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कर्नाटक में नशामुक्ति अभियान: 'ऑपरेशन राइज' और 'बेडा ब्रो' लॉन्च, ₹97.90 करोड़ की ड्रग्स होगी नष्ट

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कर्नाटक में नशामुक्ति अभियान: 'ऑपरेशन राइज' और 'बेडा ब्रो' लॉन्च, ₹97.90 करोड़ की ड्रग्स होगी नष्ट

सारांश

कर्नाटक सरकार ने नशे के विरुद्ध दोहरी रणनीति अपनाई है — 'ऑपरेशन राइज' से पुलिस की सख्त कार्रवाई और 'बेडा ब्रो' से युवाओं में जागरूकता। ₹97.90 करोड़ की जब्त ड्रग्स नष्ट होगी और 2026 में पाँच महीनों में ही ₹184.72 करोड़ की बरामदगी हो चुकी है।

मुख्य बातें

कर्नाटक सरकार ने 30 जून 2026 को 'ऑपरेशन राइज' और 'बेडा ब्रो' नशामुक्ति अभियान लॉन्च किए।
अदालत की अनुमति के बाद ₹97.90 करोड़ मूल्य के 4,276.405 किलोग्राम जब्त मादक पदार्थ नष्ट किए जाएंगे।
वर्ष 2025 में ₹216.93 करोड़ और जनवरी–मई 2026 में ₹184.72 करोड़ की ड्रग्स बरामद हुई।
एनडीपीएस अधिनियम के तहत 2025 में 9,064 और 2026 में अब तक 6,651 आरोपियों पर मामले दर्ज।
2025 में 2,611 और 2026 के पहले पाँच महीनों में 1,406 ड्रग तस्कर गिरफ्तार।
ANTF को सुदृढ़ किया गया; राज्य में 'जीरो टॉलरेंस' नीति लागू।

कर्नाटक सरकार ने 30 जून 2026 को राज्य को नशामुक्त बनाने की दिशा में दो महत्वाकांक्षी अभियानों — 'ऑपरेशन राइज' और 'बेडा ब्रो' — की औपचारिक शुरुआत की। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर यह घोषणा करते हुए कहा कि मादक पदार्थों और साइकोट्रॉपिक ड्रग्स के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई, व्यापक जनजागरूकता और पुनर्वास — तीनों मोर्चों पर एक साथ यह मुहिम चलाई जाएगी। इसी अवसर पर कर्नाटक पुलिस अदालत की अनुमति के बाद ₹97.90 करोड़ मूल्य के 4,276.405 किलोग्राम जब्त मादक पदार्थों को भी नष्ट करेगी।

अभियान की पृष्ठभूमि और चुनौती

सरकारी बयान के अनुसार, कर्नाटक के शहरी क्षेत्र — विशेष रूप से बेंगलुरु — नशे की समस्या से सर्वाधिक प्रभावित हैं। इसके पीछे बड़ी छात्र आबादी, कामकाजी युवा, नाइटलाइफ संस्कृति, विदेशी नागरिकों की उपस्थिति और डिजिटल नेटवर्क का दुरुपयोग प्रमुख कारण बताए गए हैं। जाँच एजेंसियों ने कई मामलों में सिंथेटिक ड्रग्स की कूरियर के ज़रिए आपूर्ति और विदेशी नागरिकों की संलिप्तता का खुलासा किया है।

सरकार ने स्पष्ट किया कि नशे की समस्या माँग और आपूर्ति — दोनों कारणों से बढ़ रही है। युवाओं में साथियों का दबाव, तनाव और प्रयोग की प्रवृत्ति माँग को बढ़ाती है, जबकि संगठित अपराध गिरोह, अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क और डिजिटल प्लेटफॉर्म आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में ड्रग से जुड़े मामलों में साल-दर-साल वृद्धि दर्ज की जा रही है।

ऑपरेशन राइज: पुलिस की समन्वित कार्रवाई

एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) को और सुदृढ़ करते हुए सरकार ने 'ऑपरेशन राइज' के तहत पुलिस को समन्वित छापेमारी और गिरफ्तारी अभियान चलाने का निर्देश दिया है। राज्य ने नशीले पदार्थों के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति घोषित करते हुए कहा है कि जब तक इस समस्या का पूर्ण उन्मूलन नहीं हो जाता, अभियान जारी रहेगा।

बेडा ब्रो: युवाओं के लिए जागरूकता मुहिम

'बेडा ब्रो' अभियान युवाओं की भाषा और शैली में नशे के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और कानूनी दुष्परिणामों से अवगत कराने पर केंद्रित है। इस मुहिम में साथियों के दबाव से बचने, सही निर्णय लेने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए युवाओं को प्रेरित किया जाएगा। राज्यभर में जागरूकता कार्यक्रम, कार्यशालाएँ, सोशल मीडिया अभियान और संवादात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही युवाओं को खेल, शिक्षा और कौशल विकास गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा।

कार्रवाई के आँकड़े

सरकार द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में पुलिस ने ₹216.93 करोड़ मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए। 1 जनवरी से 31 मई 2026 के बीच ₹184.72 करोड़ की ड्रग्स बरामद की गई — जो इस गति को देखते हुए पूरे वर्ष का आँकड़ा 2025 को पार कर सकता है।

एनडीपीएस अधिनियम के तहत वर्ष 2025 में 9,064 आरोपियों के विरुद्ध मामले दर्ज किए गए, जबकि 2026 में अब तक 6,651 लोगों पर कार्रवाई हो चुकी है। ड्रग तस्करों की गिरफ्तारी के मामले में 2025 में 2,611 और 2026 के पहले पाँच महीनों में 1,406 तस्करों को पकड़ा गया। नशीले पदार्थों के सेवन के आरोप में 2025 में 6,455 और 2026 में अब तक 5,090 लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। ड्रग निर्माताओं की गिरफ्तारी में 2025 में 41 और 2026 में अब तक 17 निर्माता पकड़े गए हैं।

आगे की रणनीति

सरकार ने कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों, नागरिक संगठनों और समाज की सक्रिय भागीदारी के साथ समग्र रणनीति अपनाई जाएगी। गौरतलब है कि यह अभियान केवल पुलिसिया कार्रवाई तक सीमित न रहकर सामाजिक पुनर्वास और रोकथाम को भी समान महत्व देता है — जो इसे पिछले एकआयामी अभियानों से अलग करता है। राज्य सरकार ने दोहराया कि नशामुक्त कर्नाटक के लक्ष्य की प्राप्ति तक हर संभव प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — क्योंकि राज्य में इससे पहले भी नशे के विरुद्ध मुहिमें चलाई गई हैं और ड्रग बरामदगी के आँकड़े साल-दर-साल बढ़ते रहे हैं। 2025 में ₹216.93 करोड़ और 2026 के मात्र पाँच महीनों में ₹184.72 करोड़ की बरामदगी यह भी बताती है कि आपूर्ति श्रृंखला अभी भी सक्रिय और विस्तृत है। 'बेडा ब्रो' जैसे जागरूकता अभियानों की सफलता तब तक अधूरी रहेगी जब तक पुनर्वास ढाँचे को पर्याप्त बजट और संस्थागत समर्थन न मिले — जिसका सरकारी बयान में कोई ठोस उल्लेख नहीं है।
RashtraPress
16 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ऑपरेशन राइज' और 'बेडा ब्रो' अभियान क्या हैं?
ये कर्नाटक सरकार द्वारा 30 जून 2026 को लॉन्च किए गए दो नशामुक्ति अभियान हैं। 'ऑपरेशन राइज' पुलिस की समन्वित कार्रवाई पर केंद्रित है, जबकि 'बेडा ब्रो' युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने का सामाजिक अभियान है।
कर्नाटक में ड्रग्स जब्ती के ताज़ा आँकड़े क्या हैं?
वर्ष 2025 में ₹216.93 करोड़ मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए। 1 जनवरी से 31 मई 2026 के बीच ₹184.72 करोड़ की ड्रग्स बरामद की गई। इसके अलावा अदालत की अनुमति से ₹97.90 करोड़ मूल्य के 4,276.405 किलोग्राम जब्त मादक पदार्थ नष्ट किए जाएंगे।
'बेडा ब्रो' अभियान युवाओं को किस तरह प्रभावित करेगा?
यह अभियान युवाओं की भाषा और शैली में नशे के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और कानूनी दुष्परिणामों की जानकारी देगा। इसमें कार्यशालाएँ, सोशल मीडिया अभियान, खेल और कौशल विकास गतिविधियाँ शामिल होंगी, ताकि युवा साथियों के दबाव से बचकर स्वस्थ जीवनशैली अपना सकें।
कर्नाटक में एनडीपीएस अधिनियम के तहत कितने मामले दर्ज हुए हैं?
वर्ष 2025 में एनडीपीएस अधिनियम के तहत 9,064 आरोपियों के विरुद्ध मामले दर्ज किए गए। 2026 में अब तक 6,651 लोगों पर कार्रवाई की जा चुकी है। 2025 में 2,611 और 2026 के पहले पाँच महीनों में 1,406 ड्रग तस्कर गिरफ्तार हुए।
कर्नाटक के शहरी क्षेत्रों में नशे की समस्या क्यों अधिक है?
सरकारी बयान के अनुसार, बड़ी छात्र आबादी, कामकाजी युवा, नाइटलाइफ संस्कृति, विदेशी नागरिकों की उपस्थिति और डिजिटल नेटवर्क का दुरुपयोग शहरी क्षेत्रों में नशे की समस्या को बढ़ावा देते हैं। जाँच एजेंसियों ने कई मामलों में सिंथेटिक ड्रग्स की कूरियर के ज़रिए आपूर्ति और विदेशी नागरिकों की संलिप्तता भी उजागर की है।
राष्ट्र प्रेस
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