8 जुलाई 2026
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काशी विश्वनाथ मंदिर: काशीवासियों को अब पूरे दिन मिलेगा काशी द्वार से विशेष प्रवेश, CM योगी ने दी मंजूरी

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काशी विश्वनाथ मंदिर: काशीवासियों को अब पूरे दिन मिलेगा काशी द्वार से विशेष प्रवेश, CM योगी ने दी मंजूरी

सारांश

काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट ने काशीवासियों के लिए गेट 4बी से पूरे दिन विशेष प्रवेश की व्यवस्था लागू की है — सुबह 4:15 से रात 10:45 बजे तक। CM योगी की मंजूरी के बाद शुरू यह ट्रायल, 2024 की सीमित दर्शन व्यवस्था का बड़ा विस्तार है और स्थानीय श्रद्धालुओं की वर्षों पुरानी माँग को पूरा करता है।

मुख्य बातें

काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट ने 8 जुलाई 2026 से काशीवासियों के लिए गेट नंबर 4बी (काशी द्वार) से पूरे दिन विशेष प्रवेश की व्यवस्था लागू की।
प्रवेश का समय सुबह 4:15 बजे से रात 10:45 बजे तक — लगभग साढ़े अठारह घंटे।
यह व्यवस्था फिलहाल श्रावण मास से पहले ट्रायल के रूप में है; श्रावण व विशेष पर्वों पर अलग व्यवस्था लागू होगी।
प्रवेश के लिए स्थानीय पहचान पत्र (आधार कार्ड, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या मंदिर का वार्षिक पास) अनिवार्य।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पहल का अनुमोदन किया और उनके निर्देश के बाद ही व्यवस्था लागू की गई।
2024 में केवल दो एक-एक घंटे के स्लॉट थे; अब पूरे दिन के लिए काशी द्वार खुला रहेगा।

काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट ने 8 जुलाई 2026 को वाराणसी के स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है — अब गेट नंबर 4बी (काशी द्वार) से काशीवासी सुबह 4:15 बजे से रात 10:45 बजे तक पूरे दिन बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकेंगे। यह व्यवस्था फिलहाल श्रावण मास शुरू होने से पहले ट्रायल के रूप में लागू की जा रही है और ट्रायल सफल रहने पर इसे स्थायी रूप देने की योजना है।

नई व्यवस्था का स्वरूप

काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि मंदिर के कपाट खुलने के बाद व्यवस्थाओं को सुचारू करने के लिए लगभग 15 मिनट का समय रखा जाएगा, जिसके बाद सुबह 4:15 बजे से दर्शन प्रारंभ होंगे। चूँकि मंदिर रात 11 बजे बंद होता है, इसलिए काशी द्वार रात 10:45 बजे बंद किया जाएगा। इस प्रकार यह प्रवेश द्वार प्रतिदिन लगभग साढ़े अठारह घंटे खुला रहेगा।

गौरतलब है कि 2024 में काशीवासियों के लिए केवल सुबह 4 से 5 बजे और शाम 4 से 5 बजे तक सीमित दर्शन की व्यवस्था थी। अब उसी व्यवस्था का विस्तार करते हुए पूरे दिन के लिए काशी द्वार खोलने का निर्णय लिया गया है — जो स्थानीय श्रद्धालुओं की दीर्घकालिक माँग थी।

पात्रता और पहचान पत्र

मिश्रा ने स्पष्ट किया कि यह सुविधा विशेष रूप से काशीवासियों के लिए है और प्रवेश के लिए स्थानीय पहचान पत्र अनिवार्य होगा। मान्य दस्तावेज़ों में काशी के पते वाला आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड, सरकारी कर्मचारी का स्थानीय पते वाला पहचान पत्र अथवा मंदिर प्रशासन द्वारा जारी वार्षिक दैनिक दर्शनार्थी पास शामिल हैं। जो लोग बाहर से आकर काशी में स्थायी रूप से बस गए हैं, वे भी वार्षिक शुल्क देकर विशेष पास बनवा सकते हैं और इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

मुख्यमंत्री योगी की स्वीकृति

मिश्रा ने बताया कि इस व्यवस्था को लागू करने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष इसका विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया था। मुख्यमंत्री ने इस पहल को काशीवासियों के हित में एक सकारात्मक कदम बताते हुए अनुमोदन दिया और उनके निर्देश के बाद ही इस व्यवस्था को लागू किया जा रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब श्री काशी विश्वनाथ धाम के पुनर्निर्माण के बाद से मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विशेष पर्वों पर 10 से 13 लाख तक श्रद्धालु मंदिर पहुँचते हैं, जिससे स्थानीय निवासियों को दर्शन में कठिनाई होती थी।

स्पर्श दर्शन और विशेष पर्वों की व्यवस्था

मिश्रा ने स्पष्ट किया कि श्रावण मास और अन्य विशेष पर्वों पर, जब लाखों शिवभक्त दर्शन के लिए पहुँचते हैं, तब काशी द्वार का संचालन अलग व्यवस्था के तहत किया जाएगा। स्पर्श दर्शन की व्यवस्था पहले की तरह प्रातःकाल निर्धारित समय में जारी रहेगी। उन्होंने शिव पुराण का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक शिवभक्त में स्वयं भगवान शिव का वास माना गया है और काशीवासी सदा इस परंपरा का सम्मान करते आए हैं।

स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रिया

काशी निवासी कन्हैया दुबे 'केडी' ने कहा कि बाबा विश्वनाथ काशी के आराध्य हैं और काशीवासियों का उनसे पारिवारिक संबंध है। उन्होंने कहा, 'काशीवासी जल अर्पित किए बिना भोजन तक ग्रहण नहीं करते, इसलिए उन्हें हर समय दर्शन की सुविधा मिलनी चाहिए।' साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि यह व्यवस्था केवल चुनावी घोषणा बनकर न रह जाए, बल्कि स्थायी रूप से लागू रहे।

एक अन्य स्थानीय निवासी राजकुमार सेठ ने कहा कि काशीवासी लंबे समय से इस सुविधा की माँग कर रहे थे। उन्होंने मंदिर प्रशासन के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। मंदिर प्रशासन के अनुसार, पिछले अनुभव के आधार पर पूरे दिन व्यवस्था खुली रहने से भीड़ का दबाव कम होगा और दर्शन अधिक सुचारू ढंग से हो सकेंगे — क्योंकि पहले भी अधिकतर श्रद्धालु निर्धारित एक घंटे की अवधि में 15 से 30 मिनट के भीतर दर्शन कर लेते थे।

ट्रायल के परिणामों के आधार पर मंदिर न्यास इस व्यवस्था को स्थायी रूप देने पर निर्णय लेगा, जो काशी के लाखों स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए एक निर्णायक क्षण होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है। ट्रायल को श्रावण जैसे सबसे व्यस्त मास से बाहर रखा गया है, जो प्रशासनिक सावधानी दर्शाता है, परंतु स्थानीय निवासियों की यह माँग स्वाभाविक है कि यह सुविधा कागज़ी घोषणा न बने। पहचान पत्र की अनिवार्यता एक उचित नियंत्रण है, किंतु वार्षिक पास की प्रक्रिया कितनी सुलभ होगी — यह देखना बाकी है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काशी विश्वनाथ मंदिर में काशीवासियों के लिए नई प्रवेश व्यवस्था क्या है?
काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट ने स्थानीय निवासियों के लिए गेट नंबर 4बी (काशी द्वार) से सुबह 4:15 बजे से रात 10:45 बजे तक पूरे दिन विशेष प्रवेश की व्यवस्था लागू की है। यह 2024 की सीमित दो-स्लॉट व्यवस्था का विस्तार है और फिलहाल श्रावण मास से पहले ट्रायल के रूप में चलाई जा रही है।
काशी द्वार से प्रवेश के लिए कौन से दस्तावेज़ मान्य हैं?
प्रवेश के लिए काशी के पते वाला आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड, सरकारी कर्मचारी का स्थानीय पते वाला पहचान पत्र अथवा मंदिर प्रशासन द्वारा जारी वार्षिक दैनिक दर्शनार्थी पास मान्य होगा। बाहर से आकर काशी में स्थायी रूप से बसे लोग वार्षिक शुल्क देकर विशेष पास बनवा सकते हैं।
क्या यह व्यवस्था श्रावण मास में भी लागू रहेगी?
नहीं, यह व्यवस्था श्रावण मास और अन्य विशेष पर्वों पर लागू नहीं होगी। उन अवसरों पर 10 से 13 लाख तक श्रद्धालु मंदिर पहुँचते हैं, इसलिए काशी द्वार का संचालन अलग व्यवस्था के तहत किया जाएगा।
इस निर्णय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की क्या भूमिका है?
मंदिर के सीईओ विश्व भूषण मिश्रा के अनुसार, इस व्यवस्था को लागू करने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया था। मुख्यमंत्री ने इसे काशीवासियों के हित में सकारात्मक कदम बताते हुए अनुमोदन दिया और उनके निर्देश के बाद ही यह व्यवस्था लागू की जा रही है।
क्या यह व्यवस्था स्थायी होगी या केवल ट्रायल?
फिलहाल यह व्यवस्था श्रावण मास से पहले ट्रायल के रूप में शुरू की जा रही है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि ट्रायल सफल रहने और व्यवस्था का आकलन करने के बाद इसे नियमित रूप से लागू करने की योजना है।
राष्ट्र प्रेस
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