क्या मिजोरम में नशे के खिलाफ चार महीने का विशेष अभियान शुरू होगा?

सारांश
Key Takeaways
- मिजोरम में नशे के खिलाफ चार महीने का विशेष अभियान शुरू हो रहा है।
- इसमें पुलिस और यंग मिजो एसोसिएशन का सहयोग रहेगा।
- अभियान का उद्देश्य नशे के अवैध कारोबार को समाप्त करना है।
- राज्य में नशे के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है।
- मुख्यमंत्री ने इसे राज्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है।
आइजोल, 31 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। मिजोरम सरकार राज्य में नशे के अवैध कारोबार और उससे संबंधित सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के लिए सोमवार से चार महीने का विशेष अभियान आरंभ करने जा रही है।
यह अभियान 31 दिसंबर 2025 तक जारी रहेगा। अधिकारियों ने इस संबंध में जानकारी दी।
इस अभियान का संचालन राज्य के 11 जिलों के नशे से प्रभावित क्षेत्रों, गांवों और सीमावर्ती इलाकों में किया जाएगा। इसमें पुलिस, अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियां और मिजोरम की प्रमुख सामाजिक संस्था यंग मिजो एसोसिएशन (वाईएमए) भागीदारी करेंगे।
मिजोरम के छह जिले (चम्फाई, सियाहा, लॉन्गतलाई, हनहथियाल, सैतुअल और सेरछिप) म्यांमार के साथ 510 किलोमीटर की बिना बाड़ वाली सीमा साझा करते हैं।
इन जिलों के माध्यम से नशे की गोलियां (विशेषकर मेथामफेटामिन), प्रतिबंधित सामग्री और विदेशी जानवरों की तस्करी की जाती है। यह सामग्री असम और त्रिपुरा के रास्ते देश के अन्य हिस्सों और बांग्लादेश तक पहुंचती है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह अभियान विशेष रूप से नशे के सौदागरों, तस्करों और नशे की लत से ग्रस्त अपराधियों पर ध्यान केंद्रित करेगा, जो अक्सर चोरी और अन्य अपराधों को अंजाम देते हैं।
हाल ही में मिजोरम के गृह मंत्री के. सपदंगा ने कहा था कि म्यांमार से आने वाले तस्कर और नशे के आदी लोग मिजो समाज के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।
वाईएमए, जो मिजो समाज में सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता फैलाने का कार्य करती है, इस अभियान में पूरी भागीदारी निभा रही है। इसके सदस्य घर-घर जाकर जागरूकता फैलाएंगे और समाज को नशे के खिलाफ एकजुट करेंगे।
राज्य के एक्साइज और नारकोटिक्स विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक 50 से अधिक लोगों की मौत नशे की लत के कारण हो चुकी है, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं। 2020 से अब तक 351 लोगों की जान नशे ने ले ली है।
राज्य के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने पिछले सप्ताह नशे को राज्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था। उन्होंने कहा, मिजोरम गोल्डन ट्रायंगल के नजदीक स्थित है, जो विश्वभर में नशे की तस्करी के लिए बदनाम इलाका है।
मुख्यमंत्री ने एचआईवी/एड्स के बढ़ते मामलों को भी चिंता का विषय बताया और कहा कि यह लड़ाई सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य की भी है।
मिजोरम सरकार ने इस खतरे से निपटने के लिए एक नया कदम उठाते हुए 'मिजो टेरिटोरियल आर्मी (एमटीए)' की एक नई बटालियन के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो विशेष रूप से नशे की तस्करी और कानून व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं से निपटेगी।