श्रीगंगानगर नाबालिग दुष्कर्म-तस्करी मामला: NCW ने 15 दिन में माँगी रिपोर्ट, 18 आरोपी गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने राजस्थान के श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और तस्करी के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक से 15 दिनों के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट तलब की है। आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर की अध्यक्षता में 8 जुलाई को आयोजित सुनवाई में अधिकारियों को त्वरित एवं निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए।
मुख्य घटनाक्रम
सुनवाई में श्रीगंगानगर के जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक, विशेष जाँच दल (SIT) प्रभारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और बाल कल्याण समिति के अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने आयोग को बताया कि अब तक इस मामले में 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें होटल संचालक, मैनेजर और अन्य व्यक्ति शामिल हैं जिन पर कथित तौर पर अपराध में संलिप्तता का आरोप है। आयोग ने शेष आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और निर्धारित समय-सीमा के भीतर आरोप-पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए।
प्रशासनिक विफलता पर आयोग की चिंता
आयोग ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि यह घटना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही, पुलिस व्यवस्था में कमी और निगरानी तंत्र की विफलता को उजागर करती है। विजया रहाटकर ने मामले में हुई चूकों पर गहरी चिंता जताई और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। आयोग ने यह भी रेखांकित किया कि नाबालिग पीड़िता को समय पर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत न किया जाना एक गंभीर चूक है, जिसकी अलग से जाँच होनी चाहिए।
अवैध होटलों पर कार्रवाई के आदेश
आयोग ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि जिले में बिना पंजीकरण के और अवैध रूप से संचालित हो रहे होटलों व अन्य प्रतिष्ठानों की पहचान कर 15 दिनों के भीतर उनके विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। नियमों का उल्लंघन करने वाले ऐसे संस्थानों को संरक्षण देने वाले जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही भी तय करने को कहा गया है। पुलिस अधीक्षक को स्थानीय गश्त और निगरानी प्रणाली में मौजूद खामियों की जाँच करने के भी निर्देश दिए गए।
पीड़िता के पुनर्वास पर जोर
बाल कल्याण समिति को पीड़िता की सुरक्षा, देखभाल और पुनर्वास सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आयोग ने जिला प्रशासन और समिति को पीड़िता को मिलने वाली आर्थिक सहायता, मुआवजे और पुनर्वास की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए। साथ ही पुलिस, चिकित्सा विभाग और फोरेंसिक टीम के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर जाँच को गति देने पर विशेष बल दिया गया।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह मामला बाल तस्करी और यौन शोषण की उस व्यापक समस्या की ओर ध्यान दिलाता है जो राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में समय-समय पर सामने आती रही है। NCW द्वारा 15 दिनों की समय-सीमा तय किए जाने के बाद अब सभी निगाहें जिला प्रशासन की रिपोर्ट और SIT की जाँच की प्रगति पर टिकी हैं। पीड़िता को न्याय दिलाने की यह प्रक्रिया राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही की असली परीक्षा होगी।