पुणे नाबालिग दुष्कर्म-हत्या: NCW ने लिया स्वतः संज्ञान, POCSO के तहत फास्ट ट्रैक सुनवाई की माँग
सारांश
Key Takeaways
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने महाराष्ट्र के पुणे ज़िले के नासरापुर में 1 मई 2026 को एक नाबालिग बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या की घटना पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) से तत्काल जाँच की निगरानी करने और दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस कृत्य को 'मानवता पर कलंक' बताते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई का आश्वासन दिया है।
घटनाक्रम: कैसे हुई यह वारदात
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पीड़िता गर्मी की छुट्टियों में नासरापुर में अपनी नानी के घर आई हुई थी। 1 मई को दोपहर लगभग 3:30 बजे एक 65 वर्षीय आरोपी ने उसे बछड़ा दिखाने का प्रलोभन देकर घर से अपने साथ ले गया। वह उसे पास की गौशाला में ले गया, जहाँ उसने उसके साथ दुष्कर्म किया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी ने पीड़िता को चुप कराने के इरादे से उसकी हत्या कर दी और शव को गोबर के ढेर के नीचे छिपा दिया। जब बच्ची घर नहीं लौटी तो परिजनों ने तलाश शुरू की। स्थानीय CCTV फुटेज में संदिग्ध को बच्ची को गौशाला की ओर ले जाते देखा गया, जिसके बाद घटनास्थल से शव बरामद किया गया।
गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई
पुणे ग्रामीण पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। अदालत ने उसे 7 मई 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इस घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में तनाव फैल गया और ग्रामीणों ने पुलिस को घेरकर तत्काल कार्रवाई की माँग की।
गौरतलब है कि यह मामला POCSO अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है, जो नाबालिगों के विरुद्ध यौन अपराधों में कड़ी सज़ा का प्रावधान करता है। पुलिस सूत्रों ने संकेत दिया है कि जाँच तेज़ी से आगे बढ़ रही है।
NCW और NCPCR की भूमिका
NCW अध्यक्ष विजया रहाटकर ने आयोग की ओर से इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ऐसे अपराध बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन हैं और समाज की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं। आयोग ने NCPCR से तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — पीड़ित परिवार को त्वरित सहायता एवं मुआवज़ा, POCSO के तहत समयबद्ध चार्जशीट दाखिल करना, और फास्ट ट्रैक कोर्ट में शीघ्र सुनवाई।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में नाबालिगों के विरुद्ध अपराधों की बढ़ती संख्या को लेकर बाल सुरक्षा तंत्र की प्रभावशीलता पर बहस तेज़ हो रही है।
सरकार की प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस घटना की कड़ी निंदा की और इसे 'मानवता पर कलंक' बताया। उन्होंने पुणे ग्रामीण पुलिस को पुख्ता जाँच के निर्देश दिए और घोषणा की कि मुकदमे की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। राज्य सरकार के इस कदम को बाल सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, हालाँकि आलोचकों का कहना है कि ऐसी प्रतिक्रियाएँ अक्सर घटना के बाद ही आती हैं।
आगे क्या होगा
मामले में 7 मई 2026 को अदालत में अगली सुनवाई होनी है। NCPCR की जाँच निगरानी और NCW की सक्रियता के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर बाल सुरक्षा कानूनों के क्रियान्वयन की कसौटी बन सकता है। न्याय की माँग कर रहे परिजनों और स्थानीय समुदाय की निगाहें अब फास्ट ट्रैक कोर्ट की कार्यवाही पर टिकी हैं।