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नींद की अनियमितता: तन-मन को चुपचाप बर्बाद करने वाला खतरा, जानें 5 असरदार बचाव के उपाय

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नींद की अनियमितता: तन-मन को चुपचाप बर्बाद करने वाला खतरा, जानें 5 असरदार बचाव के उपाय

सारांश

नींद की अनियमितता तन-मन दोनों के लिए खामोश लेकिन घातक खतरा है। NHM के अनुसार याददाश्त कमजोर होना, चिड़चिड़ापन और अवसाद इसके प्रमुख संकेत हैं। तय समय पर सोना, स्क्रीन से दूरी और हल्का व्यायाम इस समस्या से बचाव के सबसे कारगर उपाय हैं।

मुख्य बातें

नींद की अनियमितता याददाश्त कमजोर करने, अवसाद और हृदय रोग जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकती है।
नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अनुसार रोज एक तय समय पर सोना और जागना बॉडी क्लॉक को संतुलित रखता है।
सोने से एक घंटे पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी बंद करने से मेलाटोनिन हार्मोन का स्राव सामान्य होता है।
WHO के अनुसार दुनिया की लगभग 45 प्रतिशत आबादी नींद से जुड़ी किसी न किसी समस्या से पीड़ित है।
शाम 6 बजे के बाद कैफीन, शराब और धूम्रपान से परहेज नींद की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है।
नींद की समस्या तीन सप्ताह से अधिक बनी रहे तो बिना देरी किए चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। नींद की अनियमितता आज के दौर में तन और मन दोनों को धीरे-धीरे खोखला करने वाला एक ऐसा खामोश खतरा बन चुकी है, जिसे अक्सर लोग गंभीरता से नहीं लेते। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने स्पष्ट किया है कि नियमित और गहरी नींद स्वस्थ जीवन की बुनियाद है, और इसकी अनदेखी याददाश्त कमजोर होने, अवसाद और गंभीर मानसिक विकारों को जन्म दे सकती है।

क्यों बिगड़ रही है आधुनिक जीवन में नींद?

आज की व्यस्त जीवनशैली, बढ़ता काम का दबाव और स्मार्टफोन, लैपटॉप व टीवी के अत्यधिक उपयोग ने नींद के प्राकृतिक चक्र को बुरी तरह प्रभावित किया है। देर रात तक स्क्रीन देखना, अनियमित खान-पान और शारीरिक निष्क्रियता मिलकर बॉडी क्लॉक यानी शरीर की आंतरिक घड़ी को बिगाड़ देते हैं।

गौरतलब है कि स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी (Blue Light) मस्तिष्क को यह संदेश देती है कि अभी दिन है, जिससे नींद लाने वाले हार्मोन मेलाटोनिन का स्राव बाधित हो जाता है। यही कारण है कि करोड़ों भारतीय रात में घंटों करवटें बदलते रहते हैं।

नींद की अनियमितता के प्रमुख लक्षण

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि निम्नलिखित संकेत लगातार दिखाई दें तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए:

याददाश्त कमजोर होना और भूलने की आदत बढ़ना
— नींद के दौरान असामान्य हरकतें जैसे चलना या हाथ-पैर पटकना
मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद की लगातार शिकायत
चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में भारी कमी
— दिन भर अत्यधिक थकान और सुस्ती महसूस होना

ये लक्षण केवल थकान के संकेत नहीं हैं — ये शरीर की उस चेतावनी हैं जो बताती है कि नींद की कमी धीरे-धीरे हृदय रोग, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों का रास्ता खोल रही है।

NHM के सुझाए 5 असरदार बचाव के उपाय

नेशनल हेल्थ मिशन और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नींद की अनियमितता से बचने के लिए कुछ व्यावहारिक उपाय सुझाए हैं:

1. तय समय पर सोएं और जागें: रोज एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें। इससे शरीर की सर्केडियन रिदम (Circadian Rhythm) संतुलित रहती है और नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है।

2. नियमित योग और हल्का व्यायाम: प्रतिदिन 30 मिनट का हल्का व्यायाम या योग नींद को गहरा और लंबा बनाता है। हालांकि, सोने से ठीक पहले तीव्र व्यायाम से बचें।

3. कैफीन, शराब और धूम्रपान से दूरी: शाम 6 बजे के बाद चाय, कॉफी और अन्य कैफीनयुक्त पेय पदार्थों से परहेज करें। शराब और धूम्रपान नींद की गहराई को नष्ट कर देते हैं।

4. सोने से एक घंटे पहले स्क्रीन बंद करें: मोबाइल, लैपटॉप या टीवी का उपयोग सोने से कम से कम एक घंटा पहले बंद कर दें। इसके बजाय हल्की किताब पढ़ें या ध्यान करें।

5. शयनकक्ष का माहौल अनुकूल बनाएं: कमरे में अंधेरा, शांति और उचित तापमान नींद की गुणवत्ता को कई गुना बेहतर बनाता है। तेज रोशनी और शोर नींद के सबसे बड़े दुश्मन हैं।

व्यापक स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा

यह समस्या केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप लेती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 45 प्रतिशत आबादी नींद से जुड़ी किसी न किसी समस्या से पीड़ित है। भारत में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है, खासकर 18 से 40 वर्ष के युवा वर्ग में।

तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में भी कार्य संस्कृति के दबाव के कारण नींद की कमी एक राष्ट्रीय समस्या बन चुकी है, जहां सरकारें अब स्लीप हेल्थ पॉलिसी लागू कर रही हैं। भारत में भी इस दिशा में जागरूकता अभियानों की जरूरत महसूस की जा रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट संदेश है — अगर नींद की समस्या तीन सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे तो बिना देरी किए किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श लें। आने वाले समय में NHM की ओर से नींद स्वास्थ्य पर और अधिक जागरूकता कार्यक्रम शुरू किए जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

हृदय रोग और उत्पादकता का भारी नुकसान छिपा है। विडंबना यह है कि भारत में जहां एक ओर योग और आयुर्वेद को वैश्विक मंच पर प्रचारित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर युवा पीढ़ी रात भर स्क्रीन से चिपकी रहती है। जापान और कोरिया जैसे देश 'स्लीप हेल्थ' को राष्ट्रीय नीति का हिस्सा बना चुके हैं, जबकि भारत में अभी भी यह जागरूकता सीमित है। NHM के प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन जब तक कार्यस्थल संस्कृति और शिक्षा व्यवस्था में नींद को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक ये उपाय केवल कागजी रहेंगे।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नींद की अनियमितता के मुख्य लक्षण क्या हैं?
नींद की अनियमितता के प्रमुख लक्षणों में याददाश्त कमजोर होना, दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन, मानसिक तनाव और एकाग्रता में कमी शामिल हैं। यदि ये संकेत तीन सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें तो चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है।
अच्छी नींद के लिए सबसे जरूरी उपाय क्या है?
NHM के अनुसार, रोज एक ही समय पर सोना और जागना सबसे महत्वपूर्ण उपाय है क्योंकि इससे शरीर की बॉडी क्लॉक यानी सर्केडियन रिदम संतुलित रहती है। इसके साथ सोने से एक घंटे पहले स्क्रीन बंद करना भी बेहद जरूरी है।
क्या नींद की कमी से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं?
हां, लंबे समय तक नींद की कमी हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अवसाद जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा देती है। WHO के अनुसार दुनिया की लगभग 45 प्रतिशत आबादी नींद से जुड़ी किसी न किसी समस्या से प्रभावित है।
मोबाइल और लैपटॉप की नीली रोशनी नींद को कैसे प्रभावित करती है?
स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी (Blue Light) मस्तिष्क को यह संकेत देती है कि अभी दिन है, जिससे नींद लाने वाले हार्मोन मेलाटोनिन का स्राव बाधित हो जाता है। इसीलिए सोने से कम से कम एक घंटे पहले सभी स्क्रीन बंद करने की सलाह दी जाती है।
नींद की समस्या होने पर डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?
यदि नींद न आने की समस्या, बार-बार नींद टूटना या दिन में अत्यधिक नींद आने की शिकायत तीन सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे तो तुरंत किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। स्वयं दवाइयां लेना और भी हानिकारक हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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