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मेघालय का DREAM मिशन जन आंदोलन बना: मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा का नशा-विरोधी अभियान को बड़ा संदेश

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मेघालय का DREAM मिशन जन आंदोलन बना: मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा का नशा-विरोधी अभियान को बड़ा संदेश

सारांश

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने 26 जून को शिलांग में स्पष्ट किया कि DREAM मिशन अब सरकारी दफ्तरों से निकलकर सड़कों और समुदायों तक पहुँच चुका है। नशे के कलंक को करुणा से बदलने और हितधारकों को एकजुट करने की यह कोशिश पूर्वोत्तर भारत में एक नई नशा-मुक्ति रणनीति की नींव रख रही है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री कॉनराड के.
संगमा ने 26 जून 2026 को शिलांग में DREAM मिशन को जन आंदोलन घोषित किया।
DREAM मिशन (ड्रग्स रिडक्शन, एलिमिनेशन एंड एक्शन मिशन) में रोकथाम, पुनर्वास, जागरूकता और रिकवरी सहायता शामिल है।
सरकारी विभाग, कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ, शैक्षणिक संस्थान और नागरिक समाज संगठन एक साझा मंच पर एकजुट किए गए हैं।
संगमा ने नशे से जुड़े कलंक को करुणा और सहानुभूति से बदलने का आह्वान किया।
मिशन की दीर्घकालिक सफलता के लिए जनभागीदारी को अनिवार्य बताया गया।

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने 26 जून 2026 को शिलांग में आयोजित नशाखोरी और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में घोषणा की कि राज्य का DREAM मिशन (ड्रग्स रिडक्शन, एलिमिनेशन एंड एक्शन मिशन) अब महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं रहा — यह एक व्यापक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि यह मिशन समुदायों, संस्थानों और संगठनों को नशाखोरी व अवैध तस्करी के विरुद्ध एकजुट मंच पर ला रहा है।

DREAM मिशन का दायरा और उद्देश्य

मुख्यमंत्री संगमा ने बताया कि DREAM मिशन मेघालय सरकार की प्रमुख नशा-विरोधी पहल है, जिसके तहत नशाखोरी की रोकथाम, पुनर्वास को सुदृढ़ करना, जागरूकता का प्रसार और रिकवरी में सहायता जैसे बहुआयामी लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इस मिशन के अंतर्गत सरकारी विभाग, कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ, शैक्षणिक संस्थान, नागरिक समाज संगठन और स्थानीय समुदाय — सभी को एक साझा ढाँचे में जोड़ा गया है।

संगमा ने रेखांकित किया कि इस अभियान का एक महत्वपूर्ण सामाजिक लक्ष्य नशे से जुड़े कलंक को करुणा और सहानुभूति से बदलना है, ताकि व्यसन से पीड़ित व्यक्ति समाज की मुख्यधारा में वापस आ सकें।

समन्वय की खाई को पाटने की कोशिश

मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि मेघालय में कई संगठन और व्यक्ति लंबे समय से मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ काम करते आए हैं, लेकिन उनके प्रयासों में अक्सर समन्वय की कमी रही। उन्होंने कहा कि DREAM मिशन ने इन सभी हितधारकों को एक साझा मंच पर एकत्रित कर बेहतर सहयोग और व्यापक प्रभाव सुनिश्चित किया है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पूर्वोत्तर भारत के कई राज्य मादक पदार्थों की तस्करी के बढ़ते नेटवर्क से जूझ रहे हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया और समर्थन

संगमा ने स्पष्ट किया कि केवल जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं हैं और ठोस, जमीनी कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार रोकथाम, पुनर्वास और जागरूकता के क्षेत्र में सक्रिय संगठनों व व्यक्तियों को प्रत्यक्ष सहायता प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा, 'हम यहाँ न केवल हितधारकों के प्रयासों की सराहना करने आए हैं, बल्कि उनके सुझाव सुनने और इस सामूहिक मिशन को मजबूत करने के लिए भी आए हैं।'

आम जनता पर असर और जनभागीदारी की अपील

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि इस आंदोलन की दीर्घकालिक सफलता के लिए जनभागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सरकारों, समुदायों, शिक्षकों और धार्मिक संगठनों से आह्वान किया कि वे मादक पदार्थों के दुरुपयोग को जड़ से उखाड़ने और अवैध तस्करी को समाप्त करने के साझा मिशन में सक्रिय भूमिका निभाएँ। गौरतलब है कि अंतर्राष्ट्रीय नशा-विरोधी दिवस (26 जून) को वैश्विक स्तर पर मादक पदार्थों के खतरे के प्रति जागरूकता के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

आगे की राह

DREAM मिशन के जन आंदोलन में परिवर्तित होने का दावा मेघालय सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं को दर्शाता है। अब देखना होगा कि यह सामूहिक ऊर्जा राज्य में नशे की दर और तस्करी के मामलों में मापनीय गिरावट में कब और कैसे तब्दील होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'जन आंदोलन' का दावा तब तक अधूरा है जब तक नशे की दर, तस्करी के मामलों और पुनर्वास की सफलता दर में सत्यापन-योग्य गिरावट सामने न आए। पूर्वोत्तर भारत में मादक पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क सीमापार है, और केवल राज्य-स्तरीय समन्वय से उसे नहीं तोड़ा जा सकता। असली कसौटी यह होगी कि क्या यह मिशन केंद्रीय नारकोटिक्स एजेंसियों और पड़ोसी राज्यों के साथ ठोस खुफिया-साझेदारी में तब्दील होता है — या फिर यह भी बड़े ऐलानों और छोटे नतीजों की उस परंपरागत सूची में जुड़ जाता है जो भारत के नशा-विरोधी अभियानों की पहचान बन गई है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेघालय का DREAM मिशन क्या है?
DREAM मिशन (ड्रग्स रिडक्शन, एलिमिनेशन एंड एक्शन मिशन) मेघालय सरकार की प्रमुख नशा-विरोधी पहल है, जिसका उद्देश्य नशाखोरी की रोकथाम, पुनर्वास, जागरूकता और रिकवरी सहायता के लिए सरकारी विभागों, कानून प्रवर्तन, शैक्षणिक संस्थानों और नागरिक समाज को एक मंच पर लाना है।
मुख्यमंत्री संगमा ने DREAM मिशन को जन आंदोलन क्यों कहा?
मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा के अनुसार, DREAM मिशन ने उन सभी संगठनों और व्यक्तियों को एक साझा मंच पर एकजुट किया है जो पहले अलग-अलग काम कर रहे थे और जिनके प्रयासों में समन्वय की कमी थी। इस व्यापक भागीदारी के कारण उन्होंने इसे सरकारी पहल से आगे जन आंदोलन की संज्ञा दी।
DREAM मिशन में कौन-कौन से हितधारक शामिल हैं?
इस मिशन में राज्य के सरकारी विभाग, कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ, शैक्षणिक संस्थान, नागरिक समाज संगठन, धार्मिक संगठन और स्थानीय समुदाय शामिल हैं। सरकार रोकथाम, पुनर्वास और जागरूकता में काम करने वाले संगठनों को प्रत्यक्ष सहायता भी प्रदान कर रही है।
26 जून को नशा-विरोधी कार्यक्रम क्यों आयोजित किया गया?
26 जून को प्रतिवर्ष नशाखोरी और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है। मेघालय सरकार ने इस अवसर पर शिलांग में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें मुख्यमंत्री संगमा ने DREAM मिशन की प्रगति और भविष्य की दिशा पर प्रकाश डाला।
नशा मुक्ति अभियान में आम जनता की क्या भूमिका है?
मुख्यमंत्री संगमा ने स्पष्ट किया कि आम जनता की सक्रिय भागीदारी के बिना नशा मुक्ति अभियान सफल नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन की दीर्घकालिक सफलता जनभागीदारी पर निर्भर है और सरकार हितधारकों के सुझाव सुनकर मिशन को और मजबूत करना चाहती है।
राष्ट्र प्रेस
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