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पाकिस्तान: सिंध अस्पताल में 78 बच्चों को लगाई संक्रमित सुई, महीनों बाद सिंध हाई कोर्ट के आदेश पर जांच शुरू

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पाकिस्तान: सिंध अस्पताल में 78 बच्चों को लगाई संक्रमित सुई, महीनों बाद सिंध हाई कोर्ट के आदेश पर जांच शुरू

सारांश

सिंध के एक सरकारी अस्पताल में डिस्पोजेबल सिरिंजों के दोबारा इस्तेमाल से 78 बच्चे एचआईवी की चपेट में आए — नवंबर में खुलासे के बाद भी महीनों तक कोई जाँच नहीं हुई। सिंध हाई कोर्ट की दखलअंदाजी के बाद अब जवाबदेही की प्रक्रिया शुरू हुई है, जबकि परिजन 9 मौतों का दावा कर रहे हैं।

मुख्य बातें

सिंध के कुलसूम बाई वालिका अस्पताल में 78 बच्चों को इलाज के दौरान एचआईवी संक्रमित सुइयाँ लगाई गईं।
अदालत में दायर याचिका के अनुसार, डिस्पोजेबल सिरिंजों के दोबारा इस्तेमाल से 200 से अधिक बच्चे संक्रमित हुए।
परिजनों ने 9 बच्चों की मौत का दावा किया है; अधिकारियों ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की।
नवंबर 2025 में संक्रमण उजागर होने के बावजूद महीनों तक कोई स्वतंत्र जाँच नहीं हुई।
सिंध हाई कोर्ट ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया।
जनवरी–मार्च 2025 के बीच सिंध में दर्ज 894 एचआईवी मामलों में से 329 बच्चों के थे।

सिंध प्रांत के कुलसूम बाई वालिका अस्पताल में 78 बच्चों को इलाज के दौरान एचआईवी संक्रमित सुइयाँ लगाए जाने का मामला महीनों की चुप्पी के बाद अब अदालत की दखलअंदाजी से जाँच के दायरे में आया है। नवंबर 2025 में संक्रमण का खुलासा होने के बावजूद अधिकारियों ने स्वतंत्र जाँच के आदेश नहीं दिए थे, जिसके बाद पीड़ित परिवारों ने सिंध हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। अदालत ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर संक्रमण की वजह बताते हुए रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मामले का मूल घटनाक्रम

ब्रिटिश समाचार पत्र द टेलीग्राफ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सिंध स्थित कुलसूम बाई वालिका अस्पताल में 78 बच्चे एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। अदालत में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल में डिस्पोजेबल सिरिंजों का दोबारा इस्तेमाल किए जाने के कारण 200 से अधिक बच्चे एचआईवी से संक्रमित हुए। याचिका में इसे आपराधिक लापरवाही करार दिया गया है।

परिजनों के आरोप और मौतों का दावा

पीड़ित बच्चों के परिजनों ने दावा किया है कि संक्रमित बच्चों में से नौ की मौत हो चुकी है। हालाँकि, अधिकारियों ने अभी तक इन आँकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। परिजनों का यह भी आरोप है कि अधिकारियों ने न तो घटना की उचित जाँच कराई और न ही पीड़ित बच्चों के इलाज की समुचित व्यवस्था की।

सिंध में बच्चों में एचआईवी की व्यापक तस्वीर

सिंध के स्वास्थ्य विभाग के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि जनवरी से मार्च 2025 के बीच प्रांत में दर्ज 894 एचआईवी मामलों में से 329 मामले बच्चों के थे। यह आँकड़ा दर्शाता है कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि एक गहरी होती स्वास्थ्य संकट की कड़ी है।

2019 का रतोडेरो प्रकोप: एक भयावह पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि पाकिस्तान में यह पहली बार नहीं है जब असुरक्षित इंजेक्शन पद्धतियों से बच्चे एचआईवी की चपेट में आए हों। 2019 में सिंध के ही रतोडेरो कस्बे में कथित तौर पर संक्रमित सुइयों के दोबारा इस्तेमाल से सैकड़ों बच्चे संक्रमित हो गए थे। जून 2019 तक लगभग तीन लाख आबादी वाले इस कस्बे में 800 से अधिक बच्चे एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे। बाद में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की जाँच में असुरक्षित इंजेक्शन पद्धतियों को इस प्रकोप का मुख्य कारण बताया गया था। कोविड-19 महामारी के कारण यह मामला वैश्विक सुर्खियों से ओझल हो गया, लेकिन संक्रमण के मामले लगातार सामने आते रहे।

आगे की राह: जवाबदेही और सुधार की दरकार

सिंध हाई कोर्ट के निर्देश के बाद अब सरकार पर जवाब देने का दबाव है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में सिंगल-यूज़ सिरिंज नीति को सख्ती से लागू नहीं किया जाता और जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक ऐसे मामले दोहराए जाते रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

अंतरराष्ट्रीय दबाव और सैकड़ों बच्चों के संक्रमित होने के बावजूद असुरक्षित इंजेक्शन पद्धतियाँ जारी रहीं — यह दर्शाता है कि जवाबदेही केवल कागज़ों तक सीमित रही। सिंध हाई कोर्ट की दखलअंदाजी ज़रूरी थी, लेकिन न्यायिक आदेश तब तक पर्याप्त नहीं जब तक स्वास्थ्य विभाग में सिंगल-यूज़ नीति की निगरानी के लिए स्वतंत्र तंत्र न बने। परिजनों के 9 मौतों के दावे और अधिकारियों की चुप्पी के बीच की खाई यह भी बताती है कि पारदर्शिता का संकट उतना ही गहरा है जितना स्वास्थ्य संकट।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान के सिंध अस्पताल में एचआईवी संक्रमण का मामला क्या है?
सिंध प्रांत के कुलसूम बाई वालिका अस्पताल में डिस्पोजेबल सिरिंजों के दोबारा इस्तेमाल के कारण 78 बच्चे एचआईवी से संक्रमित पाए गए। यह मामला नवंबर 2025 में सामने आया था और याचिका के अनुसार कुल 200 से अधिक बच्चे प्रभावित हो सकते हैं।
सिंध हाई कोर्ट ने इस मामले में क्या आदेश दिया?
सिंध हाई कोर्ट ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल कर संक्रमण की वजह बताने का निर्देश दिया है। पीड़ित परिवारों द्वारा दायर याचिका के बाद अदालत ने यह हस्तक्षेप किया, क्योंकि महीनों तक कोई स्वतंत्र जाँच नहीं हुई थी।
क्या इन बच्चों में से किसी की मौत हुई है?
पीड़ित बच्चों के परिजनों ने दावा किया है कि 9 बच्चों की मौत हो चुकी है। हालाँकि, अधिकारियों ने अभी तक इन आँकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
पाकिस्तान में पहले भी ऐसा एचआईवी प्रकोप हुआ है?
हाँ, 2019 में सिंध के रतोडेरो कस्बे में कथित तौर पर संक्रमित सुइयों के दोबारा इस्तेमाल से 800 से अधिक बच्चे एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे। WHO की जाँच में असुरक्षित इंजेक्शन पद्धतियों को मुख्य कारण बताया गया था।
सिंध में बच्चों में एचआईवी संक्रमण की स्थिति कितनी गंभीर है?
सिंध के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जनवरी से मार्च 2025 के बीच प्रांत में दर्ज 894 एचआईवी मामलों में से 329 मामले बच्चों के थे। यह आँकड़ा दर्शाता है कि बच्चों में एचआईवी संक्रमण एक व्यापक और चिंताजनक समस्या बनती जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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