायतों के लिए NCW हेल्पलाइन नंबर 14490 की जानकारी भी साझा की है। कर्नाटक पुलिस से अपेक्षा है कि वह 7 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट आयोग को सौंपे। इस मामले का परिणाम राज्य में नाबालिगों की सुरक्षा व्यवस्था की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।