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मिजोरम में 'खेत बचाओ अभियान' का शुभारंभ: राज्यपाल वीके सिंह ने मृदा स्वास्थ्य और प्राकृतिक कृषि पर दिया ज़ोर

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मिजोरम में 'खेत बचाओ अभियान' का शुभारंभ: राज्यपाल वीके सिंह ने मृदा स्वास्थ्य और प्राकृतिक कृषि पर दिया ज़ोर

सारांश

मिजोरम में 'खेत बचाओ अभियान' की शुरुआत हुई — राज्यपाल वीके सिंह ने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग पर चिंता जताते हुए मृदा परीक्षण और प्राकृतिक कृषि की ओर बढ़ने का आह्वान किया। झूम खेती की चुनौतियों से जूझते इस पहाड़ी राज्य के लिए यह अभियान विशेष महत्व रखता है।

मुख्य बातें

राज्यपाल वीके सिंह ने 2 जून 2025 को आइजोल के लोक भवन में केंद्रीय कृषि मंत्रालय की 'खेत बचाओ अभियान' पहल का शुभारंभ किया।
अभियान का लक्ष्य रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग को कम कर मृदा स्वास्थ्य में सुधार और सतत कृषि को प्रोत्साहन देना है।
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री मोदी के प्राकृतिक कृषि पर राष्ट्रीय मिशन का उल्लेख करते हुए KVK और कृषि विशेषज्ञों से किसानों को मार्गदर्शन देने का आह्वान किया।
मिजोरम की विशिष्ट झूम खेती पद्धति में पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखना विशेष चुनौती है, जिसे मृदा परीक्षण से दूर किया जा सकता है।
CAU इम्फाल के कुलपति डॉ.
अनुपम मिश्रा ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर ज़ोर दिया।

मिजोरम के राज्यपाल वीके सिंह ने 2 जून 2025 को आइजोल के लोक भवन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की राष्ट्रव्यापी पहल 'खेत बचाओ अभियान' का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग पर अंकुश लगाकर मृदा स्वास्थ्य को पुनर्स्थापित करना और सतत कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना है।

अभियान का उद्देश्य और दायरा

केंद्र सरकार की इस राष्ट्रव्यापी पहल के अंतर्गत मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। अभियान का लक्ष्य कृषि उत्पादकता में वृद्धि के साथ-साथ पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा करना भी है। राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से कृषि भूमि के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है, जिसे रोकना अब अनिवार्य हो गया है।

राज्यपाल का संबोधन और प्रमुख बिंदु

लोक भवन में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए वीके सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्राकृतिक कृषि पर राष्ट्रीय मिशन का उल्लेख किया और धीरे-धीरे प्राकृतिक कृषि पद्धतियों की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से आग्रह किया कि वे किसानों को इस परिवर्तन में पूर्ण सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान करें।

राज्यपाल ने यह भी रेखांकित किया कि कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) और विशेषज्ञों के समन्वित प्रयासों से मिजोरम न केवल खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

मिजोरम की कृषि की विशिष्ट चुनौतियाँ

राज्यपाल ने विशेष रूप से मिजोरम की झूम खेती (पहाड़ी ढलानों पर जंगल जलाकर की जाने वाली स्थानांतरित खेती) की परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस पद्धति में मृदा में पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखना विशेष रूप से कठिन होता है। इसीलिए राज्य में मृदा परीक्षण और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों में किसानों को निरंतर प्रशिक्षण देना और बाज़ार संबंधों को मज़बूत करना अत्यंत आवश्यक है।

विशेषज्ञ की राय

केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (CAU), इम्फाल के कुलपति डॉ. अनुपम मिश्रा ने सभा में खाद्यान्न उत्पादन में ऊर्जा खपत घटाने की ज़रूरत पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस अभियान का मूल उद्देश्य केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं — जैसे मृदा स्वास्थ्य कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड, किसान पहचान पत्र और फसल बीमा — के बारे में व्यापक जागरूकता फैलाना और उनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है।

आगे की राह

यह अभियान ऐसे समय में शुरू हुआ है जब देशभर में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मृदा की उर्वरता घटने की चिंता बढ़ रही है। राज्यपाल ने किसानों से अपील की कि वे स्वस्थ और उच्च मूल्य वाली जैविक फसलों के उत्पादन को प्राथमिकता दें, जिससे उनकी आय और उपज की गुणवत्ता दोनों में सुधार हो सके। गौरतलब है कि मिजोरम जैसे पहाड़ी राज्यों में इस अभियान की सफलता प्राकृतिक कृषि के राष्ट्रीय लक्ष्यों को ज़मीनी स्तर पर आकार देने में अहम भूमिका निभा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इन्हें रातोंरात बदलना न तो व्यावहारिक है, न ही सांस्कृतिक दृष्टि से सरल। असली सवाल यह है कि क्या मृदा परीक्षण और KVK-आधारित प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त बजट और जनशक्ति उपलब्ध कराई जाएगी, या यह अभियान भी घोषणाओं तक सिमट जाएगा। किसानों की आय वृद्धि का लक्ष्य तब तक कागज़ी रहेगा, जब तक बाज़ार संपर्क और उपज की उचित क़ीमत सुनिश्चित नहीं होती।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'खेत बचाओ अभियान' क्या है?
'खेत बचाओ अभियान' केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की एक राष्ट्रव्यापी पहल है, जिसका उद्देश्य मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देकर मृदा क्षरण को रोकना है। यह अभियान रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले नुकसान को कम करने और कृषि उत्पादकता सुधारने पर केंद्रित है।
मिजोरम में यह अभियान किसने और कब शुरू किया?
मिजोरम के राज्यपाल वीके सिंह ने 2 जून 2025 को आइजोल के लोक भवन में इस अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इम्फाल के कुलपति डॉ. अनुपम मिश्रा सहित कृषि विशेषज्ञ भी उपस्थित थे।
मिजोरम के किसानों के लिए यह अभियान क्यों महत्वपूर्ण है?
मिजोरम में पहाड़ी ढलानों पर झूम खेती (स्थानांतरित खेती) की परंपरा के कारण मृदा में पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखना विशेष रूप से कठिन है। यह अभियान मृदा परीक्षण, आधुनिक प्रशिक्षण और बाज़ार संपर्क के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने और उपज की गुणवत्ता सुधारने में सहायक हो सकता है।
अभियान के तहत किसानों को कौन-सी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा?
डॉ. अनुपम मिश्रा के अनुसार इस अभियान के अंतर्गत मृदा स्वास्थ्य कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड, किसान पहचान पत्र और फसल बीमा जैसी केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाई जाएगी और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान दिया जाएगा।
प्राकृतिक कृषि पर राष्ट्रीय मिशन से इस अभियान का क्या संबंध है?
राज्यपाल वीके सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्राकृतिक कृषि पर राष्ट्रीय मिशन का उल्लेख करते हुए बताया कि 'खेत बचाओ अभियान' उसी दिशा में एक व्यावहारिक कदम है। इसका लक्ष्य किसानों को धीरे-धीरे रासायनिक निर्भरता से हटाकर प्राकृतिक और जैविक कृषि पद्धतियों की ओर ले जाना है।
राष्ट्र प्रेस
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