मिजोरम में नशे के खिलाफ समन्वित अभियान, आबकारी मंत्री लालनघिंगलोवा हमार ने दिलाया संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
मिजोरम के आबकारी मंत्री लालनघिंगलोवा हमार ने 23 जून 2026 को आइजोल में आयोजित एक सेमिनार में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अनेक संगठनों के साथ मिलकर ड्रग्स के दुरुपयोग और तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए सतत एवं समन्वित प्रयास कर रही है। 'मिजोरम के सामने उभरते रुझान और नई चुनौतियाँ' विषय पर केंद्रित इस सेमिनार में उन्होंने मजबूत सामूहिक कार्रवाई की अनिवार्यता पर बल दिया।
मंत्री की प्रमुख बातें
मंत्री हमार ने कहा कि मिजोरम का अपेक्षाकृत छोटा आकार और सीमित जनसंख्या इसे अधिक प्रभावी सामूहिक कार्रवाई के लिए अनुकूल बनाती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि समाज के सभी वर्ग — सरकार, नागरिक समाज, चर्च और आम नागरिक — एकजुट होकर काम करें, तो राज्य नशे की समस्या पर काबू पाने और भावी पीढ़ियों को सुरक्षित करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर सकता है।
भौगोलिक संवेदनशीलता और चुनौती
समाज कल्याण विभाग के निदेशक सुशील सिंह ने सेमिनार में रेखांकित किया कि म्यांमार और बांग्लादेश के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमाएँ साझा करने और कुख्यात 'गोल्डन ट्रायंगल' की निकटता के कारण मिजोरम ड्रग्स की तस्करी व दुरुपयोग के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए रोकथाम, उपचार, पुनर्वास, जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ समेटने वाला व्यापक दृष्टिकोण अपनाना होगा।
नई रणनीतियों की ज़रूरत
आबकारी और नशीले पदार्थ विभाग के सचिव सी. लालरुइया ने कहा कि मिजोरम को ड्रग्स के दुरुपयोग के उभरते रुझानों के अनुरूप उन्नत ज्ञान, विशेषज्ञता और नवीन दृष्टिकोणों का उपयोग करते हुए नई रणनीतियाँ विकसित करनी होंगी। गौरतलब है कि यह सेमिनार हर वर्ष 26 जून को मनाए जाने वाले 'नशीले पदार्थों के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस' के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
विशेषज्ञों का मंथन और सामूहिक संकल्प
सेमिनार में विशेषज्ञों ने ड्रग्स के दुरुपयोग और पुनर्वास के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दीं। समापन सत्र में आयोजित इंटरैक्टिव चर्चा और प्रश्न-उत्तर सत्र ने प्रतिभागियों को विचारों का आदान-प्रदान करने, अनुभव साझा करने और ड्रग्स की चुनौती से निपटने के लिए सहयोगात्मक रास्ते तलाशने का अवसर दिया। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत के कई राज्य नशे की बढ़ती समस्या से जूझ रहे हैं और केंद्र सरकार भी इस क्षेत्र में सीमा-सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है।
आगे की राह
सरकारी एजेंसियों, नागरिक समाज संगठनों, चर्चों और स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर तालमेल के आह्वान के साथ यह सेमिनार संपन्न हुआ। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले महीनों में समन्वित कार्रवाई की रूपरेखा को और ठोस रूप दिया जाएगा, ताकि नशे के विरुद्ध यह अभियान जमीनी स्तर पर असरदार साबित हो सके।