14 जुलाई 2026
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'खेत बचाओ अभियान' 1 जून से: शिवराज सिंह चौहान ने कहा — मिट्टी, किसान और खेत बचाना है असली लक्ष्य

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'खेत बचाओ अभियान' 1 जून से: शिवराज सिंह चौहान ने कहा — मिट्टी, किसान और खेत बचाना है असली लक्ष्य

सारांश

'खेत बचाओ अभियान' सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं — यह मिट्टी की घटती उर्वरता और बेतहाशा रासायनिक खाद के उपयोग के खिलाफ एक महीने का राष्ट्रव्यापी दांव है। 1,600 से अधिक टीमें, पंचायत से ICAR तक की साझेदारी और मापने योग्य परिणामों की शर्त — यह अभियान कितना असरदार होगा, यह जून के बाद पता चलेगा।

मुख्य बातें

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 30 मई 2026 को 'खेत बचाओ अभियान' की तैयारियों पर उच्चस्तरीय बैठक की।
अभियान 1 जून से 30 जून 2026 तक पूरे देश में चलेगा; थीम: 'कम खाद, सही खाद और सही सलाह'।
देशभर में 1,600 से अधिक टीमें गठित; अत्यधिक उर्वरक उपयोग वाले 100+ जिलों में 500 विशेष टीमें तैनात।
KVK और ICAR की 1,150+ टीमें भी अभियान में सक्रिय रहेंगी।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम-किसान छूटे लाभार्थी, दलहन-तिलहन मिशन और जल संरक्षण भी अभियान का हिस्सा।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 30 मई 2026 को नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक में घोषणा की कि 1 जून से 30 जून 2026 तक पूरे देश में 'खेत बचाओ अभियान' चलाया जाएगा। यह अभियान मात्र एक जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि मिट्टी की सेहत सुधारने, असंतुलित रासायनिक उर्वरकों के उपयोग पर लगाम लगाने और किसानों को समय पर व्यावहारिक सलाह देने का राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन होगा।

अभियान का मुख्य फोकस

बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि अभियान की मूल थीम 'कम खाद, सही खाद और सही सलाह' होगी। इसके तहत असंतुलित रासायनिक उर्वरक उपयोग को घटाना, मृदा स्वास्थ्य परीक्षण के आधार पर खाद का चयन, जैविक एवं जैव-उत्पादों को प्रोत्साहन और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) को बढ़ावा देना प्राथमिकता में रहेगा।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अभियान के परिणाम मापने योग्य हों और खेत स्तर पर वास्तविक बदलाव दिखना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हमारा लक्ष्य है कि खेत बचे, लागत संभले, मिट्टी सुधरे और किसान आत्मनिर्भर बने।'

ज़मीनी स्तर से तैयारी

चौहान ने जोर दिया कि यह अभियान ऊपर से थोपा नहीं जाएगा, बल्कि पंचायत स्तर से शुरू होकर गाँव-गाँव तक पहुँचेगा। उन्होंने कहा, 'पंचायत, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), ICAR, राज्य सरकारें और जनप्रतिनिधि मिलकर इसे सफल बनाएंगे।' फसल विविधीकरण, कम पानी वाली फसलों को प्रोत्साहन और जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

टीमों की तैनाती और संरचना

अभियान के तहत देशभर में 1,600 से अधिक टीमें गठित की गई हैं। जिन 100 से अधिक जिलों में उर्वरक उपयोग अत्यधिक है, वहाँ 500 विशेष टीमें काम करेंगी। इसके अतिरिक्त KVK और ICAR की 1,150 से अधिक टीमें भी मैदान में सक्रिय रहेंगी।

अभियान में शामिल गतिविधियाँ

पंचायत स्तर पर मशीनरी वितरण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम-किसान योजना के छूटे हुए लाभार्थियों को जोड़ना, दलहन-तिलहन मिशन और जल संरक्षण जैसी गतिविधियाँ भी इस अभियान का हिस्सा होंगी। मौसम, मिट्टी की स्थिति और बाज़ार के अनुसार किसानों को व्यावहारिक सलाह देने की विशेष व्यवस्था की गई है।

आगे क्या

यह अभियान 30 जून 2026 तक चलेगा और इसके परिणामों की समीक्षा के लिए मापने योग्य संकेतक निर्धारित किए गए हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ज़मीनी क्रियान्वयन प्रभावी रहा, तो यह अभियान मिट्टी की घटती उर्वरता और बढ़ती खेती लागत की दीर्घकालिक समस्या से निपटने की दिशा में एक ठोस कदम साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

600 टीमों की यह मशीनरी केवल 'जागरूकता' तक सिमटेगी या खेत स्तर पर उर्वरक उपयोग के आँकड़ों में वास्तविक गिरावट दर्ज होगी। मापने योग्य परिणामों की शर्त सही दिशा में है, लेकिन बिना स्वतंत्र सत्यापन तंत्र के यह आत्म-मूल्यांकन तक सीमित रह सकता है। एक महीने का अभियान दशकों की खेती की आदतें नहीं बदलता — इसके लिए नीतिगत निरंतरता और किसानों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन दोनों ज़रूरी हैं।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'खेत बचाओ अभियान' क्या है?
यह केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में 1 जून से 30 जून 2026 तक चलाया जाने वाला राष्ट्रव्यापी कृषि अभियान है। इसका उद्देश्य असंतुलित रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करना, मिट्टी की सेहत सुधारना और किसानों को व्यावहारिक सलाह देना है।
इस अभियान में कितनी टीमें काम करेंगी?
अभियान के तहत देशभर में 1,600 से अधिक टीमें गठित की गई हैं। अत्यधिक उर्वरक उपयोग वाले 100 से अधिक जिलों में 500 विशेष टीमें और KVK व ICAR की 1,150 से अधिक टीमें मैदान में सक्रिय रहेंगी।
अभियान का मुख्य फोकस क्या है?
अभियान की थीम 'कम खाद, सही खाद और सही सलाह' है। इसमें मृदा स्वास्थ्य परीक्षण के आधार पर खाद उपयोग, जैविक उत्पादों को प्रोत्साहन, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM), फसल विविधीकरण और जल संरक्षण शामिल हैं।
अभियान से किसानों को क्या फायदा होगा?
किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड और पीएम-किसान योजना से जोड़ा जाएगा। साथ ही मौसम, मिट्टी और बाज़ार के अनुसार व्यावहारिक सलाह मिलेगी, जिससे खेती की लागत कम होने और उत्पादकता बढ़ने की उम्मीद है।
अभियान की शुरुआत कहाँ से होगी?
यह अभियान पंचायत स्तर से शुरू होगा और गाँव-गाँव तक पहुँचेगा। पंचायत, KVK, ICAR, राज्य सरकारें और जनप्रतिनिधि मिलकर इसे क्रियान्वित करेंगे — यह ऊपर से थोपा नहीं जाएगा, बल्कि ज़मीनी स्तर से तैयार होगा।
राष्ट्र प्रेस
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