मध्य प्रदेश कैबिनेट का बड़ा फैसला: ग्रामीण भूमि पट्टों पर स्टांप शुल्क से पूरी छूट, स्वामित्व योजना को मिली रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार की कैबिनेट ने 8 जुलाई 2026 को भोपाल में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राज्य के ग्राम पंचायत क्षेत्रों में भूमि पट्टों पर लगने वाले स्टांप शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संचालित स्वामित्व योजना के अंतर्गत लिए गए इस फैसले से ग्रामीण भूस्वामियों को सीधी राहत मिलेगी। पंचायत क्षेत्रों में अतिरिक्त उपकर की राशि का वहन भी अब राज्य सरकार स्वयं करेगी।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी मंत्री चैतन्य काश्यप ने दी। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत क्षेत्रों में पट्टे के दस्तावेज़ीकरण पर अब कोई स्टांप शुल्क नहीं लिया जाएगा। यह कदम उन लाखों ग्रामीण परिवारों के लिए राहत लेकर आया है, जो अब तक पट्टा पंजीकरण की प्रक्रिया में लगने वाले शुल्क के कारण संपत्ति के कानूनी अधिकार से वंचित थे।
सरदार सरोवर विवाद का दशकों पुराना हल
कैबिनेट बैठक में एक और अहम उपलब्धि सामने आई — पिछले 30 से 40 वर्षों से लंबित अंतर्राज्यीय मुद्दों का समाधान। मंत्री काश्यप ने बताया कि गुजरात के सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े बहुप्रतीक्षित विवाद को अब सुलझा लिया गया है। समझौते के अनुसार परियोजना के 75 प्रतिशत व्यय का वहन गुजरात सरकार करेगी, जबकि मध्य प्रदेश सरकार अपने हिस्से के रूप में गुजरात को ₹217 करोड़ की राशि प्रदान करेगी। यह समझौता दोनों राज्यों के समन्वित विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।
ज्ञान भारतम योजना में मध्य प्रदेश अव्वल
केंद्र सरकार की ज्ञान भारतम योजना के अंतर्गत देशभर में पांडुलिपियों के संकलन, डिजिटलीकरण और संरक्षण के कार्य में मध्य प्रदेश ने देश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। राज्य में अब तक 34 लाख से अधिक पंजीयन किए जा चुके हैं, जिनमें से 12 लाख का सत्यापन पूर्ण हो चुका है। उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में टीकमगढ़ से 10 फीट लंबा जम्बूद्वीप का मानचित्र प्राप्त हुआ है, जिसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत दुर्लभ बताया जा रहा है।
आम जनता पर असर
स्टांप शुल्क छूट का सबसे बड़ा लाभ उन ग्रामीण परिवारों को मिलेगा जो स्वामित्व योजना के तहत पहली बार अपनी आवासीय भूमि का कानूनी पट्टा प्राप्त कर रहे हैं। पट्टा मिलने से ये परिवार बैंक ऋण के लिए पात्र बनेंगे और संपत्ति विवादों में कानूनी सुरक्षा पाएंगे। गौरतलब है कि ग्रामीण भूमि स्वामित्व की औपचारिकता भारत में वित्तीय समावेशन की एक बड़ी चुनौती रही है।
क्या होगा आगे
कैबिनेट के इन निर्णयों को अब क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों को भेजा जाएगा। सरदार सरोवर समझौते के तहत ₹217 करोड़ की राशि के हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि स्टांप शुल्क छूट की अधिसूचना जारी होने के बाद ग्राम पंचायत स्तर पर पट्टा वितरण में तेज़ी आने की उम्मीद है।