पाकिस्तान में बच्चों में HIV का खतरा बढ़ा, PIMC विशेषज्ञों ने दी गंभीर चेतावनी
सारांश
Key Takeaways
- अक्टूबर 2025 से अब तक पाकिस्तान में 189 HIV पॉजिटिव मामले दर्ज हुए हैं, अप्रैल के पहले 20 दिनों में 11 नए केस सामने आए।
- PIMC HIV सेंटर के विशेषज्ञों ने बच्चों में HIV के बढ़ते मामलों को सबसे गंभीर चिंता बताया है।
- BBC की अंडरकवर जांच में ताऊंसा THQ अस्पताल में सिरिंज दोबारा इस्तेमाल और अप्रशिक्षित स्टाफ द्वारा काम करने का खुलासा हुआ।
- नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच ताऊंसा में कम से कम 331 बच्चे HIV पॉजिटिव पाए गए।
- मार्च 2025 में मेडिकल सुपरिटेंडेंट के निलंबन के बावजूद संक्रमण नहीं रुका, सरकारी वादे खोखले साबित हुए।
- मौजूदा मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. कासिम बुजदार ने वीडियो फुटेज के बावजूद किसी भी लापरवाही से इनकार किया।
इस्लामाबाद, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान में HIV संक्रमण की दर चिंताजनक रूप से बढ़ती जा रही है और इसका सबसे डरावना पहलू यह है कि अब बच्चे भी इस महामारी की चपेट में आ रहे हैं। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMC) के HIV सेंटर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या पर गहरी चिंता जताई है और सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
बढ़ते मामले और सरकारी आंकड़े
पाकिस्तान के राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा, रेगुलेशन और समन्वय मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक डेटा के अनुसार, अक्टूबर 2025 से अब तक कुल 189 लोगों के HIV-पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई है। अप्रैल के पहले 20 दिनों में ही 11 नए मामले सामने आए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, पुरुषों में संक्रमण की दर महिलाओं की तुलना में अधिक है। इसके अलावा, ट्रांसजेंडर समुदाय में भी मामले दर्ज हुए हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चिंता बच्चों में HIV पॉजिटिव केस मिलने से है।
एड्स कंट्रोल कार्यक्रम के प्रोग्राम मैनेजर जुबैर अब्दुल्ला ने पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून से बातचीत में कहा कि PIMC HIV सेंटर में मामलों की बढ़ोतरी आंशिक रूप से इसलिए भी है क्योंकि अधिक लोग स्वेच्छा से टेस्टिंग के लिए आगे आ रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बीमारी को छिपाना और टेस्टिंग से बचना स्थिति को और खतरनाक बना देता है।
ताऊंसा अस्पताल में लापरवाही का चौंकाने वाला खुलासा
पिछले हफ्ते सामने आई एक जांच रिपोर्ट ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरकारी अस्पताल में भयावह लापरवाही का पर्दाफाश किया। ताऊंसा स्थित तहसील हेडक्वार्टर हॉस्पिटल (THQ) में बच्चों के वार्ड को HIV फैलने से जोड़ा गया था।
BBC की अंडरकवर जांच में सामने आया कि मार्च 2025 में अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट को निलंबित किए जाने के बावजूद हालात नहीं सुधरे। वीडियो फुटेज में नर्सें मरीजों को कपड़ों के ऊपर से इंजेक्शन लगाती दिखीं, इस्तेमाल की गई सिरिंज दोबारा उपयोग के लिए रखी जा रही थीं और अप्रशिक्षित स्वयंसेवक बिना किसी निगरानी के काम कर रहे थे।
BBC की प्रेस रिलीज में खुलासा हुआ कि स्टाफ की भारी कमी और दवाओं-उपकरणों की अनुपलब्धता के चलते कर्मचारी एक ही उपकरण को कई मरीजों पर इस्तेमाल करते थे और दवाएं आपस में बांटते थे। कुछ मामलों में परिवारों को खुद दवाएं खरीदने के लिए कहा जाता था।
बच्चों में संक्रमण की भयावह तस्वीर
BBC की रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच ताऊंसा में कम से कम 331 बच्चों का HIV टेस्ट पॉजिटिव पाया गया। जो माता-पिता टेस्ट कराने के लिए तैयार हुए, उनमें से हर 20 में से लगभग एक व्यक्ति HIV पॉजिटिव निकला।
गौरतलब है कि पिछले साल मार्च में सरकार द्वारा कार्रवाई का ऐलान किए जाने के बाद भी संक्रमण का सिलसिला नहीं रुका। यह सरकारी वादों और जमीनी हकीकत के बीच की गहरी खाई को उजागर करता है।
अस्पताल प्रशासन का इनकार और जवाबदेही का सवाल
वीडियो फुटेज के ठोस सबूत होने के बावजूद, मौजूदा मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. कासिम बुजदार ने किसी भी लापरवाही से इनकार किया। उन्होंने दावा किया कि फुटेज या तो उनके कार्यकाल से पहले की है या नकली हो सकती है।
यह विडंबना ही है कि एक तरफ PIMC के विशेषज्ञ HIV के बढ़ते मामलों पर चेतावनी दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जिन अस्पतालों से संक्रमण फैल रहा है, वहां के अधिकारी जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं। यह पाकिस्तान की ध्वस्त होती सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की कड़वी सच्चाई है।
विशेषज्ञों की अपील और आगे की राह
PIMC के विशेषज्ञों ने HIV से बचाव की जागरूकता और व्यापक टेस्टिंग अभियान चलाने की तत्काल जरूरत पर बल दिया है। उनका कहना है कि समय पर जांच और उपचार से न केवल मरीजों की जान बचाई जा सकती है, बल्कि संक्रमण की चेन भी तोड़ी जा सकती है।
आने वाले हफ्तों में पाकिस्तान सरकार पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ने की संभावना है, खासकर BBC की जांच के बाद। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अस्पतालों में बुनियादी संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल सख्ती से लागू नहीं किए जाते और जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक बच्चों में HIV के मामले थमने वाले नहीं हैं।