मिजोरम के राज्यपाल विजय कुमार सिंह ने आइजोल में 10 करोड़ नशा-मुक्ति शपथ अभियान में भाग लिया
सारांश
मुख्य बातें
मिजोरम के राज्यपाल जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह (सेवानिवृत्त) ने सोमवार, 10 अगस्त 2026 को आइजोल में ब्रह्माकुमारीज द्वारा आयोजित '10 करोड़ नशा-मुक्ति शपथ मेगा अभियान' में सक्रिय रूप से भाग लिया। यह आयोजन केंद्र सरकार के 'नशा मुक्त भारत अभियान' और 'मिशन स्पंदन' — नशीली दवाओं के दुरुपयोग के विरुद्ध आध्यात्मिक साझेदारी — के अंतर्गत संपन्न हुआ।
राज्यपाल का संबोधन
सभा को संबोधित करते हुए राज्यपाल सिंह ने नशीली दवाओं और मादक पदार्थों की लत को एक गंभीर सामाजिक समस्या बताया जो समाज के हर वर्ग को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि नशा-मुक्त समाज का निर्माण और उसका नेतृत्व करना दूरगामी और सकारात्मक बदलाव लाने में सक्षम है।
भारत की विशाल युवा आबादी का उल्लेख करते हुए उन्होंने इस बात पर बल दिया कि युवाओं को सही दिशा में मार्गदर्शन देना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे मादक पदार्थों की गिरफ्त में न आएं और स्वस्थ, उत्पादक नागरिक के रूप में भारत के भविष्य की नींव बन सकें।
मिजोरम की भौगोलिक और स्वास्थ्य चुनौतियाँ
राज्यपाल ने रेखांकित किया कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटे मिजोरम की भौगोलिक स्थिति के कारण राज्य में मादक पदार्थों की आवक और उनका प्रचलन अपेक्षाकृत अधिक है। उन्होंने चेताया कि मिजोरम देश में कैंसर के सर्वाधिक मामलों वाले राज्यों में से एक है और एचआईवी संक्रमण के मामले में भी यह राज्य ऊँचे पायदान पर है — जो इस दिशा में और अधिक सुनियोजित प्रयासों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है।
यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत के कई राज्य नशे की समस्या से जूझ रहे हैं और केंद्र सरकार इस क्षेत्र में जागरूकता अभियानों को तेज कर रही है।
छात्रों से आह्वान
राज्यपाल सिंह ने उपस्थित छात्रों को उनके माता-पिता और शिक्षकों की मेहनत तथा उनसे जुड़ी उम्मीदों की याद दिलाई। उन्होंने कहा, 'आपका भविष्य उज्ज्वल है — आपके परिवार, समाज और राज्य का भविष्य काफी हद तक आप पर निर्भर करता है, इसलिए उन्हें निराश न करें।'
उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे मादक पदार्थों से दूर रहने के संकल्प पर अडिग रहें और किसी भी प्रलोभन का सामना होने पर दृढ़ता से मना करें। साथ ही, उन्होंने सुझाव दिया कि नियमित व्यायाम और ध्यान के माध्यम से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखना नशे से दूर रहने का सबसे कारगर उपाय है।
जागरूकता दूत बनने का संदेश
राज्यपाल ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों को भली-भाँति समझकर वे समाज में जागरूकता के महत्वपूर्ण दूत बन सकते हैं। उन्होंने उनसे ऐसी आदर्श जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया जो अधिक से अधिक लोगों को प्रेरणा दे सके।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जागरूकता, दृढ़ संकल्प और सामूहिक सहयोग से मिजोरम मादक पदार्थों के सेवन, कैंसर और एचआईवी जैसी गंभीर चुनौतियों से सफलतापूर्वक पार पा सकता है। इस अभियान से राज्य में नशा-विरोधी चेतना को नई गति मिलने की उम्मीद है।