अधिक तेल का सेवन: मोटापा और हृदय रोग की सबसे बड़ी वजह, NHM के 5 आसान उपाय अपनाएं
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भोजन में अधिक तेल का सेवन आज भारत में मोटापा, हृदय रोग और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण बनता जा रहा है। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि रोजमर्रा की खानपान की आदतों में मामूली बदलाव करके इन बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आज की अनियमित दिनचर्या में तेल की अनियंत्रित खपत शरीर के लिए धीमे जहर की तरह काम करती है।
तेल की अधिकता से कौन-कौन सी बीमारियां होती हैं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, भोजन में जरूरत से ज्यादा तेल का उपयोग शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) की मात्रा बढ़ाता है, जो हृदय रोग और स्ट्रोक का सीधा कारण बनता है। इसके अलावा अत्यधिक कैलोरी के कारण मोटापा तेजी से बढ़ता है, जो आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज, जोड़ों के दर्द और लिवर की समस्याओं को जन्म देता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार भारत में हृदय रोग से होने वाली मौतों में असंतुलित खानपान की बड़ी भूमिका है। गौरतलब है कि भारत में मोटापे की दर पिछले दो दशकों में दोगुनी हो चुकी है और इसका सीधा संबंध तले-भुने व अधिक तेल वाले खाद्य पदार्थों की बढ़ती खपत से जोड़ा जाता है।
NHM के सुझाव: तेल कम करने के व्यावहारिक तरीके
नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने तेल की खपत घटाने के लिए कई व्यावहारिक उपाय सुझाए हैं। सबसे पहला और सबसे आसान तरीका यह है कि तेल को सीधे कढ़ाई में डालने की बजाय छोटी चम्मच से नापकर डालें। इससे अनजाने में होने वाली अत्यधिक खपत पर लगाम लगती है।
इसके अलावा तले हुए खाद्य पदार्थों जैसे पकौड़े, समोसे और पूड़ी का सेवन सीमित करना जरूरी है। इनमें कैलोरी की मात्रा असाधारण रूप से अधिक होती है और ये वजन बढ़ाने के सबसे बड़े कारकों में गिने जाते हैं।
भाप, ग्रिल और भुनी विधि: स्वास्थ्यवर्धक विकल्प
विशेषज्ञ स्टीम्ड (भाप में पके), ग्रिल्ड या भुने हुए भोजन को प्राथमिकता देने की सलाह देते हैं। इन विधियों से पकाए गए भोजन में न केवल तेल की मात्रा न्यूनतम होती है, बल्कि विटामिन, मिनरल और पोषक तत्व भी बेहतर तरीके से सुरक्षित रहते हैं।
घर पर खाना बनाते समय सरसों का तेल, जैतून का तेल या नारियल तेल जैसे हल्के और अपेक्षाकृत स्वास्थ्यवर्धक विकल्पों का सीमित मात्रा में उपयोग करना उचित माना जाता है। रिफाइंड और हाइड्रोजनेटेड तेलों से जितना संभव हो, दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है।
छोटी आदतें, बड़ा बदलाव: विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए बड़े बदलावों की नहीं, बल्कि छोटी-छोटी रोजमर्रा की आदतों में सुधार की जरूरत है। यदि प्रतिदिन के भोजन में तेल की मात्रा 20 से 30 प्रतिशत तक भी कम की जाए, तो कुछ ही महीनों में वजन और कोलेस्ट्रॉल में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मोटापा कम से कम 13 प्रकार के कैंसर सहित दर्जनों बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है। ऐसे में खानपान में तेल का संतुलित उपयोग केवल वजन नियंत्रण नहीं, बल्कि समग्र स्वास्थ्य की रक्षा का एक महत्वपूर्ण कदम है।
आने वाले समय में NHM जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से स्कूलों, अस्पतालों और सामुदायिक केंद्रों में स्वस्थ खानपान की आदतों को बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अभी से सावधानी बरती जाए तो अगले एक दशक में भारत में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बोझ को काफी कम किया जा सकता है।