काशी विश्वनाथ की विक्रमादित्य वैदिक घड़ी: PM मोदी की यात्रा के बाद 78 लाख लोगों ने देखा

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काशी विश्वनाथ की विक्रमादित्य वैदिक घड़ी: PM मोदी की यात्रा के बाद 78 लाख लोगों ने देखा

सारांश

PM मोदी की एक यात्रा ने काशी विश्वनाथ धाम में स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को वैश्विक मंच पर पहुँचा दिया — 78 लाख से अधिक दर्शक, ट्विटर पर नंबर-1 ट्रेंड, और अब देशभर के प्रमुख ज्योतिर्लिंग स्थलों व अयोध्या राम मंदिर तक इसे ले जाने की योजना। प्राचीन भारतीय समय-प्रणाली की यह डिजिटल पुनर्प्रस्तुति विरासत और तकनीक के मेल की मिसाल बन गई है।

Key Takeaways

PM नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल को काशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का अवलोकन किया और इसे "प्राचीन ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण का शानदार संगम" बताया। विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्मों पर 78 लाख से अधिक लोगों ने इस कार्यक्रम को देखा; हैशटैग #विक्रमोत्सव_वाराणसी भारत में नंबर-1 ट्रेंड रहा। वैदिक घड़ी उज्जैन के महाराजा विक्रमादित्य अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित है; मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट किया और 4 अप्रैल को मंदिर परिसर में स्थापित किया गया। घड़ी 30 घंटे के सूर्योदय-आधारित चक्र, 30 मुहूर्तों , तिथि, नक्षत्र, योग, करण और ग्रहों की स्थिति प्रदर्शित करती है। संबद्ध मोबाइल ऐप 189 से अधिक भाषाओं में उपलब्ध है और 7,000 वर्षों के पंचांग की जानकारी देता है। भविष्य में प्रमुख ज्योतिर्लिंग स्थलों और अयोध्या राम मंदिर में भी इसी तरह की वैदिक घड़ियाँ स्थापित करने की योजना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 29 अप्रैल को वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ धाम की यात्रा ने विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। मोदी ने दर्शन-पूजन के बाद इस घड़ी का अवलोकन किया और इसे

Point of View

परंतु असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह पहल केवल एक वायरल क्षण बनकर रह जाती है या वैदिक खगोलशास्त्र को शैक्षणिक और वैज्ञानिक संवाद में स्थायी स्थान दिला पाती है। देशभर के धार्मिक स्थलों पर विस्तार की योजना महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसके साथ यह सवाल भी उठता है कि क्या इन घड़ियों की शैक्षणिक व्याख्या के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित मानव-संसाधन और सामग्री तैयार की जा रही है।
NationPress
02/05/2026

Frequently Asked Questions

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी क्या है और यह सामान्य घड़ी से कैसे अलग है?
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी उज्जैन के महाराजा विक्रमादित्य अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित एक विशेष कालमापक यंत्र है जो सूर्योदय-आधारित 30 घंटे के चक्र और 30 मुहूर्तों पर आधारित प्राचीन भारतीय समय-प्रणाली को प्रदर्शित करती है। यह तिथि, नक्षत्र, योग, करण और ग्रहों की स्थिति सहित विस्तृत पंचांग तत्व भी दिखाती है, जो सामान्य 12/24 घंटे की घड़ियों में नहीं होते।
काशी विश्वनाथ धाम में यह वैदिक घड़ी कब और कैसे स्थापित हुई?
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यह घड़ी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट की और इसे 4 अप्रैल को काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित किया गया। PM मोदी ने 29 अप्रैल को दर्शन के दौरान इसका अवलोकन किया, जिसके बाद यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई।
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का मोबाइल ऐप कहाँ से डाउनलोड करें और इसमें क्या सुविधाएँ हैं?
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का ऐप गूगल प्ले स्टोर और एप स्टोर दोनों पर उपलब्ध है। यह 189 से अधिक भाषाओं में उपलब्ध है और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय, शुभ-अशुभ मुहूर्त, महाभारत काल से वर्तमान तक 7,000 वर्षों का पंचांग डेटा और वैदिक समय-प्रणाली पर आधारित अलार्म सुविधा प्रदान करता है।
क्या अन्य धार्मिक स्थलों पर भी वैदिक घड़ी लगाने की योजना है?
मध्य प्रदेश सरकार के अधिकारियों के अनुसार, वाराणसी की सफलता के बाद देशभर के प्रमुख ज्योतिर्लिंग स्थलों और अयोध्या के राम मंदिर में भी इसी तरह की वैदिक घड़ियाँ स्थापित करने की योजना है। इसका उद्देश्य भारत की पारंपरिक ज्ञान परंपरा को व्यापक जनसमूह तक पहुँचाना है।
PM मोदी ने वैदिक घड़ी के बारे में क्या कहा?
PM मोदी ने 29 अप्रैल को काशी विश्वनाथ धाम में वैदिक घड़ी का अवलोकन करने के बाद इसे "प्राचीन ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण का शानदार संगम" बताया। उनके इस कथन के बाद डिजिटल प्लेटफार्मों पर व्यापक प्रतिक्रिया हुई और कुल मिलाकर 78 लाख से अधिक लोगों ने इससे संबंधित सामग्री देखी।
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